Monday, September 10, 2007

एक बेवक़ूफ लड़की का अंत..

दरवाज़े के ओट खड़े होकर रीझाना, मुंह बिराना, और उचित मात्रा में जब ज़रूरत पड़े लजाने का गुर जानती थी वह. जानती थी देवरजी की खाने में पसन्‍द, भसुरजी का गुस्‍सा और जेठानीजी को दोपहर सब निपटाने के बाद गोड़ दबवाना कितना पसन्‍द है. ओसारे में पराये-ठिलियाये मेहमानों की बतकुट्टन में जब भौजी का दिमाग नहीं चलता, सिर पर साड़ी डाले, सिल पर मसाला पीस चुप्‍पे बैंगन-लौकी का बजका और चाय चलाकर सबको खुश करने का सलीका जानती थी वह. मलपुआ में कितना केला जाएगा, परवल का अचार कब सूखेगा, रात में बच्‍ची उठ जाती है दीदी से नहीं सपरता तो बिना किसी के खबर हुए दीदी की बच्‍ची संभालती थी वह. औरतें ताज्जुब करतीं सोनिया ने सब सीखा है कहां से. अभी सत्रह की भी तो नहीं हुई थी, माथे में महीन सिन्‍दूर और कलाई में हरी चूड़ि‍यां सजाकर बदमाश इतरायी छत से कपड़ा हटाती और टीवी का नया गाना गुनगुनाती सबको मोह रही थी. कभी कहां बताया विपन्‍नता के बिहारी माध्‍यमिक शाला की फर्स्‍ट डिविज़नर है.

चालाक थी होशियार थी, सब जानती थी सोनी. एक यही ऐब था कि चोट लगती तो दिल पर ले लेती, खाना छोड़ देती, अपनी बात से पीछे नहीं हटती. सब जाननेवाली बेसऊर दुलहिन नहीं जानती थी ससुराल की हिंसा का मतलब. किरासन के कनस्‍तर वाले तंग कमरे में देर रात देवरानी और देवरजी से उलझने का मतलब क्‍या होता है नहीं समझ सकी बेवक़ूफ लड़की.

11 comments:

  1. सुबह सुबह दुखी कर दिया!!

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  2. @सॉरी बेजी, मैं दो दिन से हूं..

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  3. यह क्या? होता है यह - मालूम है. पर अनुभूत करा कर टीस दिलवाना? एक वो बर्बर हैं - घासलेट के कनस्तर वाले और एक आप हैं जो सोमवार के व्यस्त दिन में अवसाद घोल रहे हैं.

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  4. बेचैन रहता हूं . खुश रहने का प्रयास करता हूं . आपकी ओर आये बिना नहीं रह सकता . आता हूं तो सारे प्रयास विफल हो जाते हैं . बेचैनी और बढ जाती है . समझ में नहीं आता क्या करूं .

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  5. मुझे दुख नहीं गुस्सा आता है ।

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  6. हम्म!! यह कहाँ ले गये भाई! मन भारी हो गया-चलते हैं अब!

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  7. होता है, यह भी होता है , सबकुछ होता है क्योंकि स्त्री देवी है , तो देवी की मूर्ती को भी पूजा खत्म होने पर पानी में बहा दिया जाता है । यहाँ अग्नि के हवाले कर दिया जाता है ।
    घुघूती बासूती

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  8. Kaise Rakshash hain jo apne parivaar ki stree ko
    ees tarah jala dete hain ? :-(
    Unhe Bhagwaan per astha nahee hogee --
    Ishwar unhe kabhee maaf nahee karte.

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  9. अभी पढ़ पाया हूँ। ऐसी हर लड़की बेवकूफ होती है जो दुनियादार नहीं होती। हम उसे सिर्फ जलते देख सकने को मजबूर क्यों हैं प्रमोद भाई।

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  10. सच कितनी बेवकूफ़ थी वह! पहचानी सी लगी वह .

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