Monday, June 4, 2007

आगि लगे ई फुरफुरिया टाइम को!..

प्रेम परकास प्रेयसी बेबी कुमारी राय का सखी सकीना को पत्र..

हे सखी, सदा सोहागिन रहो, अउर संगै-संगै अपने खोदा से हमरे बास्‍ते भी परार्थना करो कि तुमरे खोदा हमरा सोहाग भी सुरच्छित रक्‍खें! अपना ईस्‍वर से त हम परार्थना-बंदगी कैये रहे हैं.. अलग से ओकरा बास्‍ते एग्‍गो बरतो धरे हैं (एतना बरत कै लिये हैं कि देह में कमजोरी का परमामेंट निबास हो गया है, रे सकीनिया, सच्‍चो में!)..

हे रामा, मैया गे, मैया! केतना रोलाई छूट रहा है.. जहां-जहां लेटरिन लुका गया है.. समझ लेना हमरा नन-इस्‍टाप लोर का धार में लेटरिन सब बह गया है.. मैया गे, कइसा-कइसा त करेजा में दरद अउर जाने कौ-कौ ची उठ रहा है.. जब ले पेपर में खबर छपे का खबर सुने हैं, मुंह में अन्‍न गया है ना एक्‍को गो इमली का काटा काटे हैं.. खाली एही बात का चिंता में दुब्‍बर हो रहे हैं कि पराननाथ का कानी तक खब्‍बर चल गया त हम करेंगे का? भूमि में लुका जाएंगे कि परभु जी से बिनती करेंगे कि हे परभु, हमको अपना असमान में बुला लीजिए!

सकीनिया रे, अइसे दांत चियार के हमरा जी में आगी मत बार, सखी.. मामला का टरनिन बड़ डेंजर हो गया है, अउर तुम अबहिं ले सब लाल-बुझव्‍वल बूझ रही हो? तुमरे नूर मोहम्‍मत अउर हमरे पराननाथ में जमीन-असमानी का फरक है! ऊ मन का अंदर जेतना नरम-गुलगुल्‍ला हैं, बिस्‍सासघाती का संग वइसे ही जब्‍बर जल्‍लादो हैं! हमरा घर अउर हमरे सोहाग का मन्निर फोड़े वाला कवनो पाल्‍टी अगर कवनो चाल भेड़ा के उनको पेपर वाला कटिन देखा दिया त सोचो, सखी, कहंवा-कहंवा बज्‍जरपात का बिगनिन होवे लगेगा!.. अरे, तुमको लगता है हम झुठले ठट्ठा कै रहे हैं! हमरा सोहाग का मन्निर सन्‍कट में है अउर, चोट्टी, तुमको लगता है, हम हंसी-दिल्‍लगी करेंगे? कइसा सखी हो, सकीना, भइस्‍य का चिंता में हिंया हमरा छाती फट रहा है अउर तुम कहती हो कि अखबार-पेपर का लेखाई का आजकल कवनो भरोसा नै है?.. कवनो को होगा चाहे नै.. हमरे इनको अखबारे का भरोसा है! हमरा झोंटा पकिड़ के केवाड़ी में लड़ा देंगे अउर सवाल करेंगे कि तोहरा बात का येकीन कै लैं अउर पेपर का खबर को झुट्ठल मान लें?..

मैया गे, मैया.. हम का करें, कवन रस्‍ता खोजें, अकले नै चल रहा है, सकीना! सुबहे ले रोय-रोय के दूनो आंखि बाहिर आय गया है(अईनो देखे में अब डर बुझाता है).. जाने कवन जलम का बदला चुकाये है ई फुरफुरिया टाइम का मुंहजार.. आगि लगे सैतान का घर में, अंग-अंग में पिल्‍लू अउर केंचुल रेंगे! का बेगाड़े थे, सखी सकीना, जब गवना होइबो नै किया था तब परेम परकास का संग दुई दफे पीर मोहम्‍मत वाला मेला देखन गए थे! घोड़ा वाला झूला में साथ चढ़े थे अउर तिरपाली का अंधार में तीन गो फोटो खिंचवाये थे.. कान पकड़ के तोसे काली मइया का किरिया खाते हैं हम कवनो गलत-सलत काम-बासना नै किये थे.. मगर ई फुरफुरिया टाइम का मुंहजार हमरा अउर परेमजी परकास दूनो का हाथ में हाथवाला सब फोटू-सोटू पेपर में छापि दिया है.. बटेसर अउर लंहगू टमटमवाला बोल रहे थे.. पराननाथ का आंखि का आगे पेपर चल गया त हम जीते-जी जर जायेंगे, सखी!..

तुमको कवनो रस्‍ता निकाल के ई अनरथ होने से रोकना है, सकीना.. कवनो सूरत में हमरे सोहागि का मन्निर का आज सुरच्‍छा करना है!.. सखी धरम का निरबाह कै के आज हमरा रच्‍छा कै लो, सखी!

तुमरे जलम-जलम की सहेली,
बेबी कुमारी राय

6 comments:

  1. अनूप जी जवाब दें..बेबी कुमार राय के पवित्तर पिरेम को सरकायलो खटिया के स्तर पर घसीटने की आपकी तथाकथित मासूम चुटकी ने देखिये यहाँ क्या कहर ढा रखा है..
    आप अखबार वाले लोगों के चरित्तर के बारे में फ़ैसला सुनाने की एतनी जल्दी में काहे रहते हैं.. कि रिपोर्टर का पैजामा के साथ साथ वकील का चोगा जज का सुफेद झोंटा सबै एकै साथ डाँट लेते हैं..? हैं..? अरे जल्लाद का रस्सी भी लिए हैं का? तो दे दीजिये.. बेबी देखिये खोज रही है कुछ लटकने के लिये?.. आपे का काम आसान होगा.. दुनिया से एक तो कोई कम होगा आपकी गाली खाने के लिए..

