Friday, November 23, 2007

ई इतना बड़ अनर्थ कइसे हो गया, सखी?..

रामजीत राय का रत्‍न खोयी बेबी कुमारी राय को सखी सकीना का पत्र..

हमरे अंधारे जीवन की एवलेडी टार्चलाईट, हरीयर सुगनी, चंदा की रोशनी! जुग-जुग जीओ. दूध नहाओ, पेटो फलो! लेकिन ई सब का सुन रहे हैं, बेबी? और सुनके कुच्‍छो नीमन नहीं लग रहा है, सच्‍चो में!.. ई कवनो बात हुआ, जी? ख़ुदा अपना से लग्‍गल फैमिली का संगे कभी अइसा करते हैं, सुने है कोई? हम तो नहिंये सुने हैं!..

मगर ई सब हुआ कइसे, बेबी सुगनी? दस रुपिय्या खरच कै जीतपुर का पोस्‍टआफिस पे हमरे नाम कोई चिट्ठी आईल है कि नहीं, चेकिन बास्‍ते गए रहे, ई धूप-घामा में देह का कितना गजन हुआ, तोको का बोलें, सखी, और हुआं चहुंपके पता चलल कि चिट्ठी त् नहींये आयल है, मगर मुश्तकिन के साथी भेंटा गये, उनहीं से तोहरे बाबत खबर पता चला! सुनके पहिले हमको त् यकीने नहीं हुआ, दांत का बीच जीभ दबा लिये, एक्‍सीटेंट और बिलिडिंग से कवनो तरह बच गए, ख़ैरीयत समझो.. लेकिन तू कैसी सखी है, बेबी? कि हमको इतना बड़का ख़बर मुश्‍तकिन का साथी बताये और तू एक अंतरदेसी भेजके नहीं बता सकती थी? काहे, बेबी, बोल न? हम जनाना लोग आपस का दुख आपसे में नहीं बांटेंगे त् ई ज़हान में कवन हमरा लोग का सुनवाई करेवाला है, बेबिया, बोल ना? मगर ई एत्‍ता बड़ा बात हो कइसे गया? तू त् गदबद, करेजा का मजबूत छौंड़ी है, रे? तब? तीने महीना में अबाल्‍शन कइसे हो गया? पेरगनेंसी का काम्पिलिटेशन का किस्‍सा पहिलहुं सुने हैं मगर अइसा कवनो केस तो हमरा नज़र से नहीं गुजरा कि मम्‍मी का हेल्‍थ, डेअलपमेंट सही है और बिगनिंग इस्‍टेज में बच्‍चा गड़बड़ा जाये? ऊ रामजी भइया, प्रापर डाकदर-नर्स चेकिन-फिटिंग नहीं देख रहे थे, का हो? एतना बड़का मिसचांस, मिसकैरी हो कइसे गया, हमरा तो अक़ले नहीं काम कर रहा?..

का बोलती है, हम तोहरा देखभाल बास्‍ते चल आवें? मगर इहंवा घर में भी तो खाना-पानी देखे खातिर केकरो रहे के दरकार है. ई भट्टावाला काम छोड़ दिहिन हैं और आजकल घरे में रहते हैं. फिर वही संझा-सकाली दारु का खेल! हमरा त् यहिये सब सोच-सोचके वजन गिर रहा है! डेलाइबर साहब का जाने कवन बात हुआ हियां झगड़ा कै के हैदराबाद चल गए है. दू महीना से हुवें पड़े हैं. ओको सोच-सोचके भी वजन डाऊन हो रहा है.. उन्‍हीं का चिट्ठी का मोह में त् हम पोस्‍टआफिस गए थे! दस दिन से कवनो खोज है न ख़बर.. और अब ऊपरी से तुमरा बैड निऊस.. एगो छोटा जिन्‍दगानी में जनाना कवनची-कवनची बरदाश्‍त करे, ख़ुदा?..

अपना खोज-खबर और देह का हाली का डिटेलिन में जल्‍दी से जल्‍दी ख़बर देना, सखी?

तोहरे ललकी टिकुली वाले दमकते मुखड़ा को मन में बसाये बइठी.. तोहरे सुनर हेल्‍थ का दुआ मांगती

तोहरी ज़ि‍न्‍दगानी की राज़दार,
सकीना

3 comments:

  1. चलिए कोई खबर त मिली.. अच्छी होती तो भला था.. पर का किजियेगा..

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  2. स्वास्थ्य केन्द्र मा कौनो डागदर-नरस रहता है जो हुआं चेकिन-फिटिन होगा . अउर ई तो अपना ही चेकिन-फिटिन में लगे रहते हैं . अम्मा को फोन किए रहे ऊ बोलीं रहीं राम जी सब ठीक करेंगे . राम जी कौनो और जच्चा में बिज़ी रहे होंगे , सो अइसा ठीक किए हैं राम जी हमको . तोहका का बतरावैं ओ सकिनिया रे . हम तो सबका भरोसा में मारे गए .

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  3. सकीना जी को बोलियेगा, एक आध चिट्ठी पत्री और लिख दिया करे. वैसे हम सहानुभूति न दिखाएँगे किसी से भी..

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