Monday, April 9, 2007

क्‍या हम कुत्‍ते का भला कर रहे हैं?

हाल में प्रकाश में आये कुत्‍ता-निबंध की एक अप्रगतिशील पुनर्परीक्षा

हर्ष की बात है कि अंतत: कुत्‍ता जैसे हितकारी विषय पर समाज (अप्रगतिशील) चेता, और आपात्कालीन बुलेटिन द्वारा निबंध प्रकाशन से तत्‍संबंधी इंटेरिम रोशनी डाली गयी. बधाई. मगर सुख की बहार में बहते हुए हम उन प्राथमिक गल्तियों की अनदेखी न करें जिसमें निबंध सिर से पैर तक नहाया हुआ है. जिन भी मिस्‍टर अज्ञात ने यह महत्‍वपूर्ण बीड़ा उठाया, अपने प्रयास पर उनको साधुवाद, किंतु बंधु, आपका शोध दुरुस्‍त नहीं. आपके तथ्‍य अधूरे हैं! आप गुस्‍ताव एंडरसन जैसे विद्वान के माईलस्‍टोन ग्रंथ कुत्‍ता समग्र को बगल में रखकर ‘कुत्‍ते कंप्‍यूटर नहीं जानते..’, ‘इराक युद्ध पर उनका स्‍टैंड नहीं..’(1) जैसी बुनियादी बकवास लिखते हैं. मित्र (या अप्रगतिशील समाज का शत्रु?), अगर आपने सचमुच गुस्‍ताव एंडरसन को पढ़ा होता तो आप निश्‍चय नोट करते कि अप्रगतिशील इतिहास ऐसे दृष्‍टांतों से भरा पड़ा है जहां कुत्‍ता कंप्‍यूटर को केवल ऑन-ऑफ करना ही नहीं जानता, बल्कि फ्री-सेल और विनऐंप और मीडिया प्‍लेयर पर हिमेश रेशमिया का फोल्‍डर लोकेट करता है, और लोकेट करके बजाना भी जानता है(2)! रही बात इराक युद्ध पर स्‍टैंड की तो आप भूल रहे हैं कि देवघर का भुरिया मांझी न केवल सीएनएन और बीबीसी पर इराक युद्ध का फुटेज देखकर, बल्कि आज तक और स्‍टार न्‍यूज़ जैसे घटिया चैनलों पर भी इराक संबंधी किसी चर्चा के आते ही टीवी के आगे पेशाब करने लगता है. और पैर उठाकर करता है. क्‍या युद्ध की विभिषका पर इसे आप उसका अहिंसक प्रोटेस्‍ट मानने से इंकार करेंगे? अगर आप ऐसा करेंगे (इंकार) तो आप एक सच्‍चे अप्रगतिशील कहलाने के अधिकारी नहीं! कुत्‍ते के पक्ष में दिये दृष्‍टांतों में भी निबंध अपने संकीर्ण नज़रिये से ऊपर नहीं उठ पाता. हमें बताया जाता है कि कुत्‍ता चाटता और काटता है. क्‍या कुत्‍ता सिर्फ इतना भर करता है? क्‍या ज़रूरी नहीं कि यहां हम कुत्‍ता-प्रेम का उसकी समूची विहंगमता में स्‍मरण करें (नैतिक व भौतिक दोनों पक्षों से. भौतिक पक्षोंवाला मेरे पास एक पूरा एलबम है जिसकी एक कॉपी मैं सहर्ष अप्रगतिशील ग्रंथमाला को समर्पित कर सकता हूं)? फिर कुत्‍ते की मौत जैसे प्रचलित मुहावरे. क्‍या यह उचित मौका नहीं कि हम ऐसे मुहावरों की पुनर्परीक्षा करें?

आपका ही,
एक सच्‍चा अप्रगतिशील कुत्‍ता-हितैषी

(1). अप्रगतिशील सुलभ ग्रंथमाला, भाग एक, खंड दो का अप्रैल आपातकालीन बुलेटिन, पंक्ति संख्‍या आठ और नौ.
(2). पटना के कंकड़बाग का वर्ल्‍ड-फेमस कुत्‍ता पटरु, संपर्क: 9322119988

No comments:

Post a Comment