Thursday, December 20, 2007

सादा जीवन उच्‍च विचार.. हू सेड सो? एंड व्‍हाई?

किस चिरकुट ने यह स्‍लोगन दिया था? माने देने के पहले भविष्‍य की एक तस्‍वीर तो बनायी होती, एक मर्तबा सोचा होता समाज में सादा जीवन कितना हास्‍यास्‍पद हो जायेगा? उच्‍च विचार तो देने के वक़्त भी रहा होगा. इस देश में हमेशा से रहा है. गरीब मुल्‍क में लोगों के हाई प्रोटिन के नारे से एक्‍साईट होने की बात समझ में आती है लेकिन हाई थॉट की बात से एक्‍साईट होंगे? क्‍यों होंगे, भाई? हाई थॉट को खाकर देह में प्रॉटिन आयेगी? जिस किसी भले (या बुरे, जैसी भी नीयत का) आदमी ने उछाला था, स्‍लोगन उछालने के पहले इन संभावनाओं पर विचार किया था? किसी थिंक टैंक की राय ली थी, ऐड एजेंसी की सर्वे और पॉलिंग का सहारा लिया था दैट वन इज़ पिचिंग द राईट स्‍टफ इन राईट डायरेक्‍शन? मुझे नहीं लगता. आपको भी नहीं लगता होगा. किसी उल्‍लू को ही आज सादा जीवन की बात चुपचाप कफ़ सिरप की तरह पिलाई जा सकती है. वह पी भी लेगा बिकॉज़ दैट्स व्‍हाई ही हैपेंस टू बी ए उल्‍लू! उल्‍लू बसते भले पेड़ पर हों चलते भेड़ की चाल हैं. भेड़ की चाल चलेंगे और सादा जीवन के ख़तरनाक़ गड्ढों को देखने से रह जायेंगे. वर्ना आज दस तरह के लोनों से घिरा हुआ, नाक और अपनी नज़रों तक में गिरा हुआ कौन आदमी है जो पैरेलली सादा जीवन के गड्ढे में गिरने के अरमान रखता हो? उच्‍च विचार की तो मत ही पूछिये. उच्‍च विचार रखकर वह इस पॉलिसी और उस स्‍कीम का क्‍या करेगा? ये पॉलिसी और वो स्‍कीम क्‍या करेंगी? सोसायटी की बिल्डिंग का सिक्‍योरिटी गार्ड भी बिविल्‍डरमेंट के अटके लिफ्ट में उलझ जायेगा. आप ज़्यादा सादा जीवन का नमूना बनने की कोशिश करें तो हो सकता है आपको बिल्डिंग में अंदर आने घुसने से रोक दे!


सादा जीवन उच्‍च विचार. व्‍हॉट ए न्‍युसेंस. अबॅव ऑल ए बिग नॉनसेंस! किस दुनिया में रहकर लोगों को ऐसे खुराफातों का ख़्याल आता था? किसी दुनिया में रहते भी थे या नहीं? सादा शादी तक के आईडिया से तो लोग आज अफ़्फ़ और आह् करने लगें और यहां पूरे जीवन के ही सादा होने का प्रस्‍ताव रखा जा रहा है! एज़ इफ यू विल से एंड वी विल एक्‍सेप्‍ट एंड अप्रीसियेट इट! ओह, जस्‍ट शट्अप. सादा व्‍हॉट? एंड सादा व्‍हॉई?

गिव अस उच्‍च जीवन एंड सादा विचार. दैट मेक्‍स मोर सेंस. फॉर टाईम बीइंग एट लिस्‍ट. कौन जानता है. हो सकता है कल को सादा विचार को भी लात लगाने की इच्‍छा जोर मारने लगे?

2 comments:

  1. मुझे भी यह नारा मुटमर्दी का ही लगता है- उन्हीं लोगों के लिए, उन्हीं के द्वारा दिया हुआ, जिनके लिए सादा जीवन का विचार ऑप्शनल हो और जो फुरसत में बैठकर उच्च विचार का आनंद ले सकें। सारे हरामीपने के बावजूद अभी का जीवन उतना पाखंडपूर्ण नहीं रह गया है।

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  2. सादा शादी तक के आईडिया से तो लोग आज अफ़्फ़ और आह् करने लगें और यहां पूरे जीवन के ही सादा होने का प्रस्‍ताव रखा जा रहा है!

    जय हो! :)

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