Monday, August 13, 2007

प्‍यार में नदी पार करना..

सोनिया, बड़ी इच्‍छा होती है बस स्‍टॉप पर तुम्‍हारे साथ खड़े होकर लोगों को अपनी तरफ़ देखता देखें. तुम ऐसे ही हंसती रहो और लोगों की नज़रों से पार तुम्‍हारी नज़र से दिल्‍ली देखें. या प्‍लीज़, ज़रा चलो न फ़ुरसत निकालकर, देखें कैसे पहुंचती हो गांव, देखें गांव में कैसे चलते हैं तुम्‍हारे पांव, सब तुम्‍हें देखें और मैं देख लूं कैसे देखती हो गांव. सोनिया, बड़ी इच्‍छा होती है कि पास में एक सेकेंड हैंड लम्‍ब्रेटा हो चेतक और तुम बरसात के थमने के बाद दिल्‍ली की सड़कों पर तैरती होओ. तुम्‍हारे कंधे की नम गरमी पर हाथ टिकाये, सिहराये, ओह, मैं उड़ता होऊं, तुम हंसती बताओ, दिखाओ दिल्‍ली वैसी जैसे पहले कभी किसी ने सपने में भी न देखी हो, जिस दिल्‍ली के क़ि‍स्‍से सुनकर बादशाह के भी सीढ़ि‍यों पर पैर लड़खड़ा जायें.

सोनिया, तुम आती हो तो कितना अच्‍छा लगता है, कैसी तरल मानवीयता में नहाकर तुम्‍हारे साथ खुद से भी होती है रोज़ नयी मुलाक़ात. जब नहीं होतीं तब भी धीमे-धीमे चलकर हमारी ही तरफ़ तो आती रहती हो सपनों या ख़्यालों की किसी उजली पगडंडी पर, हंसती-चहकती, हर बार हमारी इंसानियत का पैमाना ज़रा ऊपर करती हुई.

हम जहां से आए हैं, सोनिया, कहां आदमी को मयस्‍सर होता है इंसा होना. बहुत संभल-संभलकर क़दम रखना पड़ता है, सोनिया. मौत का कुआं है समझ लो, राजनीति व समाजशास्‍त्र का कैसा तो उलझा तानाबाना है बेहोशी में हाथ-पैर फटकारते रहते हैं, होश नहीं रहता साबूत बचेंगे या नहीं. तुमने हमारी ज़ि‍न्‍दगी बचा ली है, सोनिया. मगर तुमने बचा लिया है तो हम फिर नये सिरे से डूब रहे हैं. लेकिन बहुत अच्‍छा लग रहा है, सोनिया. इस सपने को तोड़ना मत, सोनिया, और तोड़ना तो एक मीठा, ज़हरीला घाव दिये जाना कि हम जान जायें प्‍यार में नदी पार करना कितना सांघातिक होता है.

रवीश बाबू की दिल्‍ली की लड़कियों के असर में

6 comments:

  1. Sir , kuchh JAMA nahi ! kahin yeh BLOG_WAR to nahin ?

    ReplyDelete
  2. आंय, कौन वाले ब्‍लॉग वॉर की बात करते हो, बच्‍चा? यहां कहीं वॉर नहीं है. जो एक ठो है सो इराक में चल रहा है!

    ReplyDelete
  3. बसंत आर्यAugust 13, 2007 at 4:03 PM

    “रविश बाबू की दिल्ली की लडकियाँ के असर में.” ऐसा लगता है रविश बाबू की हर शहर की लडकिया है तो जरा और शहर भी लपेटे में लिया जाय सरकार लोग. आपका बसंत आर्य

    ReplyDelete
  4. इतना लाड़ ठीक नहीं..

    ReplyDelete
  5. बड़ा गहरा असर पड़ा है!!

    ReplyDelete