Friday, August 24, 2007

परेम का एहिये परसाद दे रहे हैं?..

रामजीत राय व्‍याहता बेबी राय का अपने स्‍वामी को पत्र..


सैंया जी, सामी जी, हमरे मन का नैया को बूड़ा-बूड़ाके डुबाये वाला कामी जी.. ई सब काहे ला दीवार-सियार गिरे का बात कै रहे हैं! मन का दीवार इंहां पहिलही टूटल है, अऊर घरो का देवाल को, देखिये, चैन नै पड़ रहा है? आग लगे ई बूंदी-बरखा में..

केतना तो जतन-जेहमत से ताकत लगाके नीन्‍न लगाते हैं, कि असबेस्‍टस का खपड़ा पे पड़-पड़ का गोली छोटाने लगता है, अऊर फुर्र देना आंखी का सब नीन्‍न गायब! आपका अपना किरिया खाके सच्‍ची बोल रहे हैं, परमेस्‍सर जी!.. ओकरा बाद सगरे रात ई करबट से ऊ करबट.. दिन का बखत होता त फुलमनिया को बुलाके लुडो-टुडो खेलते, रात का टैम में ओकरा संगे कौची खेलेंगे.. त केकरा संगे खेलेंगे?.. अब ईहे सब पहेली पूछके हमरा दरद बढ़ाइएगा? बहुत मजा मिलता है नै आपको? हुंआ दीवार टूटा है, हिंयवा दिल.. ओकर मरम्‍मत नै कीजिए.. बस अपना मरदाना मजा लूटके ताली पीटिये, हं!

पप्‍पाजी त बहुतै नराज होंगे, नै? हम्‍मो को गारी दे रहे थे? सच्‍ची-फैट बोलिए न?..

हम का करें, आपै रस्‍ता काहे नै देखाते? हमरा हिंया कवनो मन थोड़े लगता है जी! सगरे-सगरे रात का बरसाती हेहर-ओहर करबट काटके आपका यादी में नेकाल देते हैं. भुरुक-भुरुक रोते हैं अऊर हिम्‍मत बांधके ऊ वाला गाना गोनगोनाते हैं- हमने तुमसे पियार किया है जेतना, कवन करेगा ओतना.. बुझइबो नै करता है कि रो रहे हैं कि गा रहे हैं!

मन्‍नु मौसी का ताना-तरवाल का डर नै होता त हम कब्‍बे ले बस का टिकिस निकलवा के निकल गए होते! हुंआ हमरा जोदाई में घरे का दीवाल भसक जाय रहा है , मगर एगो आप हैं कि टस से मस नै हो रहे हैं!

मन्‍नु मौसी कवनो ललिता परवाल हैं (ललिता परवाल तो हइये हैं!) कि आप डेराके हमको लेबे बास्‍ते नै आय रहे हैं? बाल सफेद हो जायेगा और बेलाउज झुलनी, तब्‍ब हमको लेवे ला आइएगा? केतना निरमोही, निरदयी भतार हैं जी आप? एही दुख देबे बास्‍ते हमको जीवन-संगी बनाये थे? जीवन-संगी कौची का, हमको तो जीवन जोगिनी हो गये अइसन बुझाता है.. कांता अऊर तिरप्तिया दोनों को दो-दो गो छौंड़ा डेरिवली हो गया, अऊर हम अब्‍ब ले नॉन-पेरगेंटे हैं! बरसाती का राति में आंखी से लोर बहल-बहल बेलाउज भेजा देता है, लेकिन आपका लोहा माफिक करेजा में हमरा बरसाती का कवनो पहुंचै नै है! परेम का एहिये परसाद दे रहे हैं? हमको लेबे आय रहे हैं कि नै आय रहे हैं?

आपका जलम-जलम का चरनों का दासी,
बेबी कुमारी राय

11 comments:

  1. Chacha ,

    yekar naam BABY SINGH hokhe ki chaahin ! kahe , kauno RAI jee se jhagadaa hua ka , aapako ! aap ta khanti BABUSAHEB lagate hain ! THEHUNA me budhidhi hai ? ka ?

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  2. अब त बहुत हो गिया..बेबीजी तुम्हरा पियार अगर सच्चो में है त रमजितवा एक न एक दिन अईबे करेगा.. बस तुम जमाना की नजर से लुका के रहाना.. अब बेबी का दर्द सुहा नही तनिको सुहा नही रहा है.

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  3. चिट्ठीआ का संगे रंग-बिरंगा बाला
    हाय रे निर्मोहिया एकदमे मार डाला

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  4. सच्‍ची-फैट
    का तो जवाब नहीं है जी। जवाब तो बहुत सी बातों का नहीं है।
    झक्कास च बिंदास

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  5. बेबिया को मार ही डालेंगे का ?

    कहां तोहार बेबिया का लोर, अउर कहां ऊ रमजितवा हरामखोर . बेबिया का कुल जिनगी बरबाद कर दिया . ओकर जवानी माटी कर दिया . जब्बों आप बेबिया का पिराइभेट चिट्ठी पढा देते हैं,मन गिनगिना उठता है . अब बेबिया को बेसी मीरा बाय न बनाइए . अबहियां तीर का माफ़िक सीधे जाइए अउर रमजितवा का चमरौधा-सत्कार करते हुए गांव तक लाइए . लाकर ठेल दीजिए बेबिया का गोड़ तरे .

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  6. आ हे चचा, ई का सब लिखत बाड़ सं?ई बेबिया का जिनगी से रामजितावा के निकाल फेंकी सं आर धरमजितवा के लियाई सं. ई बेबिया का जिनगी में तनी त खुशी लियावे के.

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  7. सच्‍ची-फैट बोलें बेबी-अब तुहार दरद हमसा न देखल जाई-
    आप अब भुरुक-भुरुक रोईये कै हुरुक हुरुक-हम ता बलवा उज्जर हो जावे के बाद हीं अहियें.

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  8. बेबी जी के पवित्र एवं स्वच्छ इन्तजार की दास्तान पढ़कर दिल भर आया.

    अब इतनी दूर से तो संवेदना ही व्यक्त कर सकता हूँ. कहीं नजदीक होता तो कंधा आगे कर साथ दो बूँद आँसू बहा लेता. कहते हैं रो लेने से दर्द हल्का हो जाता है.

    अबके आपसे मुलाकात हो तो बेबी जी को इस शिद्दती इन्तजार के लिये मेरा भी साधुवाद दे दिजियेगा.

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  9. बेबिया का कुल बतकही फैटे बुझाता है।कम से कम एगो धोतिए भेज देते हुआं। धो्ती-पुत्र का आस रहता!

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  10. सही है। यहीलिये शायद कहा गया है- प्रेम का बजिहै जब पटाखा तो मनवा मां कसक हुइबै करी। :)

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  11. padhla par lagal ki ee khali babiye ke na... parbatiya, sabitari aur sitabo ke kahani ha..
    bada mast anubhooti ha aur bhawanawa ke bada gaheer sampreshan.
    sadhuvaad.

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