Tuesday, November 27, 2007

बेजी बोली बेमरीया देह में एत्‍ता मत लिखो, बाद में रोने लगोगे.. त् बेजीजी से छमा मांगते हुए..

रामजीत राय व्‍याहता बेबी कुमारी राय का सखी सकीना को हाले-दिल का ख़त..

तुम्‍मो नंबर एक का चोट्टि‍ये ठहरी, बतजात! ई कवनो बतायेवाला बात था जो तोराके खबर करते? एक त् मुंह अप्‍पने गोर, ऊपर से लईलीं करीयर चदरिया ओढ़! एक त् अइसे ही दुनिया-जेहान का नजर देख-देख के करेजा जर रहा है.. घामा-अंधेरिया कहिंयो बइठते हैं देमाग टनटनाने लगता है, अऊर तू पूछती है, तोराके चिट्ठी काहे नै लिखे! अरे, कवनो लिखेवाला बात होता तब न तोराके खत-चिट्ठी लिखते रे, मुंहजार?..

मन एकदम्‍मे भात में कंकर माफिक करर-करर हो गया है, सकीनिया, सच्‍चो में! बुझइबे नै करता है कवन करवट ठाड़ा हों, बइठें, कि कवनो गड़हा-गड़ही में कूदके जीवनलीला का दी एंटिंग बोल लें! तू समझेगी हम जोकिन-चुटकुला बोलके जी ठंडाय रहे हैं, लेकिन नहीं, हम करेजा का एंटियर हकीकत खोल रहे हैं, सखी! हकीकत हेहर-होहर उड़के जो तोहरा लगे ले चहुंपा है ऊ रीयल हकीकत नै न है, सहेली.. समाज-सोसायटी ला काजे असल हकीकत कहंवा ले चहुंपेगा.. असल हकीकत त् हमरा करेजा का दस किवाड़ी का भीतरी लुकाइल बइठल है! अऊर ऊ हकीकत ऊ नै है जो दुनिया-जेहान बोल रहा है, जेकरा खबर तोको मुश्‍तकिन के साथी से सुने को मिला..

अब तू बोलेगी हम कौची बास्‍ते एत्‍तागो बुझव्‍वल खेल रहे हैं? त् हमरा जइसन फूटल करम का मौगी बुझव्‍वल नै खेलेगी तो खोखो अऊर लुक्‍काछिप्‍पी खेलेगी, हो? एगे, फूटल करम नै होता जी त् सभा-सोसाइटी में अइसा बदनामी झेलते जी? बेना अपराध का रोज-रोज सजा पाते? तू लिख दी हम पढ़ लिए मगर अऊर कवनो हमरा मुंह का सामना आके बोले कि हम अपराध किये हैं, हम ऊ मुंहजार का मुंह नै नोंच लिए त् अपना बाप का असल छौंड़ी नै, हां?..

हां, रे सकीनिया, सच्‍चो में.. तू ही बोल ना, कवन अपराध है मेरा? अबाल्‍शन का टोटल नियूज झुट्ठल है.. एगे, पेट में बीज होगा तब न अबाल्‍शन होगा हो.. जब पेट में बीजे नै था त् कहंवा से और कौची का हम अपराध किये? हां, सखी, एगो तूहिये है जेकरा आगे हम अपना मन अऊर करेजा खोलके अपना जिनगानी का भेद ओजागर कै रहे हैं! राज को राजे रहने देना, नहीं त् ई सच्‍चाई जान लिये त् अल्‍जाम बड़ खूंखारीवाला करेंगे. हमरा किस्‍मते खराब है, परेम किये त् ऊ सकारथ नै हुआ.. अब एतना लंबा भकेसन के बाद इनका साथ-संगत हुआ त् हियां नवका टंटा! गड़ही-पोखर में बूड़के जान देवे वाला बात हम अइसे ही नै करते हैं, सखी! बहुत तोरासे मिलेके मन कै रहा है, मगर ई हाली में कहंवा निकलें, कइसे उजियाला का फेसिन करें?

तोहरी दुखियारी, तुमरे जलम-जलम की सहेली,
बेबी कुमारी राय

2 comments:

  1. तो क्या दुखियारी बेबी सकीना से मिल पाएगी?क्या उसके अबार्शन की खबरे वाकई झूठी हैं ? जानने के लिए पढें ? अगला अंक -

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  2. अरे..बड़े भी कभी छोटों से क्षमा माँगते हैं..मैं तो आपकी कल्पनाशीलता पर हैरान थी...

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