कुछ और नहीं तो आपने 'घरौंदा' फ़िल्म का वह गाना तो सुना ही होगा, 'तुम्हें हो ना हो, हमको तो, इतना यकीं है, हमें प्यार, तुमसे नहीं है, नहीं है..' मन में मीठी टीस उठाती किसके बारे में सोचते हुए सुना था? ख़ैर, मीठी टीस और जाने क्या-क्या जगानेवाली इन रुना लैला को कल हमने साक्षात सुना. धन्य हुए. काला ब्लाऊज और भारी काली साड़ी में भारी चकमक का काम सहेजते हुए रुना थक रही थीं.. देखते हुए हमारा दिल टूट रहा था कि देखो, उम्र ने कैसा भारी बना दिया है! (हमको नहीं बनाया है? मगर उससे तबियत के महीन हल्केपन कोई छिन गए हैं?).. रुना के भी नहीं छिने हैं.. स्वर की मिठास और लोच देह के दु:ख भुलवाकर जल्दी ही मीठी तीर छोड़ने लगती है. कल रात ज़हर घुले ऐसे ढेरों मीठे तीर छुटते रहे, मैं रिसीव कर-करके घायल होता रहा. सिरी फोर्ट के मुख्य सभागार के ठंसे हॉल में काफी बूढ़े थे जो इन तीरों के असर में लचकीले होते रहे. जवान अकेला शायद मैं ही था.इंडियन वीमेंस प्रेस कोर्प्स और आईसीसीआर के सौजन्य से आयोजित इस संध्या में बांग्लादेश से रुना, पाकिस्तान से ताहिरा सैयद, और अपने यहां से रीता गांगुली की तिकड़ी गा रही थी. सबसे पहले ताहिरा, तीन कुशन्स पर शराफ़त से माईक के सामने बैठीं, शराफ़त से कुछ कम तो कुछ अच्छा मीठा-मीठा गाती रहीं. उनके बाद फिरोजी छटा में खूब बनी-ठनी रीता आईं तो 'गगरी उतार..' का ऊंचा गुहार लगाती ऑडियेंस के साथ संबंध बनाने की एक कोशिश की उन्होंने. आखिर में तामे-झामेवाले ऑर्केस्ट्रल इंट्रोडक्शन के साथ रुना आईं और आते ही कुल्हे पर थाप लगाती स्टेज पर टहलने लगीं, मंच से उतरकर अपने साथ नाचने के लिए किसी लड़की को मंच पर लिवा ले गईं. जितना सपरता रहा, दर्शकदीर्घा में एनर्जी इंन्फ़्यूज़ करने की कोशिश करती रहीं, लेकिन 'दमादम मस्त कलन्दर..' की बार-बार गुहार लगानेवाले चिरकुट जोश से ताली बजाने में फेल होते हुए अपनी रुना का दिल तोड़ते रहे.. अभी कार्यक्रम खत्म भी नहीं हुआ था और भाईलोग भेड़ों की मानिन्द एक्जि़ट की ओर ऐसे लपके मानो स्कूल की छुटटी का घंटा बज गया हो! हद है. किस चीज़ में हम कभी सभ्य होंगे? एक सीधा-सादा म्यूज़िकल शो तक सीधे-सादे तरीके से देखने की हमें तमीज़ नहीं? किस तरह की सभ्यता हैं हम? सिर्फ़ चिकन के कुर्ते और जवाहर कट जैकेट की रंगीनियां सजाना सीख लिया है? महफ़िल में बैठने की तो नहीं ही सीखी है..
रुना, तुम बुरा मत मानना. मैं अभी भी तुम्हारे इश्क में घायल हूं. अगली बार हिन्दुस्तान आओगी तो इसी तरह पलक-पांवड़े बिछा तुम्हारी राह तकता बैठा मिलूंगा..











