Thursday, December 6, 2007

हाऊ यू डुईंग, फ्रेंड?..

किताबों की मीनार एक ख़ास एंगल में टिकी हुई हैं. ज़रा-सी उंगली लगी कि समूची मीनार भरभराकर गिर सकती है. मन में इस वेग से ख़्याल के आते ही आदमी बाहर निकली उंगली पीछे खींच लेता है. कॉरीडोर से कोई औरत गुजरी है. मुड़ी गर्दन के पलक झपकते में उसके वस्‍त्र, बालों और गाल की झलकी भर दिखी, हालांकि उसके सैंडल के आवाज़ अभी भी गायब नहीं हुए हैं. जैसे अस्‍पताल के भारी शीशे वाले दरवाज़े के पार मशीन व तारों में घिरे दानिश का हाल समझना असंभव था, लेकिन वह गायब नहीं हुआ था. आदमी के हाथ बरबस अपने सेल फ़ोन पर चले गए थे.. कि वह दानिश का नंबर घुमाकर पता कर ले वह सचमुच गायब हुआ है या नहीं.. दूर कहीं किसी मोटर या मशीन की आवाज़ आ रही थी. शहर में फिर कोई नया मशीनी तत्‍व जुड़ रहा होगा.. या हट रहा होगा?.. क्‍या आदमी शहर के बारे में कभी एक वाजिब, साबुत-सा निबन्‍ध लिख सकेगा? एवर? क्‍लीन एंड क्‍लीयर?

आसमान में हवाई जहाज नीची होती हुई ऊंची इमारतों के पीछे से गायब हो जाएगी.. हवाई जहाज के गायब हो जाने के बाद भी कुछ वक़्त तक उसकी आवाज़ बनी रहेगी.. आवाज़ के छोटे-छोटे टुकड़े आसमान से इमारतों की छत पर गिरेंगे. एक फकीर कहेगा मैं सब देख रहा हूं. एक बूढ़ी औरत शिकायत करेगी कि उसकी खराब दांतों का कोई इलाज नहीं करा रहा.

पर्कुलेटर में कॉफ़ी का उबाल आएगा. एक गौरेया बेमतलब खिड़की की मुंडेर पर आकर बेचैनी से दायें-बायें गर्दन हिलायेगी. टीवी पर मोनिका बेलुच्‍ची वाले विज्ञापन के बाद अफग़ानिस्‍तान के गरीब बच्‍चे दिखेंगे.

हिंदी का एक मूर्ख लड़का एक मूर्ख हिंदी पत्रिका के मूर्ख संपादक को ज़ि‍द में पत्र लिखेगा कि उसकी कविता के खिलाफ़ जो मूर्ख आलोचना पत्रिका के ताज़ा अंक में छपी है, उसमें कविता के वास्‍तविक मर्म को समझा नहीं गया है. पड़ोस के बरामदे में बाहर से आई एक कस्‍बाई लड़की की हंसी हिंदी के मूर्ख लड़के को उसकी मूर्खता में डिस्‍टैक्‍ट कर देगी.. मोहल्‍ले की गली में एक सब्‍जीवाला आवाज़ देगा.. बाजू के किसी घर में दीवार पर हथौड़े की ठकठकाहट बजने लगेगी..

दानिश के जीवन के अभी भी ढेरों उलझे वर्ष बचे होंगे..

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