Sunday, December 9, 2007

हंसमुखलाल के दु:ख के कारुणिक चित्र..

आज हंसने और हंसानेवाले आदमी की स्‍वागत-संगत में दस-बारह बंबईया बिलागर इकट्ठा हुए. हालांकि बोधिसत्‍व बीच-बीच में चुटकुले सुनाने का न केवल बहाने खोजते रहे, बल्कि पाते भी रहे.. मगर चूंकि वहां मेरे जैसा लटके मुंह वाला व्‍यक्ति भी उपस्थित था, रहते-रहते समीर लाल के चेहरे पर भी मुर्दनी तैर जाती. हालांकि मेरे चेहरे के लटकने की, समीर लाल से मिलने की मजबूरी से अलग, अन्‍य वजहें भी थीं.. ख़ैर, अभी उन्‍हें यहां गिनाने का यह मौका नहीं है. फ़ि‍लहाल आप आज के लटके चेहरों और सहमी मुस्‍कराहटों के क्‍लोज़अप्‍स देखिए, वह किस्‍सा बाद में कभी..

पहले वह आदमी जिसकी वजह से यह सारा तमाशा हुआ. देखिए, पहुंचते ही हंसना शुरू कर दिया!



युनूस और अनीताजी हैरत में.. ऐसे भला कोई करता है.. बेबात हंसता है? सरेआम?..



अनिल सिंह और अभय भी सभ्‍यता के तकाज़े में चुप हैं.. अलबत्‍ता किसी भी क्षण हाथापाई हो सकती है!



मैंने कहा तस्‍वीर काली-सफ़ेद कर दूंगा, तब जाके हंसी उड़ी..



इस पर शशि सिंह मुझे घूरकर देखने लगे कि मेहमान का सारा ज़ि‍म्‍मा मेरा है, बिहारी होके हंसी उड़वाइएगा?



शशि फिर ज़मीन देखने लगे जबकि अनिता कुमार त्रासदी पर नज़र रखने की जगह, कैमरे पर नज़र रखे थीं. औरतों से और उम्‍मीद क्‍या जा सकती है?



युनूस मियां इस पर मुस्‍कराने लगे..



अनिल सिंह पोज़ देने..



और अभय दांत दिखाने..



विमल को सूझ नहीं रहा था कि अभी कोई चुटकुला सुनायें या गाना..



मैंने डांटकर कहा अबे, करूं तुमलोग की फ़ोटा काली-सफ़ेद?.. एकदम से दोनों पटरी पर आ गए..



पटरी पर बोधिसत्‍व नहीं आये, अलबत्‍ता आने की लगातार सोचते रहे..



विकास डर कर कैमरे की बजाय आसमान की ओर देखने लगा..



समीर लाल ने हर्ष त्‍याग हर्षवर्द्धन का सहारा लिया..



ओह.. कितना ड्रामा.. अभी आपका मन नहीं भरा तो नीचे रीड मोर पर क्लिक करें, अभी और हैं..


हारे हुए हंसमुख लाल..



फिर कैमरे की ओर देखतीं अनिता कुमार..



जाने कौन बात की फुदकन में चहके हुए शशि और विमल लाल..



मन ही मन अलबत्‍ता देखो, कइसे मुदित हैं.. ओह..



बेशर्मों और बेशर्मी का एक बेमिसाल क्षण..


16 comments:

  1. अपनी फोटू डालकर कुछ अइसा ही कारुणिक मर्म लिख देते तो बिलागरमीट का चित्रण सफ़ल होई जात और आपका चरित्र भी दुनिया के सामने आई जात !!अब रिपोर्ट पढने की तमन्ना है, ई नेक काम भी कै दें !!!

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  2. बड़ा ही तेज चैनल निकले भई...

    अच्छा तो मुंह लटकार यही कूल्ह कलाकारी कर रहे थे।
    रूटीन रपट की तुलना में ये अंदाज अच्छा लगा।

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  3. ये दिन भी देखने थे ब्लागिंग में! :)

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  4. बढ़ियाँ रहा आप का फोटो फी चर..

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  5. वाह जी, सबकी मुख-मुद्राओं को कैप्चर करके अच्छा कोलाज-सा बना दिया है।

    अब, इन चित्रों से टपकते भाव-बोध की व्याख्या भी तो सुना दीजिए।

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  6. पटाखा फोड़ने की आदत नहीं गयी आपकी । इस बार भी जब तक लोग तीली ढूंढ रहे थे आपने सुतलीबम चला ही दिया है । शुक्र है हमारी तस्‍वीर को काला सफेद नहीं किया ।

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  7. क्या बात है तस्वीरें तो अच्छी हैं ही उपर से उन पर आपके कमेंट्स, माशाअल्लाह!!

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  8. अज़दकी तेवर से जुदा अलग ही ज़ायके और फ्लेवर वाली पोस्ट। खुशनुमा रहा देखना, पढ़ना।
    महाराज, खुद की शक्ल को कोसने और उस कोसने को सही साबित करने वाली तस्वीर बदल बदल कर लगाने में बहुत आनंद आता है क्या ?

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  9. पहली बार मुझे अपना क्लोज-अप पसंद आया है. मान गया कि आप सचमुच के अच्छे तस्वीरदाँ हैं. :) बस एक आपकी तस्वीर ही रह गयी है.

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  10. @अजित भाई,
    हें हें हें.. बड़ अभद्रता कै रहे हैं?
    छेमा करेंगे.

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  11. विवरण का बेहतरीन अंदाज़

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  12. हम केमरे पर नहीं त्रासदी खड़ी करने वाले शख्स के चेहरे के भाव पढ़ रहे थे जिसके बोलने पर सब डरते हैं।

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  13. बेहतरीन अंदाज में तसवीरें प्रस्तुत की हैं आपने। क्या विमल भाई क्या ढ़ूढ़ कर कमीज निकाली है :)

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  14. गजबै है। पहली मुकालात थी आपसे हम इ नहीं समझे थे कि आप पहुड़े-पहुड़े ई सब कर रहे हैं। मौका नहीं मिल रहा है। औ, थोड़ा तकनीक में भी हम कमजोर हैं। पहला मौका मिलते ही आपका पहुड़ दर्शन सबको कराऊंगा। औ लग रहा है जरा फोटू कैप्शनवा कुछ आगे पीछे लग गया है। अद्भुत!

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  15. @हर्षवर्द्धन,
    एतना फोटू एक जगह चेंपेंगे तो रीटेन मटिरियल एने-ओने भागेगा नै, जी? एक से एक सब हद बतियाने वाला घुसा है, हद है!
    (वइसे इयो हो सकता है कि फोटू सम्‍हालने का चक्‍कर में थोड़ा लिखलका मटिरियल पोस्‍ट से बहरि फेंका गया हो..)

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  16. एतना सारा बिलागर लोगन का फाटुआ एकहुं जगा पे देखन का मउका पहिली बार मिली. जरा फोटूआ खेंचन वाले का भी तो दिखाय देयो साहेब. बतंगड़ वाले भैय्या भी पहुंचे रहे का?

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