Sunday, September 16, 2007

बहुरुपिया समय के मार्मिक, दिलफोड़ किस्‍से..

क्‍या क्‍लोनिंग संभव है?’ का भोला सवाल करनेवालों की भोली बुद्धि पर तरस आता है. क्‍या लोग सही और सीरियस सवाल करना भूल गए हैं? नहीं भूले हैं तो ऐसी बकवास भला कैसे कर सकते हैं? और करना ही हो तो इल्‍लू, बिल्‍लु, टिल्‍लु के ब्‍लॉग पर करें, मेरे नहीं.. आज के वर्चुअल समय में क्‍या वास्‍तविक और क्‍या क्‍लोन? दूसरों का प्रोसेस्‍ड माल मेरे लिए हमेशा अधूरा व बेमतलब रहा है, अपने निज के अनुभव ही प्रामाणिक व फ़ाईनल रिज़ल्‍ट प्रोवाइडर रहे हैं.. तो मेरे रास्‍तों के अन्‍वेषी सच तो कुछ और ही कहानी कहते हैं! और वह कहानी अदरवाइस जितनी भी फ़रेबी और पतनशील हो, क्‍लोनिंग को क्‍वेश्‍चन करनेवालों के मुंह पर तो करारा तमाचा है ही..

अब जैसे सर्कुलेशन में आए इस नए किस्‍से को ही लीजिए.. कुछ भाई लोगों ने मेरी दिल्‍ली में उपस्थिति मात्र ही नहीं दर्ज़ करवा ली, मुझे नैन लड़ाते, व उस नैन लड़ाने के एवज में कंजंक्टिवाईटिस पाना भी देख लिया! (भगवान करे नज़रों के पिटे इन सारे नमूनों को कंजंक्टिवाईटिस हो जाये फिर ये चिरकुट जानें कि ऊलजुलूल बकने या नैन लड़ाने की सज़ा क्‍या होती है!).. एनीवे, मैं इन भले व बेशऊर लोगों से बस इतना पूछना चाहता हूं कि हमें आपने दिल्‍ली में नैन-मटक्‍का करता ताड़ लिया तो वह अज़दक कौन है जो मुंबई में अनूप शुक्‍ला की ब्‍लॉगर्स मीट और अनपेड बिलों के भुगतान से सिर छिपाता-जान बचाता भागता फिर रहा है? जिसकी बाइक की डिक्‍की से पड़ोस की नर्सरी स्‍कूल की रस्टिकेटेड मिस के प्रेमपत्र बरामद हुए हैं, और मिस का मिस्‍टर जिसे बरामद करने को मचल रहा है?.. और बात यहां महज़ दो शहरों के बीच भर की नहीं.. दुनिया के दो दैत्‍याकार मुल्‍कों की है.. हम चाहें भी तो क्‍या भूलने की धृष्‍ठता कर सकेंगे कि यहां से (कहां से?) हजारों मील दूर एक बेवकूफ़ मां (गाओपिंग) और समझदार बेटी (नानान) के प्रेम ने अज़ांग को किस तरह न घर का न चीन का बनाके रख छोड़ा है?..

इनमें से किसी एक को सही और दूसरे, तीसरे किसी को भी आप गलत साबित कर सकते हैं? करेंगे तो जिसे करेंगे वह नहीं, आप गलत होंगे.. गलत से ज़्यादा हास्‍यास्‍पद होंगे.. क्‍योंकि मैं तो सोच-सोचकर सन्‍न हो रहा हूं कि किसकी सत्‍यता को विशिष्‍ट कहकर सत्‍यापित करूं.. मेरे लिए तो ये सभी सच्‍चाइयां प्रामाणिक और अनक्‍वेश्‍चनेबल हैं.. आपके लिए नहीं हैं तो आपसे हमारा फिर संबंध क्‍या है? एक ब्‍लॉग भर का भी नहीं है.. अच्‍छा हो अभी आईने में आंखें उतारकर देखिए, हो सकता है लाली ऑलरेडी उतरना शुरू हो गई हो, और जल्‍दी ही आप भी कंजंक्टिवाईटिस का आई ड्रॉप ले रहे हों!

amazing colorscape by amazing pakhi s.

2 comments:

  1. वो अज़दक कौन है जिसकी डिक्‍की से पतनशील साहित्‍य बरामद हुआ है ।
    वो अज़दक कौन है जो अपनी भाषा को सिक्‍कों की तरह खनकाता है
    वो अज़दक कौन है जो चीन की लंबी यात्रा से वापस ही नहीं लौट रहा ।
    वो अज़दक कौन है जिसकी अंखियां आने के किस्‍से मशहूर हैं ।
    वो अजदक कौन....अरे बाप रे कितने क्‍लोन हैं अज़दक के ।
    कृष्‍न कृष्‍न कृष्‍न वह कृष्‍न हुई । सखियां आपस में पूछें राधा कित गई ।

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  2. अनूप शुक्ल जी से मिलन का किस्सा जरा अपने अंदाज में सुनाकर फिर चीन चलिये.इन्तजार कर रहे हैं.

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