Monday, April 9, 2007

कुत्‍ता: एन इंट्रोडक्‍टरी एसे

गाय के बरअक्‍स चंद उपयोगी सामाजिक प्रस्‍थापनाएं

क्‍या आप कुत्‍तों को जानते हैं? क्‍या कुत्‍ता आपको जानता है? यह एक गंभीर प्रश्‍न है जिसका जवाब निश्‍चय ही टॉमी, टोनी, ब्‍लोंडी, कालू को जानने के सरल रास्‍ते से नहीं दिया जा सकता. कुत्‍तों के प्रख्‍यात विशेषज्ञ गुस्‍ताव एंडरसन ने अपने विश्‍व-विख्‍यात निबंध में गलत नहीं कहा कि ‘आपने कुत्‍तों को जान लिया है तो आप जीवन जान गये हैं(1)! पतन के कगार पर खड़ी मानव सभ्‍यता के साथ यही मुश्किल रही है कि उसने हिटलर को जान लिया, जॉज डब्‍ल्‍यू बुश और बिल गेट्स को पहचान लिया लेकिन कुत्‍तों की अभी तक ठीक-ठीक पहचान नहीं कर सकी है. क्‍यों? क्‍या इसलिए कि कुत्‍ते कंप्‍यूटर नहीं जानते? या इसकी वजह यह है कि कुत्‍तों ने इराक युद्ध पर अभी तक कोई सार्वजनिक स्‍टैंड नहीं लिया? क्‍या सचमुच इतने सीमित, संकीर्ण कारणों से कुत्‍तों के बारे में व्‍यापक स्‍तर पर राय कायम करने से हम वंचित रह गए हैं? क्‍या हमें इसका ज़रा भी अंदाज़ा है कि बोलीविया के जल-संकट की तरह ‘डीलेड डॉग थिंकिंग’ हमारा कितना राष्‍ट्रीय नुकसान कर रही है! और आनेवाले समय में (अगर कोई आनेवाला समय हुआ तो) इस दौर के समूचे नुकसान के लिए अर्थशास्‍त्री व इतिहासकार हमें ‘कुत्‍ता क्राइसिस परिघटना’ का दोषी ठहराने वाले हैं(2)? समय आ गया है, दोस्‍तो, कि हम अतीत के अज्ञान की खामियों को धोकर एक नए श्‍वान स्‍वर्णयुग का सूत्रपात करें. कुत्‍ते को जानते हुए अपने को, अपने समय को जानें.

पहली बात, गाय के बारे में आपने स्‍कूलों में पढ़ा ही था, कुत्‍तों के बारे में हमसे जान लीजिये; यह कि गाय की ही तरह कुत्‍ता भी एक चौपाया जानवर है. गाय की ही तरह कुत्‍ता भी (मादा) दूध देता है लेकिन उसका सेवन अभी सिर्फ पिल्‍ले कर रहे हैं. क्‍या- एक ऐसे देश में जिसे अतीत में दूध की नदियां बहानेवाला कहा गया लेकिन वर्तमान में वह जल के साथ-साथ दूध के भी अक्‍यूट क्राइसिस से गुजर रही है- यह विचारणीय नहीं कि हम पिल्‍लों के साथ-साथ पीपल्‍स की भी सोचें, और डॉग मिल्‍क को कंसीडर करके रिसोर्सेस के एक बड़े संकट से राष्‍ट्र को उबारने में हाथ बंटायें? अमूल की जननी गुजरात इस दिशा में हमारा प्रेरणा स्‍त्रोत हो सकता है.

समानता के साथ यहां इस फर्क़ पर भी ध्‍यान देने की बात है कि गाय लात मारती है जबकि कुत्‍ता लात नहीं मारता. भौंकता, जीभ से चाटता और दांत से काटता है. गाय के गोबर का आप ऊर्जा संचयन व मुहावरों में उपयोग कर सकते हैं जबकि कुत्‍ता-गू के बारे में शोध अभी भी प्रगतिवस्‍था में है, और पर्याप्‍त जानकारी के इकट्ठा होते ही उसे सार्वजनिक उपयोग के लिए सामने रखा जाएगा. कुत्‍ते के पक्ष में एक अच्‍छा तर्क यह भी है कि उसे आप बिस्‍तर में साथ लेकर सो सकते हैं, जबकि ‍गाय को बिस्‍तर में साथ लेकर सोने की घटना अभी तक प्रकाश में नहीं आयी है. कुत्‍ता साइकिल और मोटर सवार दोनों के साथ-साथ दौड़कर उन्‍हें भयभीत करके उनकी गति में अतुलनीय तेजी उत्‍पन्‍न कर सकता है, जबकि यही काम करते हुए गाय अपने और मोटर सवार दोनों के लिए खतरा बन सकती है. वह और मोटर सवार दोनों एक्‍सीडेंट में उलझकर घायल हो जा सकते हैं(3).

बंधुओ, बॉल अब आपके कोर्ट में है, और विचार करने की बारी आपकी है.

पाद-टिप्‍पणियां:

(1). गुस्‍ताव एंडरसन: कुत्‍ता समग्र, खंड- सात, बोलोन्‍या विश्‍वविद्यालय, 2007.
(2). ज्ञातव्‍य है इस संबंध में उभरती आर्थिक टिप्‍पणीकार द्वयी जी पटनायक और पी शाह ने डेन्‍वर, यूएस में पिछले दिनों पर्चा पढ़कर खासा हंगामा उत्‍पन्‍न कर दिया. स्‍थानीय पत्रों में ही उससे खलबली नहीं मची, एक्‍सप्रैस व दि टेलीग्राफ के संपादकों तक को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा.
(3). इज्ञ्नात्सियो पेरेरा: मैक्सिको में गाय व मोटर सवारों की भिड़ंत, एक सामाजिक सर्वेक्षण, पात्‍ज़ो पब्लिकेशन, मैड्रिड, 2003.

अप्रगतिशील सुलभ ग्रंथमाला, भाग एक, खंड दो के अप्रैल आपातकालीन बुलेटिन में जारी. लेखक: (अभी तक) अज्ञात.

2 comments:

  1. काश आप इस लेख को और विस्तार देते । आम पाठक इसके सामाजिक पहलुओं के बारे में जान जाता । प्लीज और लिखा जाए ताकि हमारा दायरा बढ़ जाए ।
    रवीश

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  2. धन्यवाद , ऎसे कुत्ता -समय में कुत्ता-चिंतन की पहल आपने की आप अपने कुत्ता-शोध को जारी रखें तथा समय -समय पर हमें कुत्ता संबधी शोध निष्कर्षों से अवगत कराते रहें

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