Sunday, April 22, 2007

प्‍यार के पल दो पल

बीस वर्ष बाद ब्‍लॉग और रवीश कुमार: तैंतीस

मन शीतल होता न दिखा (यानी रेहाना पास आती न दिखी) तो मैं झुंझलाकर अनिल कपूर होने लगा (माने मवालीगिरी पर उतर आया), कहा- यार, हद है! जुम्‍मा-जुम्‍मा की मुलाकात.. प्‍यार-स्‍यार की रुमानियत में डूबने-उतराने की बजाय हर बखत हम एक-दूसरे का सिर नोंचे रहते हैं, ये कहां ले जाएगी हमारी मुहब्‍बत को!..

रेहाना में मेरी ओर ऐसे देखा जैसे अज्ञेय अपने काव्‍यपाठ के दरमियान अशोक चक्रधर की तरफ देखते. करीना कपूर मल्लिका शेरावत को देखती. बुंबई बोलांगीर देखती. मगर रेहाना ने महज़ देखा भर नहीं, देखती रही. किसकी पलक पहले गिर जायेगी वाला कंपिटिशन होने लगा. लेडीज़ फर्स्‍ट की याद करके पलकों को क्‍या, मैंने खुद को पूरा ही गिरा लिया, हें-हें हंसने लगा. रेहाना ने कान पर रखी सिगरेट निकाल कर सुलगा ली और धुआं उड़ाते हुए ‘पल्‍प फिक्‍शन’ के उमा थरमन वाले शॉट्स देने लगी. मैंने लेते हुए कहा- ये कान पर सिगरेट रखने का चलन तुम्‍हारे देश में भी है? हमने तो किसी ईरानी फिल्‍म में किसी कमउम्र हसीना को कभी सिगरेट पीते नहीं देखा. कमउम्र क्‍या बुजुर्गवार को भी नहीं देखा!

उमा थरमन की काया से निकलकर मांगा कॉमिक्‍स की किसी गंभीर विचारमग्‍न नायिका में तब्‍दील होती हुई रेहाना बोली- शायद शिक्षित, संस्‍कारी परिवार में तुम नहीं जन्‍मे. शायद बचपन में उपयुक्‍त मात्रा में तुम्‍हें प्रेम नहीं मिला. शायद इसीलिए प्रेम-प्रेम करके इतना ललकते रहते हो, छोटी-छोटी तकलीफ़ों से तुम्‍हारा चित्‍त अकिंचन होने लगता है (‘अकिंचन होने लगता है..’? तत्‍क्षण रेहाना की भाषा सुधारना चाहता था फिर मुझे लगा यह क्षण भाषा का नहीं भावनाओं का है), मैं इन तकलीफ़ों का जवाब नहीं हूं, प्रमोद. मैं यह रिक्‍तता व तिक्‍तता भर नहीं सकती! खुद तुम्‍हीं को इसकी लड़ाई लड़नी होगी. समाधान ढूंढ़ना होगा. मेरे ऊपर वैसे भी ढेरों जिम्‍मेदारियां हैं मेरी जिम्‍मेदारियां बढ़ाओ मत. बात-बात पर सताओ मत. बेवजह दुखी होऊंगी, तुम्‍हारा दुख हर नहीं सकूंगी!

भावों के ऐसे उच्‍छावास के बाद साहित्‍य और सिनेमा दोनों में प्रेमी-प्रेमिका एक-दूसरे से लिपट-चिपट जाते हैं, गले में बांह डालकर फुसफुसाते हुए दूसरे बड़े कारनामों की पूर्व पीठिका बनाने लगते हैं. मैं भी उसी परंपरा में स्‍नान करने को उद्धत हो रहा था, लेकिन परिस्थिति, साली, अनुकूल नहीं हो रही थी! नायिका तीन से छै कदम की दूरी पर चली गई और नौ साल का एक बेलग्रादी तस्‍कर लौंडा हमारे बीच अपने मर्चेंडाइस का मिनी स्‍टॉल लगाकर प्रेमबाधा बनने लगा. इसके पहले कि मैं हरकत में आऊं, रेहाना को वही रिझा रहा था. चीनी सिगरेट, सैंडल और ब्‍लॉग रिट्रीव करने के सॉफ्टवेयर दिखा रहा था. रेहाना ने गहरी उदासी से एक नज़र उसके माल-मत्‍ते पर डाली, फिर लौंडे के भूरे बालों में हाथ फेरकर नज़रें फेर लीं. मगर लौंडा उसमें संभावित ग्राहक देखकर चिपका रहा, तेजी से माल का रेट डाऊन करके मोलभाव करने लगा. भारतीय परिस्थिति होती तो कॉलर से लड़के को टांगकर चूतड़ पर एक लात लगाकर मैं उसे बाजू में कहीं ठेल देता, मगर रेहाना की मौजूदगी में शराफ़त की मुरव्‍वत करने को मजबूर था. मुस्‍कराकर लड़के को इशारा किया कि वी आर इन सीरियस डिस्‍कशन, डोंट बॉदर अस, पैल, प्‍लीज़? आज़ि‍ज आकर रेहाना ने कहा- आखिर तुम मुझसे चाहते क्‍या हो?

