Saturday, June 30, 2007

बंबई में बारिश..

चीत्‍कार भरती तीन दिनों से अनवरत हो रही मुसलाधार नहीं थी, कुछेक घंटों के झमाझम का मामला था, फिर अटक-अटक कर चलती झड़ी थी, लेकिन महानगर लाचार होकर टूटने लगा था जगह-जगह डूबने लगा था. सत्‍तर हज़ार करोड़ का डायरेक्‍ट टैक्‍स भरने वाले शहर को शहर चलानेवाले बेचकर खा गए थे. कोई पूछनेवाला नहीं था. जो बतानेवाले थे वे एक अदद तेलगी की गिरफ़्तारी पर ताली बजाकर विजयगान गा रहे थे.

पानी के गिर्द बसे सात टापुओं वाले शहर में अब नदियां कहां थीं, कॉरपोरेट प्रॉपर्टी व हाउसिंग थी. पानी की निकासी नहीं थी. वर्ष भर चलनेवाली सड़कों की मरम्‍मत का काम था जो एक तेज़ बौछार पर गड्ढों में बदलकर फिर वही कहानी कहने लगता. भ्रष्‍टाचार की अंतहीन बदज़ुबानी बनकर बहने लगता. कुछेक घंटे नहीं ग़र कुछेक दिन चली बारिश तब बंद नदियों का जल कहां टूटेगा. घरों में पानी घुसेगा फिर लोग कहां घुसेंगे?

ज्‍यादा वर्ष नहीं हुए शहर के कर्णधार इसे शंघाई बना रहे थे. गड्ढों के मुहानों पर खड़े इंद्रधनुष की झांकियां सजा रहे थे. इंद्रधनुष का पोस्‍टर अभी भी जीवित है, जैसे हम जीवित हैं, और गरजन और बरसन ने जिसके चिथड़े किए हैं खींचकर पानी में बहा नहीं दिया है.

अभी तो अंगड़ाई है आगे जाने कितनी बरसाती लड़ाई है. कितना जाएगा क्‍या रहेगा और क्‍या-क्‍या बिलायेगा. शायद बड़ी मुश्किलों में ही यह ब्‍लॉग अपने को बचा पाएगा.

4 comments:

  1. भाई अब आप जरा सा भी एडजेस्ट नही कर सकते ,
    कल तक शिकायत थी पानी नही है.अब दिया तो ज्यादा हो गया,अब इतना नाप तौल संभव नही है फ़ौरन एस साल के कोटे का स्नान कर डालिये.:)

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  2. मुंबई की फिल्म नगरी ने बारिश को रोमांटिक बनाया। फिल्में देखने के बाद लोग वैसे ही भींगने लगे जैसे राजकपूर नर्गिस भींगा किये थे। मुंबई की बारिश का भरोसा नहीं। मुहावरा बना। मगर मुहावरा बदल रहा है। मुंबई की बारिश का भरोसा है। नाली के पानी का भरोसा है। जल जमाव का भरोसा है। बीएमसी की नाकामी का भरोसा है। शहर यूं ही मरते रहेंगे। पर जीवन चलता रहेगा। इसका भी भरोसा है।

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  3. अरुण प्‍यारे,
    अख़बार के मुताबिक राज्‍य में सोलह लोगों के मरने व डेढ़ हज़ार लोगों के बेघर होने की ख़बर है. बहुत हंसी का विषय नहीं है..

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  4. अफ़सोस!!

    भैय्या, इहां छत्तीसगढ़ मे भी यही हाल रहा! अनवरत 16 घंटे की बारिश ने पिछले सौ साल के रिकार्ड तोड़ दिए!!
    राजधानी रायपुर का भी वही हाल हुआ जो आप मुंबई का हुआ!! नेता इसे महानगर बनाने के सपने दिखाते जाते हैं और यह शहर है कि हर बारिश मे गड्ढे में ही पहुंच जाता है!!

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