Wednesday, November 21, 2007

भोजपुरी में आधुनिक..

एटीच्‍यूड मत दीजिए. प्‍लीज़. क्‍योंकि वह मेरे पास भी है. पर्याप्‍त मात्रा में है. मैं भोजपुरी में आधुनिक होने की कोशिश कर रहा हूं, और चूंकि इससे पहले ऐसे किसी आधुनिकत्‍व की परम्‍परा नहीं है (परम्‍परा क्‍या, ककहरा भी नहीं है), तो विचार क्‍या वर्तनी की शुद्धता तक पर मेरा कितना नियंत्रण होगा, मैं आश्‍वस्‍त नहीं; मात्र इसीलिए आप मुझपर चढ़ जायेंगे और एटीच्‍यूड देंगे (और मैं ले लूंगा?) तो इसकी ग़लतफ़हमी में मत रहिए. किसी की ग़लतफ़हमी में मत रहिए. फिर चाहता क्‍या हूं? आपसे? भोजपुरी में आधुनिकबोध का आनन्‍द लीजिए, और मुक्‍तहस्‍त मेरी तारीफ़ कीजिए. चलिए?

केकरा खातिर एहर-ओहर के धूल खईनी
जांगर चलवनी
देह धुंकवनी
कपड़ा चिरवइनी
तोहरा खातिर, हे प्रीतम तोहरा खातिर

केकरा खातिर पामुक के पन्‍ना घोंटनी
बोदेलियर के पाठ कईनी
ई वाद अऊर ऊ दर्शन
के परायन में भइली पुरईंनी
लागा चुनरी में दाग से दूर रहिके
चुनरी में दाग़ लगवनी
तोहरा खातिर, हे बालम तोहरा खातिर

केकरा खातिर मन औंजौंवनी
केकरा खातिर चैन लुटौवनी
केकरा खातिर घर फूंकनी
केकरा खातिर फक़ीरी ओढ़नी
तोहरा खातिर, हे साजन तोहरा खातिर.

3 comments:

  1. हमरा खातिर त नहियईं लिखा होये ई?

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  2. ई तीनों जन -- बलम जी , प्रीतम जी अउर सजन जी -- लौटती डाक से का 'रिस्पॉन्स' (जवाब,उत्तर,प्रतिक्रिया,अनुक्रिया) दिए सो भी लिखिएगा . उनका ऐटीट्यूड से ही बात का लैटीट्यूड और लॉन्जीट्यूड समझ में आएगा . नाहीं तो बलम जी ऐसे ही बल्लम गोंचते रहेंगे अउर बिरहनी अइसे ही बिसुरती-बिसूरती रहेगी .

    मामला को देखिएगा जरा !

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