Tuesday, March 20, 2007

सेज़ का रास्‍ता और नंदीग्राम हिंसा के वीडियो लिंक्‍स

देश में सेज़ (स्‍पेशल इकॉनॉमिक जोन) रुपी विकास की धारा पर हमने पिछले दिनों कुछेक टिप्‍पणियां की थी. उस पर हम फिर-फिर लौटते रहेंगे. आर्थिक विषयों पर विशेषज्ञता का हमारा दावा नहीं है. सो निश्‍चय ही उसमें कमियां रही होंगी. नंदीग्राम जैसे मौके उसमें भावना का पुट भरकर शायद उसकी दृष्टि सीमित भी करें. हम मानते हैं वह हमारे व्‍यक्ति और हमारे तंग साधनों की सीमा है. उसका हमें एम्‍बैरेसमेंट नहीं. हमारी असल चिंता तो यह है कि इस देश के आमजन के बतौर हम उस प्रक्रिया और बदलाव के नक्‍शे को ठीक-ठीक समझ सकें जो आनेवाले वर्षों में हमें इस देश के आर्थिक परिदृश्‍य में दिखना शुरु होगा. और जैसी तस्‍वीर उभर रही है सेज़ की चर्चा किसी न किसी शक्‍ल में निरंतर उस दायरे के इर्द-गिर्द रहेगी. हमारी कमअक्‍ली की सीमाओं से परे देखिये एक व्‍यावसायिक आर्थिक पत्र (बिज़नेस स्‍टैंडर्ड) के टिप्‍पणीकार नितिन देसाई भला सेज़ के बारे में क्‍यों आशंका व्‍यक्‍त कर रहे हैं.

साथ ही यू-ट्यूब पर डाले वीडियो का एक लिंक दे रहे हैं. वीडियो से तस्‍वीर मिलती है नंदीग्राम में सरकार कैसी ख़ून की होली खेल रही थी.

(दोनों ही लिंक इंडियनइकॉनमी डॉट ऑर्ग से साभार)

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