Wednesday, May 23, 2007

लड़की और लड़के की बातचीत

देर तक चुप रहने के बाद लड़की ने कहा मैं तुम्‍हें जानती नहीं. उस कहने में सब जान चुकने का दंभ और न जान सकने की झुंझलाहट छिपी थी. धूप और दिन की थकान में पिघलती ठहरकर पूछा लड़की ने आख़ि‍र तुम चाहते क्‍या हो. अकबकाये लड़के ने जहालतभरा जवाब दिया कोई, फिर हो गया गुमसुम. इस दरमियान पूछता रहा खुद से वह चाहता क्‍या है कितना जानता है. लड़की का हाथ पकड़कर किसी सस्‍ते-से बाग़ की छांह में टहलना चाहता है. या सड़क के उस पार खड़े होकर साथ-साथ देखना चाहता है साथ-साथ देखते हुए कैसा दिखता है शहर. ढलती दोपहर गोद में डाब लिए लड़की के कंधे पर सिर टिकाकर उसकी फुसफुसाती शिकायतें सुनना चाहता है. पूछना चाहता है इस रंग से क्‍यों रंगती है नाखून या उसके बालों व कंधे के बीच उठती महक का नाम क्‍या है. चुपचाप मुंह पर हाथ धरे सोते में उसकी सांसें सुनना चाहता है. या फ़ोन पर बात खत्‍म करके मुस्‍कराती पलटकर कैसे आती है लड़की उसकी तरफ देखना चाहता है. रूमाल से माथे का पसीना पोंछती लड़की भन्‍नाकर कहती है यही दिक्‍कत है तुम्‍हारे साथ, किसी बात का सीधा जवाब नहीं देते. नौकरी के इतने झंझट हैं, सांस लेना मुश्किल है और मैं तुम्‍हारे पीछे दिन खराब कर रही हूं. वैसे तुम अच्‍छे हो नेक़ हो भले हो, कल हाथ में सेब लिए आए थे कितना अच्‍छा लगा था मगर रोज़ इस तरह दिक करके हमें कहां ले जाओगे, खुद कहां जाओगे सोचा है. यह रोज़-रोज़ सेब नहीं खाती अच्‍छा होता. उस दिन तुम पास नहीं आते मैं किसी और रास्‍ते शहर चली जाती अच्‍छा होता.

2 comments:

  1. ये समीकरण उलट भी तो हो सकता था। जो लड़की कह रही है, चह लड़का कहता और जो लड़का कह रहा है, वह लड़की।

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  2. काफ़ी सामान्य से संवाद में आपने काफ़ी कुछ कह दिया.. आज की भाग -दौड़ वाली जिंदगी में जब.. हम सब अपने कैरियर बनाने और जिम्मेदारियां निभाने में लगे हैं.. किसे फ़ुर्सत है प्यार के बारे में सोचने और उसे मह्सूस करने की..कि कैसा लगता है हाथ में हाथ लेना.. गोद में सोना.. शाम का सूरज एक साथ देखना..प्यार भी practical हो गय है.. सोच समझ्कर .. भविष्य देख कर किया जाता है..

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