Sunday, September 16, 2007

नज़र के धोखे..

"क्या करूँ कहाँ जाऊँ" के सवाल का मतलब यह थोडी था कि यहाँ आऊँ? और इस हालत में आऊँ, कोई मतलब बनता है इसका? कैसा मुश्किल समय हो गया है कि छोटी से छोटी चीज़ के लिये भी इतना दिमाग उलझाना पडता है जबकि, अदरवाईज़ देखिये, मैं इतना सुलझा हुआ व्यक्ति हूँ लेकिन यह भी सच्चाई है कि फिलहाल उलझा हुआ हूँ . तात्कालिक तो है ही . जिनको मित्र समझने और कहने की गलती करता रहा हूँ ; जो खुद भी मुझे अपना मित्र बता के प्रत्यक्ष या परोक्ष अपने हित साधते रहे हैं सब अचानक इस गाढे ज़रूरत के वक्त लापता हैं फरार हैं ( ओह अकेला मैं! ) .

दे जस्ट रिफ्यूज़ टू टेक अ स्टेप टूवर्डस माई डाईरेक्शन . ओह, दिल्ली मेरा परदेस . फिलहाल देस जो है वो आँख की कंजंक्टीवाईटिस है और बडी तकलीफ दे रही है लगभग वैसी ही जैसे दोस्त देते रहे हैं या देना उनका फर्ज़ बनता है . मेरी बातों में तरतीब का अभाव दिखे तो आप उसे मेरी तीक्ष्ण बुद्धि पर आरोपित करने की बजाय अपने को दोस्त बताने वालों के घटिया बरताव व फलस्वरूप तदजनित मेरी आई फ्लू की आग पर मढें . कृप्या दुखी होने की अदायें मत लीजिये दुखी मैं हूँ .

अनोखी अभूतपूर्व कलाकृति : मैं, मैं, केवल मैं



3 comments:

  1. ये चीन मे लडी आखे कुछ तो दुख देंगी ही..:)

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  2. १. सुलझाव-उलझाव एक ही सिक्के के दो पहलू हैं.
    २. मित्र सामान्यत: मरीचिका होता है.
    ३. गड़बड़ लगे तो मेरी बात पर विश्वास न करें.

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  3. वैसे तो यह पोस्ट आपकी तीक्ष्ण बुद्धी का सूक्ष्म परिचय भी नहीं दे रही...फिर भी टिप्पणी करने का मन है...
    दे जस्ट रिफ्यूज़ टू टेक अ स्टेप टूवर्डस माई डाईरेक्शन

    बात आज फिर कविता से ही....
    अपेक्षा
    जंगली घास की तरह
    उग आती है
    रिश्तों के बीच
    जगह बना लेती है
    स्नेह से रिक्त स्थान पर
    टिक जाती है

    तुम सोचते हो
    सींचते हो
    फिर भी जिन्दगी
    हरी क्यों नहीं
    जिन्दा पलों से
    लदी क्यों नहीं

    सूत्र पुराना ही है
    बेहतर फसल
    के खातिर
    घास खींचनी होगी
    काटनी होगी

    दोस्त....किसे कहते हैं दोस्त....बड़ा उलझा सा प्रश्न है...गल्ती ना हो जाये इसलिये अपने दोस्त गिनने कि बजाय मैं कितनों की दोस्त हूँ यही गिनती हूँ....आप क्यों नहीं अपनाते यह तरकीब...

    उस दिन सूअर की तरह खों खों का जिक्र...आज कन्जंक्टिवायटिस...आपकी तबियत तो ठीक है?!

    ...या यह कोई बहुत उम्दा पोस्ट के पहले की बेचैनी है?!!

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