चश्मे का शीशा साफ करने के बाद यह पता चला कि नीली आंखों वाली सवाल का मीठा कंकड़ मुझ पर नहीं अविनाश पर फेंक रही थी, लाड़-दुलार की पिचकारी एक फिल्म में अभिनय करवाने के लिए ही नहीं चल सकती. अविनाश अविनाश ही है कोई जॉनी डेप या लियोनार्दो नहीं. चश्मा एक बार और साफ करने पर यह भी दिखा कि नीली आंखों वाली दरअसल मुझे देख ही नहीं रही. जैसे टैक्सी में मैं होऊं ही नहीं, सिर्फ अविनाश का सांवलापन और उसके चमकते सफेद दांत हों! मेरे साथ करती, अनुभवी हूं ठीक था, मगर मेरे सामने अविनाश के साथ ऐसी नंगई कर रही थी मुझे लड़की की बदचलनी पर बड़ा गुस्सा आने लगा. अविनाश पर भी आया कि वह दांपत्य की महिला और प्रेम में समर्पण जैसे विषयों पर महिलाओं की प्रगतिशील पत्रिकाओं में हर तीसरे महीने एक लेख लिखता रहा है और आज वास्तविक जीवन में उतारने का मौका आया तो इंटर फेल रामाधीन भैया के लाईन पर बेहयाई और व्यभिचार की मिसाल बना जा रहा है! इस सुलगती तीली पर जल्दी ही अगर लोटा भर जल गिराया न गया तो शायद थोड़ी देर में यह रूपसी टैक्सी की छत पर आज फिर जीने की तमन्ना और मरने का इरादा है वाला गाना गाती दिखने लगें.चश्मा उतार कर (कि रूप प्रस्ताव के आड़े न आए) मैंने रूपसी को खालिस भोजपुरी में फींचना शुरू किया क्यों ईरान का नाम खराब कर रही हो, बहिनी. हमारे विजिट का पर्पस सांसकृतिक ही है लेकिन वह संस्कृति नहीं जिधर तुम हमें (माने अविनाश को) खिंचे लिए जा रही हो.
लड़की ही नहीं अविनाश मियां भी मुझे सुनने से परहेज कर रहे थे. थोड़ी देर तक गंभीरता से फ्रेंच में लड़की की खुसुर-पुसुर सुनते रहे, और फिर अपने ही नहीं मेरे भाग्य का भी फ़ैसला कर लिया. नीली आंखों वाली शैतान की खाला के फोन पर मिन्टों में एक पुरानी पिटी हुई ‘रेनॉ’ और उसे चला रहा बाईस-तेईस साल के लंबे चेहरे वाला एक हिंदी अनुवादक नौजवान मेरी सेवा में आ गया, और मुझको बहिरिया कर अविनाश से अभिनय और जाने क्या-क्या करवाने खाला जान टैक्सी में बैठकर उसके साथ फुर्र हो गईं. गुस्सा तो मुझे बहुत आ रहा था. लड़की पर नहीं, नशीली मुस्कानों से अलग बुरके की वजह से उसे अभी ठीक से देखा भी कहां था, अविनाश पर आ रहा था, बावजूद इसके आ रहा था कि इस तरह की हरमज़दगी उसने पहली मर्तबा नहीं की थी (बिना पर्याप्त नोटिस और हमारी मानसिक तैयारी के फुर्र हो जाने की). मगर परदेस में बीच सड़क पर गुस्सा करके हम क्या उखाड़ने वाले थे. चुपचाप रेनॉ के कोमलांगी ड्राईवर की बाजूवाली सीट पर धंस गए. लंबे चेहरे वाले लौंडे से कहा- हम समझते थे हमारे यहां ही लीला होती है, पर तुम लोग तो, बेटा, दो कदम आगे चल रहे हो!
***
- बाहर दुनिया समझती है ईरान में जनाना पर बंदिश है, औरतें घुट-घुटकर सांसें ले रही हैं लेकिन हम तो स्वच्छंदता की सुहानी बयार बहता देख रहे हैं, आं.. क्यों?- नीले चेक के खुले बटनों वाले सूती शर्ट के अंदर सफेद टी-शर्ट पहने नौजवान गाईड की पीठ में मैंने तर्जनी दबाते हुए कहा.
