Monday, June 18, 2007

आओ आओ लात लगाएं..



आओ आओ घात लगाएं
घेर घेर के लात लगाएं

किसने कहा हम चिरकुट हैं
कहवैये की तो बाट लगाएं

मुक्‍ता सरिता के बड़ पहुंचे ज्ञानी
हमसे न टकराना ओ अभिमानी

न हमसे दुष्‍ट तुम खेल करो
सपनों में हमारे न ठेल करो

हुर्र हुर्र चंद्रलोक तक जाना है
हुर्र हुर्र मंदिर वहीं बनाना है

बेबात बात बहुत कर ली
दिन में रात बहुत कर ली

अब तो पटरी पर आना है
जो न आएं उन्‍हें लतियाना है

टिल्‍लू हिल्‍लू मत घबराना
तेरे पीछे सारा चिठघराना

अरे आओ आओ न घात लगाएं
घेर घेर के हुर्र हुर्र लात लगाएं

12 comments:

  1. इस वक्त रात के दो बज रहे हैं और आप किसे हांक लगाने में लगे हैं। हालांकि नारदमुनि की कृपा आप पर बनी हुई, आपको ऑक्सीजन मिल रहा है। मुझसे तो कुपित थे ही, अभय भाई की भी लगता है पाइप हटा ली। विदा करते वक्त औपचारिकतावश भी सलाम दुआ नहीं की। खैर, इसका अफसोस क्यों।
    अब तो पटरी पर आना है
    जो न आएं उन्‍हें लतियाना है

    टिल्‍लू हिल्‍लू मत घबराना
    तेरे पीछे सारा चिठघराना
    अच्छा हुआ जो याद दिला दिया ताकि सुबह उठूँ तो याद रहे। क्या कहें, शुभ रात्रि या शुभ प्रभात।

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  2. एईटा ' शैशव कू देले केड़े भल हेई थान्ता ।

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  3. @नासिर मियां,
    ये क्‍या बात हुई? हमारी निर्दोष रचना में आप यथार्थवाद पेल रहे हो.. हम कहीं और खड़े हैं आप कहीं और ढकेल रहे हो? गलत बात है. अच्‍छे बच्‍चे ऐसा नहीं करते!.. वैसे निर्मलानंद के कान में मैंने एक मंत्र पढ़ा था, आइए, कान इधर कीजिए, आपके कान में भी फूंकता हूं-

    नासिर नासिर न घबराना
    नारद ही है नहीं ज़माना

    कैसा है?.. अब चुप्‍पे से जाके गोमती में नहा आइए और हमारी नई गंधाती पवित्र रचना की राह तकिए!

    @अफ़लातून भाई,
    अज़दक कू लात लगाई, शैशव पाईं एई रकम स्‍वार्थ कण भअल कथा कि?.. चेति जान्‍तु, न हेले लाअत पाइबे!

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  4. लात लगाने के चक्कर में कहीं बांस न हो जाय।
    शिकारी खुद कहीं शिकार न हो जाय।।

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  5. अनुनाद बच्‍चा, सचमुच मुक्‍ता-सरिता टाइपे पाठक हो, बूझाता है? स्‍कूल-उस्‍कूल गए नहीं का? कि इंटर में जाके गुड़ि‍या गए? ऐसे सरल पाठ में भी गोड़ को गुड़ और भात को लात समझ रहे हो! जादा लड़ि‍याओ नहीं, लालमोहन.. मम्‍मीजी आके एगो लप्‍पड़ लगाएंगी, रोने लगोगे.. फिर कहोगे हमने कहा नहीं था?

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  6. प्रमोद भैया!
    कल परसो आप "सहनशीलता" पर उपदेश दे रहे थे। उसी का टेस्ट करना चाहता था। आपका दोगलापन पकड़ा गया। क्या शहनशीलता का उपदेश केवल दूसरों के लिये था?

    पढ़ाई-लिखाई की बात मत कीजिये, काहे कि रोड छाप पत्रकार बनने के लिये कितनी पढ़ाई और बुद्धि की जरूरत होती है, आप खुद जानते हैं।

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  7. भैया प्रमोद जी, उ का है ना कि आपके लिखे में दिखते अर्थ के पार जाकर भी अर्थ तलाशने की हम सब की आदत हो चुकी है न।
    अउर कौनो बात नाहीं है, बाकी सब ठीक है!

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  8. प्रमोद जी, गोमती तो नहाने लायक नहीं रही पर आपकी रचना का रसपान जरूर कर रहे हैं।
    एक बात भैया अनुनाद जी से कह रहे हैं, इजाजत है।
    एक बात कहें
    भैया अनुनाद बन जाइये न पत्रकार। आप दूसरों की सहनशीलता आजमा रहे हो... और अपनी सहनशीलता और सहिष्णुता दोनों दिखा दी। वो शब्द हम नहीं इस्तेमाल करेंगे, जो आपने अपना परिचय देते हुए प्रमोद जी को कहा है।
    अरे ये लोग संस्कारहीन हैं आप काहे संस्कारहीन बन रहे हैं। ऐसे ही लिखते रहें, कम से रोड छाप पत्रकार तो नहीं ही बनेंगे। आपकी पढाई के बारे में तो मैं जानता नहीं, हां बुद्धि जरूर दिख गयी। क्या अद्भुत लिखा है आपने। क्या व्यंग्य है, क्या लक्ष्य भेदा है... अद्भुत। सच बात तो बुरी लगती है... है न।

    लात लगाने के चक्कर में कहीं बांस न हो जाय।
    शिकारी खुद कहीं शिकार न हो जाय।।

    अपनी कुछ और ऐसी रचनाओं से अवगत करायेंगे, उम्मीद है।

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  9. आओ आओ लात लगाएं ।
    बातों से ही बात लगाएं ।।
    एक एक को छह सात लगाएं
    बातों से ही लात लगाएं ।।
    जब लात से लात जुड़ जाएगी
    दुनिया थोड़ी निपुर जाएगी
    लात खाकर सुधर जाएगी
    जाएगी मगर किधर जाएगी ।।

    आओ अज़दक गुरू लात लगाएं बातों से ही लात लगाएं । मुंबई से एक लात भेजो
    बहुत पते की बात भेजो

    लात ने सुधारा है सबको
    इसको उसको हम सबको
    लात पड़ेगी हिल जाएंगे
    फिर दिल से दिल मिल जायेंगे

    साथी तुम एक लात भेजो गुरूजी तुम एक लात भेजो
    ये सब भेजें वो सब भेजें
    लातों पर फिर लात भेजें
    आओ गुरूवार लात लगाएं
    बातों से ही लात लगाएं

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  10. नासिर मियां,
    काहे क्रोध करते हैं? मै तो ई आजमा रहा था कि मैं पतनशील साहित्य रच सकता हूँ या नहीं? आपको गुस्सा आया, यह प्रमाण है कि मुझमे भी इसकी योग्यता है।

    एक और बात। जरा इस बात का ध्यान रखिये कि आप 'अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता' के हिमायती लोग हैं। गाली-गलौज को समाजिक और शिक्षाषाशास्त्रीय विधा मानने वाले लोग हैं। और तो और, आप तो आतंकवादियों को प्यार करते हैं। तो इस तुच्छ प्राणी से ...

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  11. mazaa aa gayaa. hum is kavitaa ki kalpanaa ke qaayal ho gaye hain.

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