नीचे मैदान में हो रहे ह्यूज, अमानवीय कंस्‍ट्रक्‍शन को मानवीय उदास नज़रों से देखता मैंने धीरे-धीरे कहा- एक आदमी एक औरत से क्‍या चाह सकता है!

नायिका चिढ़कर बोली- येस, गो ऑन?.. आई डोंट नो. एजुकेट मी!

भरे गले से नायक ने कहा- मामूली, होमली कंफर्ट्स, मिस, व्‍हॉट एल्‍स. कि धुले हुए कुर्ते-पजामे में सोफे पर फैला हुआ, हाथ में पेपर लिये मैं समय और समाज के बारे में कंप्‍लेन करुं, तुम नाइटि में किचन में कोई ईरानियन डिश ट्राई करो, फिर खाने के बाद हम मल्‍टीप्‍लेक्‍स में साथ-साथ कोई बी ग्रेड चायनीज़ रोमेंटिक फिल्‍म देखने जायें, अंधेरे में मेरा हाथ अपने हाथ में लेकर मेरे कंधे पर तुम अपना सिर टिका दो..- रेहाना के गुस्‍से से बचने के लिए मैंने ज़मीन पर गिरी एक सूखी टहनी उठा ली. धूल पर दिल में धंसी तीर की वर्ल्‍ड फेमस स्‍केच आंकने लगा.

रेहाना स्‍केच देखकर भावुक व इंप्रेस होने की बजाय और फैल गई, एकदम-से तेहरानी रेख्‍ता बोलने लगी- यू आर इनसपोर्टेबल. यू नो व्‍हॉट? मैं न आज तक कभी किचन में घुसी हूं न घुसने का इरादा है! तो फालतू सपने देखना बंद करो और अपने पैरों पर खड़े होना सीखो.. बिकॉज़ आई एम नॉट गोइंग टू कम एंड स्‍पून फीड यू! नेवर, एवर! रिमेम्‍बर दैट. आई हैव गॉट लॉट्स एंट लॉट्स ऑव अदर वरीस ऑन माई हेड. मैंने तुमसे पहले ही दिन कहा था और भी ग़म हैं ज़माने में मुहब्‍बत के सिवा..

मैं दुखी होकर बुदबुदाया- तब तुमने प्‍यार से कहा था. और ये भी कहा था कि तुमने हिंदी कैसे सीखी ये बताओगी, डिफ्लावर कब हुई थीं.. यू मेड सो मेनी प्रॉमिसेस, डिंडन्‍ट फुलफिल एनी..

- दैट्स एनफ, आई वोंट टेक एनी ऑव दिज़ बुलशिट, आई अम लीविंग..

- लीविंग? और मैं क्‍या करुंगा? इस अनजाने-बेगाने शहर में.. डोंट ब्रेक माई हार्ट, रेहु!

- डोंट कॉल मी दैट, यू हैव ऑलरेडी वल्‍गराइज्‍ड एनफ एज़ इट इज़.. तुम्‍हारे सिवा मैंने और भी प्रॉमिसेस किये हैं. अपनी कंट्री से किये हैं, आई कांट बीट्रे देम, कैन आई?.. वो नीचे टेंट के सामने कटिंग पी रहा एक इंडियन है, उससे गप्‍प लड़ाओ तबतक मैं कुछ काम की चीज़ करके आती हूं!

कौन इंडियन, कौन टेंट जैसे सवालों से मैं उसे और थोड़ी देर स्‍टाक करुं के पहले ही रेहाना ये आ और वो जा के अंदाज़ में फुर्र हो चुकी थी. उसके पीछे-पीछे वो तस्‍कर शैतान भी फुर्र हो गया. रह गया महज़ मेरा भीषण एकांत और सिगरेट का कुछ छूटा हुआ धुआं..

(जारी...)

1 comment:

  1. अज़दक पर आज पहली बार आया...बहुत अपना सा लगा ये चिठ्ठा....शायद बहुत जल्द react कर रहा हूं...हिन्दी की तस्वीर बदलती सी लगी आपके यहां आकर...
    इंशाअल्लाह.
    joglikhisanjaypatelki.blogspot.com

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