लड़के ने अपनी काली आंखें फैलाकर, अपने महीन, कोमल होंठों को थोड़ा खोलकर मेरी तरफ देखा.
- क्यों?.. आपको अच्छा नहीं लग रहा?- अंदर ही अंदर कुछ सोचने के बाद लड़के ने जवाब दिया. जैसे मेरे पिछड़े नज़रिये
और आनेवाले मिनटों में व्यक्त दकियानुसी विचारों की संभावना से अभी से असहमति की दूरी तान रहा हो, एक सिगरेट निकालकर अपने महीन होंठों के बीच दाब लिया और सुलगाकर रेनॉ की दीवारों के दरमियान धुंआ इकट्ठा करने लगा.
- नहीं, बेटा (रिश्ता नहीं, श्रीलाल शुक्लीय अधिकार जतानेवाला संबोधन), अच्छा कैसे नहीं लगेगा! अच्छा तो खूब लग रहा है.. पिक्चर की ऐसी शूटिंग रोज़-रोज़ देखने को कहां मिलती है? ऐसा है, लालमोहन, कल्चरल टुअर का काम फिर कभी के लिए मुल्तवी करते हैं, तुम तो हमें फिल्म के सेट पर ही लिये चलो! आखिर क्या है कि आपकी डायरेक्टर साहिबा..?
- मासुमेह मोहामदी. डायरेक्टर का नाम.- लड़के ने हमें हमारी अटक से बाहर निकाला.
- हां, हम ज़रा देखना चाहते हैं आपकी मासुमेह मोहतरमा क्या-क्या रंग निकलवा रही हैं अपने अविनाश लाल से?
जैसे आसमान का चांद मांगने जैसी मैंने कोई असंभव इच्छा प्रकट कर दी हो, लड़के ने पैर एकदम-से ब्रेक पर दाबा, और सड़क के एक किनारे ले जाकर रेनॉ रोक दी. खिड़की से बाहर सिगरेट फेंककर मुझे ऐसे देखने लगा जैसे भावुक भारतीय माताएं पंद्रह साल के बेटे के दराज में कंडोम का पैकेट पाकर दीवार, कैलेंडर, पुराने अलबम देखने के बाद हैरत से खुद को आईने में देखने लगती हैं. उत्तेजित होकर लड़का कार से उतर गया. अपने छोटे-छोटे महीन बालों में हाथ फेरता सोचता रहा, फिर उसी उत्तेजना में लौटकर मेरी खिड़की पर आया.- यानी आपको ख़बर नहीं है? मासुमेह मिस्टर दास को किसी शूटिंग पर लेकर नहीं गई!
- अच्छा..?- मैंने चौंकने का नाटक किया, तब म्यूजियम घुमाने गई है?.. रोम-रोम में एकदम-से आग लग गई. हमारा शक हवाई नहीं था! पड़ोस में रंगरेलियां मनाई जा रही है, बस हमीं को रस से बहिष्कृत किया गया है! जिंदगी हमारे साथ ही क्यों इस तरह के गंदे मज़ाक खेलती है?
- ईरानी फिल्मों का आपको शौक है. सब यही सोच रहे थे कि आपके बल देने से मिस्टर दास तेहरान आए. हमें भी मिस्टर दास के आने के बारे में सीधे ख़बर नहीं मिली. पहले बांग्लादेश से मैसेज आया, फिर फिनलैंड से किसी ने फोन करके कन्फर्म किया. यहां सिर्फ इतना जानते थे कि तेहरान कब आ रहे हैं. उसी हिसाब से प्लैनिंग हुई. मासुमेह एक्सपीरियेंस्ड है इसलिए एक्चुअल किडनैपिंग का काम उसी को सौंपा गया.. वापस सिगरेट जलाकर लड़का इस तरह इन्फॉर्मेशन दे रहा था मानो तेहरान में बाटा के बड़े स्टोर तक पहुंचने का रास्ता एक्सप्लेन कर रहा हो.
मैं बेचैन होने लगा. इच्छा हुई लड़के के होंठों से खींचकर मैं भी सिगरेट के दो कश ले लूं. बेचैनी में ही सवाल किया- तुम्हारी वो नीली आंखों वाली.. वो किडनैपर है? अविनाश को किडनैप किया गया है.. क्यों?
