Friday, September 7, 2007

पानी में जरे मेरा सांवर बदन!..

बेग़म रामजीत राय का सखी सकीना को पत्र..

जलम-जलम का साथ है! निभाने को हमने कई-कई जलम लिये! हमरी हमदन, हमरी दोस, किलोज़ टू द हर्ट, सकीना कुमारी बज़्मी! कइसी हो, सखी? जनाप नूर मुहम्‍मत बाबू कइसन हैं (खुसखबरी सुनावे वाला कौनो काम किये हैं कि नहीं? सच्‍ची बताना, सकीना.. कवन महीना चल रहा है?) ? अऊर तोहरे जियरा के सत्‍तपरकास, मद्धम-मद्धम जरै वाला डलैबर साहेब.. ऊ कइसे हैं? ए बीच अऊर कौची-कौची का झांकी देखाये हैं, कि खाली पकीचा के राजकुमार वाला मूंछिये देख-देखके मोरझाती रही हो? गीत-गचल का आदानी-परदानी त ज़रूरे होइबै किया होगा, नै? हो सकता है तोको लेके लाल बजार में चुनरी अऊर चूड़ी का मरकिटिंगो कराये हों? कहंवा-कहंवा मउज-मजा की, सच्‍ची-सच्‍ची बोल ना रे, चोट्टी? डलैबर साहब सेन-फेन का इस्‍प्रे मारते हैं कि मुंह से दारू का बास छूटता है? तोराके त ऊहो बास कवनो सेन से कम थोड़े बुझाता होगा?.. तोरा मन का पापी को हम खूब पहचानते हैं! ऊपरी-ऊपरी सधवा, साया का नीचे पतुरिया? है कि नै? ठी-ठी-ठी...

अरे, त एमें मुंह फुलाये का कवन बात है? हम कवनो तोता-चिरैया वाला कथा कि टीबी का रिपोटिन थोड़े बोल रहे हैं, तोहरा आगे तोरा मन का फैट खोल रहे हैं! ई कारज तू थोड़े करेगी.. मन में कहंवा-कहंवा का साकर-समुंदर उमड़ा रहा होगा.. ई जिम्‍मेदारी वाला काम त कवनो तोरा दिल का अचीच नै करेगी, सखी? संगी-साथी अऊर कवन बास्‍ते होवे करता है, तूहीये बोल ना, सकीनिया? मगर तू सच्‍चो में कइसन ठीठ अऊर बेसरम निकलीस रे? डलैबर साहेब का संगे एतना कहानी का लांग चम्‍प लेके चल गई, अऊर हमको कवनो डिटेलिनो नै दी? एही बदे अपना को हमरा सहेली बोलती है? तू त चइली-चइली पिटाये वाला काज की है! मियां नूर मुहम्‍मत का कानी तलक बात पहुंचेगा तब तोरा अकिल खुलेगा, हां! तब टेसुआ बहाये बास्‍ते हमको जिन याद करना.. बड़ सखी बनती है, चोट्टी कहींकी! हीं-हीं, ठी-ठी-ठी..

एगो बात बोल, सकीनिया.. बोलेगी ना? ई आज हमरा करेजा एतना काहे फर्र-फर्र उड़ि‍ रहा है? काहे ला हम एतना हीं-हीं अऊर ठीं-ठीं कै रहे हैं? बूझ ना? नै बुझाया? मन्‍नू मौसी एंड मम्‍मीजी भी नै बूझ पायीं! मगर तू त हमरा डियरेस डियर है रे, सखी? एनीबेस, आजकल कवन केकरा के समझता है.. सब अपना-अपना बुड़की में मगन-मस हैं?.. अब तोहरे जीवन में एतना गो उत्‍पात हो गया त हम्‍मे कवन है जे के डलैबर साहेब का हाल-बंदगी पूछै खातिर तोरा नजीके चल गए? डलैबर साहेब का फोटो अपना परस में रक्‍खै का त कब्‍बो सपनो में नै सोचे! बड़ स्‍वारथ वाला जुल्‍मी जमाना हो गया है, रे सकीना? एनीबेस, खुसखबरी ई है कि तोहरे भइया जी आज संझा हमको लेवे बास्‍ते आय रहे हैं! एतना त हमको टेंसन चढ़ा है कि का बोलें.. सुबही से लिपसिक मल-मलके एगो सोगहग लिपसिक का डंडी खा गए हैं! नवका लिपसिक खातिर फूलकुमारी का हिंया पूछवाई खातिर एगो लइकी पठाये त चोट्टी जबाब भेजायी है कि हम लिपसिक कंहवा करते हैं? चोट्टी, छिनरी कहींकी! तोरा को नै, सखी, फूलकुमरिया को बोल रहे हैं!

