Monday, April 9, 2007

कामकाजी आदमी



एक
कामकाजी आदमी बस से उतरकर रिक्‍शा चढ़ता है. भागकर दफ़्तर पहुंचता है. घड़ी देखकर खुश होता है कि दस बजने में अभी भी सात मिनट बाकी हैं. पियन को बुलाकर पानी और साहब की बाबत पूछता है. कंप्‍यूटर खोलकर लॉग इन करता है, दु:खी होता है कि लखनऊ की साली ने अभी भी जवाब नहीं दिया ई-मेल का. साहब के आने के पहले सोलितेयर की दो पाली खेल लेता है कामकाजी आदमी. अलमारी खोल मिस शर्मा फ़ाईल वापस रखती हैं तो उनकी पीठ देखता है, सोचता है उसकी पत्‍नी की पीठ ऐसी कसी क्‍यों नहीं. पलटती हैं मिस शर्मा तो चेहरा गंभीर बनाकर पूछता है अब तबियत कैसी है मदर की, अस्‍पताल से डिस्‍चार्ज कब करेंगे. मिस शर्मा उदास होकर बुदबुदाती हैं. कामकाजी आदमी को अच्‍छा लगता है मिस शर्मा का उदास होकर बुदबुदाना. गला मोड़कर, उंगलियां तोड़कर तीसरी दफे खोलता है चेन्‍नई का कोरेसपोंडेंस और तीसरी दफे बंद करता है कामकाजी आदमी. साहब के आते ही खामखा व्‍यस्‍त हो जाता है. हड़बड़ी में पत्‍नी को फोन करता है शाम को संभव नहीं होगा आज सब्‍जी खरीदना, जो मन आये, बनाये, माथा न खाये. चिंतित होकर जेब में दवाईयां चेक करता है कामकाजी आदमी. कितना काम है जिंदगी हराम है, डेढ़ बजने में अभी भी दस मिनट हैं सोचकर फिर कंप्‍यूटर ऑन करता है कामकाजी आदमी.


दो
छुट्टी के दिन बहुत सोता है कामकाजी आदमी. पत्‍नी की बातें और फोन पर रिश्‍तेदारों को सुनता है. हाऊसिंग लोन के कागज अरेंज करता है, कानपुर वाले मामा की फिर सलाह लेता है कामकाजी आदमी. रंगीन बरमुडा और हवाई चप्‍पल में पैर फैलाकर टीवी के आगे आराम से बैठता है, देश-जहान की खबर लेता है. पत्‍नी आकर गुनगुनाकर पूछती है बाज़ार कब जायेंगे तो सुनकर नहीं सुनता कामकाजी आदमी. बेटी पर बरसता है कि सुबह से देख रहा है उसकी फुटानी. यही हाल रहा तो बन चुकी वह राजकुमारी. पत्‍नी राजमाता बनी रसोई में काटती है धनिया, कूटती है लहसुन. सोफे पर उनींदे, आंखें मूंदे मन ही मन हंसता है कामकाजी आदमी.

6 comments:

  1. एक जमात से बाहर कर दिये जाने पर उस जमात से सम्बंधी लेख पर प्रतिक्रिया दर्ज नहीं करता कामकाजी आदमी.. प्रगतिशील कामकाजी लेखों पर ही टिप्पणी कर के संतुष्ट रहता है कामकाजी आदमी..

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  2. इतनाआआअ काम करता है कामकाजी आदमी ?

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  3. इतना सब करके कितना थक जाता होता कामकाजी आदमी .

    कहता होगा बेटे से कि कठिन परिश्रम का कोई विकल्प नहीं है . देता होगा खुद का उदाहरण कि कैसे ऑफ़िस में वह १०.०० से ५.०० तक लगातार खटता है कर्तव्यपरायणता के चलते जबकि दूसरे मज़े करते हैं .

    पत्नी डांटती होगी बच्चों को कि अभी पापा को तंग मत करो ऑफ़िस से बहुत थक कर आते हैं वे. तुम लोगों को क्या पता कि कितना काम होता है उन्हें ऑफ़िस में .

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  4. बहुत सही चित्र खींचा है ।कटाक्ष से कम नही है।

    आगे की कहानी प्रियंकर ने पूरी कर दी।

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  5. बड़ा नीरस जीव है....कामकाजी आदमी...आसपास के सभी कामकाजी आदमी याद आ गये...आपकी लेखनी की वजह से।

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  6. आम आदमी के मन ही मन हंसने की बात अच्छी कही।

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