Thursday, August 9, 2007

पुरबिया फुटानीबाज का विरह गीत



चोन्‍हाके देखs, सुनरी, तनि कोहनी लड़ाके देखs
आंखि से आंख सटाके अऊर गोड़ हिलाके देखs
कुंइया पे गगरी भेंड़ाके तनि करेजवा जराके देखs

गाड़ी रंगोवलें बानि तहरा खातिर
नेल पालिशो चढ़वलें बानि तोहरे खातिर
जुल्‍फी के नवका इस्‍टाइल
जाकिट-पाकिट-बेल्‍ट-बूट
रंग-रोगन सब इस्‍पेशल
बमबम फारन इस्‍माइल
चऊदह गांव कवनो तिलकहरु
न सजल होई, ससुर
जेतना डेंटिंग-पेंटिंग
करवलें बानि, बबुनी, तहरा खातिर
सेंट में बूड़-बूड़ रोज सम्‍पू से नहातानि
अकबकाइल अजिया के चाची बुलावतानि
अऊर जबरी चमईनी पे चिंचियावतानि

कपार कंटाइल बा, मुंड़ी के होश उड़ल
एतना सताव मत, लाल पान के बेगम
चल आव कोरा में, लजाके देखs
टोअs हेहर-ओहर, तनि लहराके देखs.

10 comments:

  1. ओहो इतने पर भी आई कि नहीं ?

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  2. भाई जी ! मजा आ गया ! "बवाल है " !

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  3. ये बाबू देखत हईं फ़ुटनियां का ललतरनियां कुछ ज़्यादे बढ गईल बा. सावधानी! नै त सुनरी के बदे कहीं दुसरा फ़ुटानी ना आसिक होई जाये,जऊन ई भईल त केहू से सपरी ना,का गलत कहलीं का?

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  4. गजब बाऊ ! कऊने जिला के रहेवाला हुए ई फ़ुटनिया? अ सुनरि के कुछो खियाई ना.... बाटी अ भन्टा क चोखा ! तौने पे ई फ़ुटानी गीत बहुतै निम्मन लागल!ई कुल रऊरा बड मजगर लिखेली.

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  5. शशि सिंहAugust 9, 2007 at 4:00 PM

    मुखिया जी,

    देखीं... भाई जी त बवाल करा दीहन...

    आ भाई जी, ई रउआ कौना गली में घुस गइनीं?

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  6. बीस साल पहले के बलिया से बाहर आइए विमलजी। अब तो वहां भी पुरुषों के पार्लर खुलने लगे हैं, और कोई खुश होकर दस बीघा खेत भी नहीं लिख देता। फुटानी पे फुटानी आशिक हो गया तो दोनों सेलीब्रिटी बनेंगे, कुटानी कोई नहीं होगा...

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  7. ढुल पारे बजा बजनिया,ढुल पारे बजा बजा।मुंडे किलिपिन,पाये अलीता,लाल-पान चिडिया टेका!

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  8. गजबे है जी..का बात है. पुरबिया फुटानीबाज़ ने तइयारी बहुत की है, दाल जरूर गलेगी. सिंगार रस का जौन वरखा आप कर रहे हैं, उसमें वियोग सिंगार तो हो गया, अब जब संयोग सिंगार भी लिखिए. जरा लल्लो चप्पो वाला नजारा भी देखाइये.

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  9. बाह भई बाह!! बहुते नीक!!

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  10. काहवां से निकलनी ह जी। इ त तुलसी रचनावली बुझाता। निमन बा जी।

    बड़ मजा आइ सजनी सवंनवा में।
    आ जा न हमरे अंगनवा में।
    ठेकुआ बनवले बानी तोहरा खातिर
    गोइठा जलइले बानी तोहरा खातिर
    आ ज न हमरे अंगनवा में।

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