उनका संगे नजर भेंटाने पर कवन वाला गाना गाये का सचेसन करती है? मोरा अंक लग जा, बालमा? कि पानी में जरे मेरा सांवर बदन?

तुमरे जलम-जलम की सहेली,
बेबी कुमारी राय

4 comments:

  1. ये हुई बात आपका पतनशील साहित्य एक अलग ही टेस्ट देता है..इससे आपके साथ हमारे भी पतन की संभावनाये बनी रहती है..:)

    ReplyDelete
  2. रमजितवा का ठोठ भेजा में थोड़ा-बहुत अक्किल ठेलकर अउर बेबिया के लगे पठाकर बहुतै पुन्न का काम किये हैं आप . बेबिया का करेज़वा तो मारे खुसी के फ़ुर्र-फ़ुर्र उड़ ही रहा था,हमरे मन को भी तसल्ली हुआ कि जो हुआ सो हुआ . अब सब फिन ठीक-ठाक हो जाएगा . हम पहले बोले नहीं पन आपौ बहुतै दिलदार आदमी हैं अउर पिरेम-पियार की ऊंच-नीच समझते हैं . तभइयैं न पठा दिए रमजितवा को . कहा-सुना माफ़ करिएगा . हम आपको बहुतै भूल बूझे थे .

    अब दरस-परस होगा, मान-मनुहार होगा,रूठा-रुठउअल होगा अउर तब पिरेम-पिरीत का पटाखा छूटेगा . तबहियैं न मुस्की ढील कर सकीना पूछबे करेगी कि कवन महीना चल रहा है .

    हमको तो स्टाल्टिंग में ही बेबिया का टेंशन,खुशी,तरंग और बात-बेबात ठीं-ठीं देख के बुझा गया था कि परदेसी बलम गाड़ी से बाड़ी या डेरे पर कि तो आ गया है,कि उसका समचार आ गया है कि आने वाला है.

    बकिया सब ठीक है . बेबिया को नया लिपसिक कीन दीजिएगा . फूलकुमरिया एकदम्मै बदजात है मौके का नज़ागत नाहीं बूझती है .

    बेबिया में हमको 'गाइड' का वहीदा रहमान दिख रहा है,एकदम फुल इनर्जी डेंज़र मूड में :

    "आज फेर जीने का तमन्ना हय,आज फेर मरने का इरादा हय"

    बूझलेन ? पिरेम-पिरीत किये होंगे तबहियैं न बूझबे करेंगे .

    ReplyDelete
  3. "Tere bin sawan kaise beeta tu kya
    jaane baalama" Gaakar jore ka jhatka dhire se lagane dena chahiye.sahi me Fulkumari aag ko
    Dhadhaane me taniko help nahi kiya.
    ho sakta hai usaka "Baleshar"bhi Punjab se same day hi "Ropani ke liye aanewaala ho aise me apane ghar ki aag bujhaya jaata hai.aur Baleshara ta sasuri ke aate hi lipisticke chaatta hai.

    ReplyDelete
  4. हीं-हीं, ठी-ठी-ठी..

    ReplyDelete