Friday, August 10, 2007

एक मामूली कविता की किताब..

एक कविता खुशी की हो, धुली लहरीली साइकिल पर चढ़कर आए, जंगले के लोहे में धंसे बच्‍चे का चेहरा मुस्‍कराहट में भर जाए.

खुरपी, मटकी, संड़सी, असबेस्‍टस, बेलचा, हेलमेट, बाजा, बंसखट पर हो एक कविता.

एक गोंइठा, देगची, परात, अदहन, राख में पकते आलू और भंटा की हो.

खपड़े पर पड़पड़ाती बारिश और सीली चदरी में मुंह लुकाये की हो गीली एक कविता.

एक कविता खाना ठेलकर दूर कर देने, उबले व उबलते रहने, मां से जिरह की लम्‍बी दोपहर में बार-बार टूटने और मुड़ने की हो.

सफ़र की हो तीन कविताएं, ग़ुमनाम शाम की फीक़ी पीली रोशनी में टकराते फतिंगों की बेमतलब बेचैनी और व्‍यर्थता में बीतते जीवन की अकुलाहट की एक कविता हो.

एक मुंहअंधेरे आसमान की हल्‍के, फाहे की-सी नीलाई में नहाये सड़क पर भागने की, थकने की हो.

एक असंभव सपने की हो, किसी गांव-सड़क के पेपरवाले की दुकान पर चौंककर ठहर जाने, ‘दिनमान’ उठा लेने, पढ़ने, जगने और जगे रहने की हो.

जंगल में उतरने, खोने के संगीत की, और जंगली रात से निकल आने की हो एक कविता.

एक सागर की गहराई की, एक पेड़ की ऊंचाई की हो.

एक कविता सुख की हो, भागकर गाड़ी पर चढ़ लेने, रतजगे, मुंह को किताब के हल्‍के आंचल से तोपे हंसने और हंस-हंसकर नशे में बहने की हो.

निर्दोष नवजात बच्‍चे की हो, करुणा की हो एक कविता.

हाथी से गिरकर चोट खाने और घर जलाने की, प्‍यार की हो एक कविता.

हिन्‍दी की हो, एक कविता दु:ख की हो.

13 comments:

  1. ये सब कवितायें लिखेंगे क्या?

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  2. गोंइठा--बहुत समय बाद कान में अमृत रस बरसा, आह्ह निकल गई. अब कोई सी भी कविता लिख ही डालें. इन्तजार रहेगा, जब तक डूबे हैं तभी तक संभव है. बाद में सिर्फ टपेंगे. :)

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  3. bahut badhiya :) , kabhi DILLI aayeeye to batayeeyega !

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  4. आज दुःख की एक कविता डाली है . कितना और कैसा दुख है देखिएगा .

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  5. कविता के लिए एक शानदार एजेंडा है। इसपर काम करने की कोशिश पूरी ईमानदारी से की जाएगी।

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  6. एक कविता 'आजादी के साठ वर्ष : क्‍या खोया, क्‍या पाया' पर हो
    एक कविता हो, 'देश कितनी प्रगति कर रहा है'
    एक कविता हो, 'आसमान की ओर, हिंदुस्‍तान के बढ़ते कदम'
    एक कविता हो 'मैं..मैं..मैं..मुझसे बढ़कर कौन'
    एक कविता फ्रेंडशिप डे पर हो, आरचीज से बढ़कर कौन आपकी दोस्‍ती को एक्‍सप्रेस कर सकता है
    फिर एक कविता, 'आजाद होती औरतों' के ऊपर हो - 'उन्‍नति के शिखर पर महिलाएं'

    इन ढेर सारी कविताओं के नीचे कुछ कविताओं को छिपा देना होगा

    - मनीषा पांडेय

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  7. Pramod Singh Ji........Aap se ek shikayat hai...........Kisse Ramjeet ke Band kyun kar dii???

    KOHINOOR chhipaa diya aapane???
    Kyaa kisi 1 ki aalochana ne kahaniyon ki 1 poori duniya ko tabah kar diya?
    Jusst think about it......I am waiting................

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  8. वाह!

    ऐसी हो कविता...
    कैसी हो कविता, किसपर हो कविता... इस पर इतनी सुन्दर कविता!
    वाह!

    हिन्‍दी की हो, एक कविता दु:ख की हो.
    वाह!!!

    आपको, आपकी कलम को, और इस कालजयी कविता को नमन!

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    1. क्‍या, अनुपमे, क्‍या, पाठिके, हियां पंद्रह दिन में सलीमा मुरझाइल हो जाता है, और आप काल को जीतने का ताली ठोंक रही हैं? इतना उत्‍साही दौड़धर्मियों को इसीलिए आगा रखकर हम रिले रेस में हमेशा हारते रहे?

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  9. वीरेन डंगवाल की बहुत सारी कवितायें इन्हीं दायरों की हैं।

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    1. अरे, सब हियां लाईन से दायरा पीट रहा है! ई दायरा नहीं, देहरी है, बाबू. किताब, किताब का नहीं, रचना का शीर्षक है.
      अनूप पंडिजी और चंद्रभूषण बुद्धिजीवियो को भी बता रहे हैं.

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  10. ...एक कविता जिस तक बार बार लौट कर आना होता है... एक कविता जो बाँध लेती है... एक कविता जो बस जाती है मन में...
    अज़दक पर ऐसी कितनी ही कवितायेँ हैं...!!!

    चरणस्पर्श प्रणाम!

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