Sunday, May 20, 2007

शहर में लड़कियां



[1]
सड़क पार करती टॉप्‍स और ट्राउज़र्स में लड़की वही नहीं है जो ऊपर से दीख रही है. अजी, लैस है भारी जिरह बख्‍तर में. मौका बनते ही देखिए, बजती है बिजली के माफ़ि‍क. बम-गोला की तरह छूटती है, बन्‍दूक की गोली-सी दग़ती है कैसे दन्‍न-से.

[2]
यह जो मेज़ पर फ़ाइलों में झुकी व्‍यस्‍त है, करती है पिछले सात वर्षों से. और वह जो आई है अभी-अभी पीछे पति के, काम का हसरत लिए. देखती हैं एक-दूसरे में अपनी खोई-पाई छवियां.

[3]
नया-नया ख़ून का स्‍वाद चढ़ा है नसों में. रेणु, रंजु, रोमा, रुख्‍साना अम्‍मी जी को धता बता रही हैं. पापा जी का माथा घूम रहा है. लड़कियां अजनबी संगतों में रोज़ शहर जा रही हैं.

[4]
दल बांधकर निकली हैं लड़कियां. चकमक, चकाचक. एक ज़ोर का चीखती है, दूसरी ठठाकर हंसती है. पुलिस का ठुल्‍ला ठिठककर ताकता है. ठेलेवाला भी हैरान है. एक साहब लड़ते-लड़ाते बचे अपनी फटफटिया. अरे, ये क्‍या गजब करने निकली है लड़कियां. होश में हैं सबको बेहोश कर रही हैं लड़कियां.

9 comments:

  1. अहहा... वाह वाह... अति सुंदर... लेकिन हिंदी कविताओं में ये चित्र ऐसे ही कई बार आते रहे हैं... इसमें कुछ भी नया नहीं है... अहहा... वाह वाह... अति सुंदर...

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  2. प्रमोद जी, सटीक विवेचना की है। नारी स्वतंत्रता का अर्थ मात्र अपने अधिकारों की रक्षा होना चाहिए ना कि ......

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  3. अविनाश जी,
    आपकी समझ व दायित्‍वबोध की मार्मिकता के नीचे ढेर सारे लोग अभी भी अपने चिथड़े सहेज रहे हैं.. अति सुंदर और अनोखेपन का कीर्तिमान रचने के लिए मैं लिखाई नहीं कर रहा.. भाषा व विचार व्‍यवस्थित करने की कोशिश कर रहा हूं.. हमारे लिखे से आपकी भावना को ठेस लगती है तो आप बेशक अपने दायित्‍वों का कैलेंडर छापते रहें, मगर अपने व्‍यंग्‍य-विद्रूप से हमें बख्‍शें. वह वैसे ही हमारे पास पर्याप्‍त मात्रा में है, आपसे उधार की ज़रूरत नहीं..

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  4. प्रमोदजी, आपका चौथा चित्र अपने में मुकम्मल कोलाज है! :)

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  5. गजब है. कविता हर चार शब्द के बाद अगली पंक्ति में चली जाए ऐसा किसने सिखाया मामूल नहीं, हमें तो यही वाला अच्छा लग रहा है. नंबर दो मुझे सबसे ज्यादा पसंद आई. साधुवाद
    अनामदास

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  6. शहर में लड़कियों की ज़िंदगी के कोण देखने की सफ़ल कोशिश

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  7. सुंदर प्रयास है.

    और हां...
    मैंने पहले भी एक जगह कहा था कि टिप्‍पणी विचार पर होनी चाहिए. रचना या व्‍यक्ति पर नहीं.

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  8. और लड़्के? वो क्या घर पर बैठेंगे? स्वेटर बुनेंगे?

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  9. हम तो कहना चाहते थे "अति सुन्दर" लेकिन आप उस लिये तो लिख ही नहीं रहे ..तो कहेंगे..अच्छी लगे आपके शब्द चित्र...

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