Monday, September 10, 2007

अमेरिका, अमेरिका..

शांति कहां रहती है? रोज़मर्रे का मामला हो गई हैं लड़ाइयां.. एक चुकती नहीं कि कोई दूसरी, नया, मोर्चा बांधकर खड़ी हो जाती है.. शायद जीवन जीने का अब एक मतलब ही हो गया है कि आप कितनी सक्षम व समर्थ लड़ाई लड़ सकते हैं.. या नहीं लड़के एक हारे व मारे जीवन के अधिकारी बने रहते हैं.. कभी हमें सीधे-सीधे दीखती है.. तो कभी नहीं भी दिखती.. कि कैसे हमारी छोटी, पिद्दी-सी ज़िंदगी बड़ी लड़ाइयों का मोहरा है.. कैसे सारी लड़ाइयों का बाप अमरीका हमारी ज़िंदगियों को चक्‍करघिन्‍नी सा नचाता है!..

इस पर मैं एक-दो दिनों में फिर कुछ लिखूंगा.. मगर फिलहाल केपी शशि की बनाई और बी जयश्री के गाये इस चुटीले, लंगी लगाते विडियो का लुत्‍फ़ उठायें.. विडियो ज़रा वियर्ड है, मगर आज के हमारे जीवन में तब क्‍या नहीं है.. विडियो फॉरवर्ड कराने के लिए पहाड़ के हमारे एक पुराने मित्र विपिन बिहारी शुक्‍ल का शुक्रिया..



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12 comments:

  1. मज़ा आ गया.. मैं ता्लियाँ मार रहा हूँ.. सीटी बजा रहा हूँ..

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  2. वाह, मजा आ गया !
    घुघूती बासूती

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  3. जबर्दस्त....मजा ही मजा.


    प्रमोद जी, शेर वेर में 'माथा नहीं लगाते'. लेकिन एक शेर है;

    है अमन के वास्ते दुनिया में बना UNO
    इसमें यूएस का U है, बाकी सब का NO ही NO.

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  4. अरे आप तो चीनी कम है ज्यादा देखने गये थे..ये अमेरिका कहा खीच लाये बीच मे ..बुश आपको ढूढ रहा है..:)

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  5. पहली बार आपके ब्लाग पर आया,
    बहुत अच्छा लगा, यह अमेरिका-अमेरिका तो बहुत लाजवाब है।

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  6. वाह!!!!!!!!!!!!!वाह!!!!!!वाह!!!!!!!

    -एक बेहतरीन दिलेर प्रस्तुति-सुपर्ब...हैट्स ऑफ...

    -अब तक तालियाँ बज रही है, आपको सुनाई देंगी यह टिप्पणी पढ़ते हुये...जबरदस्त!

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  7. वाह, मजेदार! धारदार!

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  8. क्या बात है!
    सच्चाई और व्यंग्य का जबर्दस्त पंच है इस वीडियो में . अमरीकी विद्रूप पर सटीक टिप्पणी .

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  9. बी जयश्री तो मस्त हैं । कोलेटरल डैमैज़ ....सही सही ।

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  10. Chaliye,
    Ye video bananewale ne apna vyag to rach daala
    Baki Duniya ke log , apna virodh kaise drshayenge?
    Treaty sign ker ke?

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  11. ये बहुत मज़ेदार है।इसका इस्तमाल मैंने अपने स्पेशल रिपोर्ट में किया था। बहुत मजा आया था। जब बुशागमन हुआ था। दिल्ली में तोरणद्वार लगे थे। मनमोहन मुस्करा रहे थे। उसी दौरान इस गाने के कारण मेरी रिपोर्ट भी विद्यापति की कविता बन गई थी।

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