Monday, August 6, 2007

न्‍याय के लिए कौन आंसू बहायेगा?..

इसके पहले कि आईएसआई को मेमन परिवार के भारत भागने व आत्‍मसमपर्ण के अंदेशों की भनक लगती, (याकूब की काठमांडू में गिरफ़्तारी के बाद) सीबीआई ने तीन हफ़्ते चले एक होशियार ऑपरेशन में मेमन परिवार को दुबई में लोकेट किया, आईएसआई से उन्‍हें छिपाये रखने में कामयाब रही, और अंतत: दो किस्‍तों में उन्‍हें दिल्‍ली लाने में सफल हुई. पहली बार में याकूब के पिता, मां, तीन भाई, एक भाभी और दो बच्‍चे लौटे, और फिर उसकी बीवी और नवजात बेटी..

सिर्फ़ टाइगर व अयूब कराची में बने रहे..

इसके बाद सीबीआई ने मेमन परिवार की अविश्‍वसनीय कहानी सुनी. कैसे परिवार का दुबई आना-जाना लगा रहता था. उनमें से कुछ, जैसे रुबिना और अयूब वहां स्‍थायी निवासी हो गए थे. मार्च, 1993 में अयूब ने जोर दिया कि परिवार के सब लोग ईद मनाने के लिए दुबई में इकट्ठा हों, तो कुछ ऐसी ही पृष्‍ठभूमि में, बमकांड के ठीक पहले, परिवार मुंबई से दुबई के लिए निकला था.

बमकांड के बाद टाइगर जब भगौड़ा हो गया, तब धीरे-धीरे उनके भेजे में बात धंसनी शुरू हुईं कि कि मुंबई में उड़ रही ख़बरों में कितनी सच्‍चाई है- कि इस बलवे के पीछे मेमन परिवार का एक लड़का शामिल है. महज़ एक हफ़्ते के भीतर, जब टाइगर बिना विज़ा के उन्‍हें भगाकर कराची ले गया, तब उनके लिए यह बात भी खुली कि इस हादसे से पाकिस्‍तान के संबंध भी हैं. यह पता चलने पर पिता अब्‍दुल रज़्ज़ाक इस कदर गुस्‍सा हुए कि परिवार के कराची पहुंचते ही सबकी नज़रों के आगे उन्‍होंने टाइगर को पीटना शुरू कर दिया. मजबूत देह व नाक पे गुस्‍सा धरे रहनेवाले टाइगर ने चुपचाप बाप की मार सही, जैसे बाद में परिवार के भारत लौटने का फ़ैसला मंजूर किया था.

याकूब की ज़ि‍द पर (अयूब और टाइगर के सिवा) परिवार के सारे लोग भारत लौटे. क्‍योंकि परिवार अपने पर लगे ‘आतंकवादी’, ‘देशद्रोही’ के धब्‍बे को धोना चाहता था, और याकूब समेत बाकी के परिवार को भारतीय न्‍याय व्यवस्‍था में भरोसा था, उम्‍मीद थी. मगर अदालती नतीजों ने यही दिखाया है कि वे अपने भरोसे के हर बिंदु पर गलत साबित हुए..

Rubina got rigorous life imprisonment only because s Maruti van used by Tiger’s men was registered in her name. But she was not even living in Mumbai at the time of the bombings—she had shifted to Dubai six months earlier. Essa, who was hospitalised with a brain tumor and suffers from morbid obesity, and Yousuf, diagnosed as a schizophrenic, also got life only because the flats and garage where the bomb conspiracy was hatched by Tiger and his men were registered in their names. There is nothing otherwise to link them to the conspiracy. (And, off course) Yakub has been condemned to death.

Our leaders have often said that not a single Indian Muslim joined al-Qaeda in the past because India is a democracy. An open and fair society with a robust judicial system, they said, does not produce jihadis. So it’s all more ironic that India’s most notorious Muslim family which voluntarily returned to the country to face trial because of its faith in the system today feels that it made a big mistake.

कल के संडे एक्‍सप्रैस में छपी मसीह रहमान की पूरी रपट यहां पढ़ें.

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5 comments:

  1. अब्दुल रज़्ज़ाक का क्या हुआ?

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  2. आलोक भाई,
    मेमन परिवार की दुर्दशाओं का ताज़ा हाल समझने के लिए कृपया एक नज़र इस लेख पर डालें.

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  3. प्रमोद जी, दो बातें सामने आती हैं।

    एक तो यह कि पारम्परिक रूप से "साँप के सँपोले भी मार देने चाहिए" वाली भावना के तहत काम हुआ है। राजीव गाँधी हत्याकाण्ड में भी एक अभियुक्ता जो गर्भवती थी, उसके साथ क्या हुआ मुझे ध्यान नहीं आ रहा है।

    दूसरी यह कि यह सब बातें उस समय सामने क्यों नहीं आईं जब तक फैसला सुनाया नहीं गया था?

    वैसे यदि अब्दुल रज़्ज़ाक वाकई ऐसे थे जैसा लिखा गया है तो वह एक आदर्श पिता और परिवार के आदर्श मुखिया हैं। याद रखूँगा।

    समस्या की जड़ तो यह है कि आपका नाम, दुबई और कराची - ये तीनो चीज़ें भारतीयों को वैसे ही पूर्वाग्रहग्रस्त कर देती हैं। इसके अलावा मुखबिर के साथ रियायत बरतने का काम नहीं हुआ। इससे और लोग यही करने को हतोत्साहित होंगे।

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  4. प्रमोद जी, दिल से शुक्रिया इस बारे मे जानकारी देने और लिंक उपलब्ध कराने के लिए!!

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  5. इस आलेख और लिंक्स के लिये आभार.

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