Friday, December 14, 2007

थोड़ी तार्किकता, थोड़ी गप की चाशनी में आदत..

(खूंटे से बंधे खेलते, खड़कते भूपेन के लिए)

ग़लत धारणा है कि आदत अंगद का पांव है विकराल है गरीब की गरीबी है एक बार आकर फिर साथ नहीं छोड़ती. जो ऐसा कहते हैं उन्‍होंने आदत को जिया है, ज़िंदगी जीने से रह गए. सच पूछिये आदत सोलह साल के उमर की वह भूखी-भटकी हवस है जो ज़रा-सा धीरज और समझदार दुलार से बड़े आराम से पटरी पर लौट आती है. मध्‍यवर्ग का ऊलजुलूल पोपली नैतिकता का फलसफ़ा है जो ज़रा-सी बात पे हांकता है बेबात की कांखता है मगर आड़े वक़्त चार लात खाकर दुम दबाकर सबसे पहले भागता है. आदत हव्‍वा नहीं है. आदत के खौफ़ में मरने की ज़रूरत नहीं, बेचारी कमज़ोर, मासूम-सी सिगरेट की डंडी है उंगलियों में कांपती है, एक ज़िंदगी से ज़्यादा कहां कुछ मांगती है.

7 comments:

  1. आदत जब नशा बन गए तो खतरनाक है

    ReplyDelete
  2. सच पूछिये आदत सोलह साल के उमर की वह भूखी-भटकी हवस है जो ज़रा-सा धीरज और समझदार दुलार से बड़े आराम से पटरी पर लौट आती है.


    पूर्णतया सहमत हूँ आपसे और कितनी ही बार अपनी आँखौं से देखा है इसे पटरी पर आते हुए मेरी पोस्ट

    http://kanchanc.blogspot.com/2007/08/blog-post_27.html

    इसका छोटा सा उदाहरण है।

    ReplyDelete
  3. एक ज़िंदगी से ज़्यादा कहाँ कुछ और माँगती है ?

    ReplyDelete
  4. ज़िन्दगी फूलों में छिपी आग है,अपना शौक पूरा करने लगें तो जला भी डालती है,तो सच ही कहा गया है "सादा जीवन उच्च विचार".

    ReplyDelete
  5. और ये जओ आपने संगीत चढा रखा है,ये तो लग रहा है आग के इर्द गिर्द कुछ अलग किस्म की प्रजातियां,अपने संगीत में मस्त हैं,और यहां हम भी मस्त हुए जा रहे है, साथी ये भी एक नशा है इसके नशे के बारे में क्या कहेंगे आप।

    ReplyDelete
  6. आदत बोले तो जो आके दत(सट)जाए...
    भूपेन की क्या आदत है...

    ReplyDelete
  7. बेहतरीन पोस्ट

    ReplyDelete