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  2. काहे सुबह सुबह जलम जलम की बेबी को इतनी चिंता में डालते हो जी.. बोल दो बेबी को ..कुच्छ नहीं होगा जी..चिंता ना करे उ .. हम हैं ना जी..हम रामजीत से बात करेंगे .. हम को ना बुझात है का .कि इ में बेबी जी की गल्ती नहीं है...आप भी बात करते हैं...

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  3. वाह, वाह! बहुत बढ़िया लिखी बेबी की बातें। बेबी से कहिये चिंता न करे उसके पास जो अखबार है उसके सिवाय सारी फ़ुरफ़ुरिया टाइम्स बाजार से वापस मंगा के जला दी गयी। उनके प्राननाथ अब न देख पायेंगे।

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  4. बेबी राय,
    अब रहने भी दो.. हर चीज़ एक सलीके से की जाती है.. और तुमने तो जो है सलीका लगता है मलीहाबाबा वाले घाट पर सनलाइट साबून से धो के बहा दिया है.. ऐसा हल्‍ला खड़ा कर दिया कि जो नहीं जानते होंगे अब वो भी प्रेमप्रकाश को जान जाएंगे!..
    खामखा तुम्‍हारी वजह से, देखो, निर्मलानंद फिर तैश में आ रहे हैं.. अविनाश ने यहां तक सोचना शुरू कर दिया है कि तुम सकीना की सहेली हो इसीलिए तुम्‍हारे भेद पर से ऐसी क्रूरता से परदा खींचा गया है!..
    ख़ैर, इससे इतना तो हो गया कि अनूप शुक्‍ला बड़ौदा आर्ट कॉलेज के डीन शिवाजी पनिक्‍कर की तरह छिपे फिर रहे हैं.. उनके पास दस-बारह गुमनाम कमेंट भेज दिया गया है कि 'चलित्‍तर टाइम्‍स' के ताज़ा अंक में उनके वे सारे फ़ोन कॉल्‍स की रेकार्डिंग पॉडकास्‍ट की जा रही है जिसमें बिल्‍ली-चिरगिल्‍ली सब कवियत्रीयों की चिरकुट कविताओं पर आह-ऊह करते वे थक नहीं रहे हैं.. इतने पर भी वे पटाये नहीं तो उनके भी दबे-गड़े फोटुओं को निकालने का इंतज़ाम किया जाएगा..
    तुम चिंता मत करो, मस्‍त होकर अपने बरत-सरत करो!

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  5. इसका हिंदी अनुवाद करके बतायें।

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  6. ई बेबिया भी बेसी फ़िकिर कर लेता है .

    ठीक है हुआ सो हुआ . हम देखेंगे . हम समझेंगे . बकिया अउरे लोगन के बाप का का जाता है . ऊ का हमरे घर बेझर का बुरिया गेरकर जाते हैं . अरे तकलीफ़ हमरा अउर हमरा बेबिया का है तो हम समझेंगे . झोटा खींचेंगे, दो चैला मारेंगे ,ओकर बाद साथ रहेंगे . सात ठो बच्चा पइदा करेंगे . तुमरे पेट में काहे मरोड़ उठता है ?

    आप सब ई देस का बहुतै सम्मानित पतरकार बुझारती लोग हंय . काल ऊ बड़े बाल वाला कविजीनुमा हिंदी का पतरका पिरोफ़ेसर आप लोगन्की लिखाई देखकर आंय-बांय बोलता था : बेईमान,हरामी का पिल्ला,सुअर अउर न जाने का का, पर हमको ऊका भाखा ठीक नाहीं लगा . काहे कि हम जानते-समझते हैं आप केतना मिहनत करते हैं ऊ राखी-मल्लिका-सिल्पा का खबर गांव-गली तक पहुंचाने वास्ते .सादी-ऊदी में बिना बुलाए जमे रहते हैं . अरे हमरे ही वास्ते .

    किन्तु जलम-जलम की दुखनी हमरी बेबिया को बख्सा जाए . आप लोगन से हाथ जोड़ कर बिन्ती करते हैं कि ओकर चलित्तर पर कीच-कादा न छींटा जाए .

    कारन कि ऊ न तो राखी-मल्लिका की तरहां कच्छा पाल्टी का मिम्बर है अउर ऊ कभिये कबिता-बबिता भी नाहीं लिखा सो ऊ बिल्ली-चिरगिल्ली कबि-जनाना टाइप भी नाहीं है जौने से पिरमोद बाबू हलकान हुए जाते हैं .

    सकीना हमको सब बात बहुतै सकुच के साथ बताया था . ऊ बेबिया का बहु्तै जिगरी सहेली है .ओकर करेजवा का कोर है बेबिया. बोलत रहा बहुतै कुम्हलाय गवा है बेबिया . खाना-पानी छोड़ दिया है . हम भी बोल दिये कि हम ओहका मन को समझते हैं . कौनो फ़िकिर नाहीं . निस्फ़िकर जाओ! हम बेबिया को माफ़ कर दिए हैं .

    सो भद्र लोग-जन!
    तमासा का कौनो गुंजैस नाहीं है . अपना-अपना गाड़ी चांपिये अउर आपन बाड़ी जाइए . अपना जनाना से पिरेम-पिरीत से रहिए . जिनगानी बहुतै छोटी है . पानी केरा बुदबुदा . काहे टैम भेस्ट करते हैं .

    -- बेबिया का पराननाथ

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