Saturday, September 1, 2007

अज़दक को गुस्‍सा क्‍यों आता है?

चूने और सफ़ेद तेल रंगों से रंगे केश और रंगीन वेश बनाये इस आदमी की दिक़्क़त क्‍या है? अमेजोन या कहां के जंगलों में भटकता ये साबित कर क्‍या रहा है? पुलिस इसे पकड़ क्‍यों नहीं रही.. या अविनाश ही इसके खिलाफ़ पोस्‍ट क्‍यों नहीं लिख रहा? किसके विरुद्ध यह इस तरह के हिंसावाद पर उतारू है?.. या नंगावाद.. जो भी है, क्‍यों उतार रहा है?.. कोई ठुमरी गाकर अनामदास ने तो इसका कुछ नहीं बिगाड़ा? फिर किसके अंगेस्‍ट यह ऐसा भयानक मिसाइल ताने है? ज्ञानदत्‍तजी को यह धोबियापाट देना चाहता है? या इरफ़ान के सब पॉडकास्‍ट्स को ब्‍लास्‍ट कर देना चाहता है? कि प्रत्‍यक्षा को धमका रहा है कि झोली में चार किताबें डालकर पढ़वैया वाली अदायें न दिखाये? कि बोधि की कविताओं पर.. अभय को अपनी पुरातन शेर-सविता पर.. भई, किस पर बम-बम मुर्दाबाद हो रहा है? कि यह अपनी ही पतनशीलता के विरुद्ध है? कि सामा‍जिक सहोदरता और सदाचारी व्‍यवहार के खिलाफ़ ज़ेहाद? कि युनूस कुछ सुना नहीं रहे उसके लिए.. कि जो सुना रहे हैं वैसा क्‍यों सुना रहे हैं, उसके लिए? भई, जिसके भी लिए है, इस हिंसा को रुकवाये कोई.. ऐसी गंधाती पतनशीलता को पटरी पर लाये कोई?..

16 comments:

  1. ये सही है.. बस इतना बतायें कि फोटो पहले आई या पोस्ट?

    ReplyDelete
  2. वैसे ये अदा काफी अच्छीई है ।
    अरे कोई है इन्हें फिल्म में काम दीजिये जरा ।
    क्या शानदार मिसाईल तानी है । विलेन बना दीजिये । हीरो बनने की उम्र तो गई । उत्पल दत्त वाले रोल भी चलेंगे

    ReplyDelete
  3. अब इस तरह से ऐठे हुये बुजुर्ग से कौन पंगा लेगा..? क्या पता कब शीशे तोडने पे आ जाये..

    ReplyDelete
  4. बाकी सब छोड़िये...यह बताइये यह निशाना किस पर साधा है??

    ReplyDelete
  5. हाथ में मिसाइल है, गुलेल है या खाली ठेंगा, पता ही नहीं चल रहा है।

    ReplyDelete
  6. @अभय मियां, दोनों बाजू-बाजू जनम रहे थे.. शेर लिखते हैं, ऐसी सीधी बात बूझ नहीं पाये?

    @युनूस बाबू, यह अच्‍छा है. उत्‍पल दत्‍त वाला रोल मैं करूंगा, और कन्‍हैया लाल वाला आपको दिलवाऊंगा?

    @अरुण, सुधरोगे नहीं? मैं बुजुर्ग दिख रहा हूं? तोड़ने आऊं तुम्‍हारी सस्‍ती गाड़ी का शीशा?

    @प्रत्‍यक्षा, सिर्फ़ डर गईं? नथिंग एल्‍स? स्‍ट्रेंज!

    @बेजी जी, मिसाइल है.. कितनी दूर मार करता है, यह तो चोट खानेवाला ही बताएगा..

    @रघुराज ठाकुर, हाथ में जो है और देख नहीं पा रहे.. (उसकी आध्‍यात्मिकता में).. आपको नहीं लगता आंख के इलाज का समय आ गया है?

    ReplyDelete
  7. यहाँ गुलेल ताने हैं और बाजू वाली फोटो इसी कुर्ते में आँख बंद किये हैं. सब ठीक ठाक तो है?? किससे सच में नाराज हैं उसका नाम लिखे हैं कि नहीं??

    ReplyDelete
  8. आप तो फिलिम लिखते हैं ना, ये फिलिम एक्टिंग में कैसे आ गये।
    कौन सी वाली है। रामगोपाल वर्मा टाइप कुछ मामला है। जो भी हो, बताया जाये, फिलिम देखी जायेगी।

    ReplyDelete
  9. शारारती बच्चे की तरहा से पहले तो मेरी आख फ़ोड दी, गुलेल मार कर, अब नीचे बेठे पछता रहे हे,उठो बाबा जी उठो

    ReplyDelete
  10. वाह!!
    इस उमर में यह निशाना साधने की कोशिश, यह आक्रामकता, गुड है सरकार!!

    अब आगे क्या कहूं , अरूण जी की सस्ती गाड़ी का शीशा तो तोड़ लेने की धमकी दे रहे हो आप, पन अपन को कोई वान्दा नई, सस्ती गाड़ी भी नई अपने पास तो।

    ReplyDelete
  11. अब इतना गुस्सा इस उभ्र के लिये ठीक नहीं :) रक्त्चाप समय-२ पर नपवा लिया करें :) :)

    ReplyDelete
  12. रखीये गुलेल, ये क्या कर रहें हैं,किसी को लग जायेगी तो लोग घर पर नालिश करने पहुच जायेंगे

    ReplyDelete
  13. काश! लोग आपका संदेश समझें और अमल में लाएँ , आपकी गुलेल धमकी को सीरीयसली लें।

    ReplyDelete
  14. गंधाती पतनशीलता को पटरी पर लाये कोई? पटरियां दिमाग हो गयीं हैं ,उखड़ गयीं।

    ReplyDelete
  15. मुंह में अगरबत्ती लिए यह कौन धार्मिक व्यक्ति है जो ईश्वर को गुलेल मार कर ( 'कंकरिया मार के जगाया' की तर्ज़ पर) जगा रहा है ?

    ReplyDelete