- इसलिए कि एशिया रीजन के रजिस्टर्ड सभी ब्लॉग्स का कंट्रोल मिस्टर दास के अंडर है! सारी सेंसरिंग, सीज़र और सप्रेशन मिस्टर दास के कमांड पर होता है. और ईरान में मूवमेंट फॉर डेमोक्रेसी की हमारी लड़ाई का तब तक कोई मतलब नहीं जब तक हम अपने ब्लॉग्स को फ्री न करवा लें! और मिस्टर दास को इसके लिए तैयार करने के तरीके मासुमेह जानती है. वो बहुत सिजंड फाईटर है.. मासुमेह के ग्रुप से मामला हैंडल नहीं हुआ तो मिस्टर दास को इटली ब्रिगाता रोस्सा के पुराने पके हुए मेंबरान के हवाले किया जाएगा.
मैं कन्फ्यूज़ हो रहा था. और पहली बार नहीं हो रहा था. यह लड़का या तो गलत नाटक के डायलॉग बोल रहा है या फिर मैं परले दरजे का चूतिया हूं. अविनाश लाल समूचे एशिया का ब्लॉग्स दाबे हुए हैं और हमको भनक तक नहीं? यार, आदमी आज किस पर भरोसा करे. एक सिंगल व्यक्ति.. नाम बताईये जिस पर भरोसा करें? अभय तक ने यह बात हमारे आगे नहीं खोली! अच्छा हुआ साले को उड़ाकर ले गए. हाथ-पैर के नाखून उखाड़ेंगे, कनपटी पर बिजली का नंगा तार लगेगा तब अकल खुलेगी. मज़ा करो, ससुर! लेकिन मुक्ता सामने पड़ गई तो उसको अपनराम क्या जवाब देंगे?.. कोई ज़रूरत नहीं किसी को जवाब देने की. हमारे सामने फुल पैंट पहनना सीखनेवाला अविनाश दास जब इतना उड़वैया साबित हो रहा है तो मुक्ता रानी कौन दूध की धुली निकलने वाली हैं!आवाज़ को संयत रखने की कोशिश करता मैं बोला- वो तो उसकी करनी थी, किडनैपिंग के गड्ढे में गया, हमारा अब क्या हाल करने का विचार है?
शायद मेरे चेहरे का उजबकपना होगा, लड़का खुलकर हंसने लगा. पतले महीन होंठों के अंदर अनार-से छोटे-छोटे दांत. बोला- मैं आपको एक बहुत ही खास जगह दिखानेवाली हूं!
- वाली हूं?.. कार की सीट पर बैठा हुआ था, थोड़ा उठ गया- तुम.. तुम्हारा.. तुम्हारा नाम क्या है?
रेहाने सबूरी. टेंशन मत लीजिये, आप ही नहीं और भी बहुत से लोग देखकर मुझे लड़का समझते हैं- लड़कानुमा लड़की ने सिगरेट के कुछ और कश लिये, इतमिनान से कार के अंदर आई, व्हील के पीछे बैठकर बैक व्यू एडजस्ट करने लगी. नीले चेक वाला उसका शर्ट थोड़ा-थोड़ा मुझे छू रहा था, या फिर सिर्फ वहम था मेरा. लेकिन अपनी जगह बैठा कांप रहा था वह कत्तई वहम नहीं था.
टेंशन तो मैंने ले लिया था. कुछ ज्यादा ही ले रहा था. छोटे महीन बालों और बड़ी-बड़ी काली आंखों वाली ऐसी हसीन लड़की ज़माने से नहीं देखी थी. अब देखने को सामने थी तो उसके चेहरे से नज़र हटाने के ख्याल से तकलीफ हो रही थी.
रेहाने ने मुस्कराकर कहा- इस तरह देखियेगा तो हमारे बीच बातचीत में मुश्किल हो जाएगी!
मैंने मुस्कराने और रोने के बीच वाले किसी एक्सप्रेशन से उसे देखा. बातचीत में मुश्किल वैसे भी हो गई. क्योंकि हमारी कार के ठीक पीछे सड़क पर अचानक गोलियां दगने लगी थीं.
(जारी...)































