Thursday, March 1, 2007

वर्ल्‍ड कप तो वर्ल्‍ड का है मगर टीम इंडिया इंडिया की कितनी है?

हमारे मित्र कमल जी क्रिकेट के विशेष प्रेमी हैं. बच्‍ची का होमवर्क करवाते हुए भले उनकी आंख लग जाये, लेकिन टीम इंडिया विदेशी दौरे पर गई हो तो कुनमुनाती पत्‍नी के असंतोष के बावजूद, साहब भोर के पांच बजे तक, म्‍यूट और साऊंड के बीच आते-जाते, टीवी देखने का हौसला रखते हैं (अगले दिन दफ्तर में झपकी आये और साहब अपने चैंबर में बुलाकर इन्‍हें लताड पिलाये, तो उस लताड को हंसते हुए पी जाने की हिम्‍मत भी रखते हैं). क्रिकेट के प्रति हमारी उदासीनता को हमारे असामाजिक होने की मुख्‍य वजह मानते हैं, और यह रोग नियंत्रण में रहे इसके लिए फोन पर बीच-बीच में हमें क्रिकेट लेटेस्‍ट से अपडेट करते रहते हैं. इन दिनों वर्ल्‍ड कप का बुखार चढा हुआ है, और मैं हमेशा की तरह फिर पिछडा हुआ हूं, तो ज़ाहिरन कमल जी के फोनों की संख्‍या बढ गई है. आज सुबह बैंक में खडा मैं अपने अकाउंट की दशा देखकर चिंतित हो रहा था जब कमल जी का फोन आया. अकाउंट का ख़्याल छोडकर एकदम-से सहवाग के करियर के लिए चिंतित होने में मुझे थोडी असुविधा हुई, तो मैंने कमल जी को सूचित किया अभी व्‍यस्‍त हूं, बाद में बात करते हैं, और फोन काटकर फिर से अकाउंट के बारे में सोचने के सुख में लौट गया.

फिर फोन की घंटी बजी. कमल जी ही थे. मैंने फोन काट दिया. घंटी दुबारा बजी. बजती रही. अब दूसरे लोग ही नहीं, बैंक का गार्ड भी मुझे लोकेट करके नाराज़गी से घूर रहा था. मुझे कमल जी पर गुस्‍सा आया. लेकिन कमल जी और ज्‍यादा गुस्‍से में थे. चीखकर कहा, तुमलोग ऐसा क्‍यों करते हो? मैंने कातर स्‍वर में सफाई देने की कोशिश की तो चिढकर बोले- मैं तुम्‍हारे बैंक की चिरगिल्‍ली दिक्‍कतों की नहीं ब्‍लॉग की बात कर रहा हूं. ब्‍लॉग पे ये अंड-बंड क्‍यों लिखते हो तुमलोग?

मुझे तत्‍काल होश नहीं हुआ कि अंड-बंड या सार्थक क्‍या लिखा था मैंने. -कुछ उल्‍टा-सीधा चला गया होगा. जाने दो, यार. पैसे खत्‍म हो रहे हैं. दिमाग इन दिनों ठीक से चलता नहीं...

-तुम्‍हारी नहीं, रघुराज की बात कर रहा हूं. वह तो अच्‍छी नौकरी पर है. फिर इस तरह डिमोरालाइज़ करनेवाली बातें फैलाने का क्‍या तुक है?

मैं कनफ्यूज़ हो रहा था लेकिन अब मुझे कनेक्‍शन समझ में आया. मैंने हंसने की एक्टिंग की, -रघुराज ने थोडी लिखा है, वो तो इकॉनॉमिक टाईम्‍स का राइटअप है.

-फिर भी उसे अभी अपने ब्‍लॉग पर चढाने की क्‍या ज़रुरत थी? टीम का परफॉरमेंस अच्‍छा नहीं चल रहा, लोगों का मोरेल वैसे भी डाऊन है, और तुमलोग उसमें और गड्ढा करो! कहने के बाद खिन्‍नता से कमल जी ने फोन काट दिया.

मेरा मोरेल भी कोई बहुत अप नहीं था. मैं थोडी देर तक असमंजस में रहा कि टीम इंडिया के साथ रहूं, या अपने अकाउंट की दुरव्‍यवस्‍था में लौटूं.

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