Tuesday, January 8, 2008

गुरु, एनीवन फॉर गुरु?..

कल भयग्रस्‍तता की बात की थी, देखिए, कुछेक घंटों में कितना भय भरा-भरा, मरा महसूस कर रहा हूं. मेरी ही तरह तीक्ष्‍ण-तीव्र संवेदनाओं के असर में आप भी रहते होते तो अब तक आप भी महसूस करते होते. बहुत कुछ. तुच्‍छता व बेगानेपन का कैसा ऊलजलूल गाना तो गुनगुना ही रहे होते (मन्‍ना डे और सबुरी व बहरी बेग़मोंवाला नहीं जिसे मनीष और युनूस हर आठवें ऑरिजनल गाना बता-बताके ठेलते रहते हैं.. और इस ठिलवाये जाने पर, स्‍वभावत: आदमी, व मैं, भयग्रस्‍त हो ही जाते हैं).. मगर अभी आपके दूसरी तरह के गायन की बात कर रहा था.. वह जिसे मन के भीतर उठाते हुए आवाज़ नहीं आंसू फूटते हैं.. आखिर अज्ञान का कुछ तो धिक्‍कारभाव मन में बनेगा, उठेगा. मनुष्‍य हुए तो उठेगा ही.. कि शर्म की सहज मनुष्‍यता से आप ऊपर उठे गए हैं? (हमारे उन और इन मानवरत्‍न परिचितों की तरह- अब नाम बुलवाकर लात मत खिलवाइए?)..

तो क्‍या कह रहा था? हां. माने आपने ‘समय का संक्षिप्‍त इतिहास’ या स्‍टीफ़न हॉकिंग का ‘द यूनिवर्स इन अ नटसेल’ कब पढ़ा था? कि मेरी तरह उसके चंद्रभूषण द्वारा अनुदित होकर हाथ में आने की राह तकते निर्द्वंद्व, किंतु ज्ञान के भारी अंधेरे में बैठे पड़े थे? या गिरे कहना सही होगा? ओह, आपका अपना खुद का रचा काला गड्ढा मतलब ब्‍लैक होल? गिरे रहे कुंए के मेंढक बने रहे? सो शेमफुल? बिग बैंग की जानकारी नहीं थी? कि थी? ऑनेस्‍टली? कितनी क्‍या जानकारी थी? और थी तो मुझे व दूसरों को बताने की आपने ज़रा भी गरज नहीं महसूस की? हमारे यहां स्‍कूलों में तो जो शिक्षा होती है होती है, समाज के बाहरी (माने हमारे चालीस लोगों के अंतरजालीय शिक्षा के आदान-प्रदान का भी आपने स्‍तर उन्‍नत करने की चेष्‍टा नहीं की? यही मन्‍ना डे वाला स्‍तर बनाये रखना चाहते थे? बनाये रखेंगे?..

ख़ैर, ज़्यादा मत बहकिये, प्‍वायंट पर लौटते हैं. माने मैं तो लौटता ही हूं.. बिग बैग के बारे में आपकी राय क्‍या है? या गुजरात पर तो नहीं ही थी इस पर भी नहीं है? सिंगुलैरिटी, टाईम का इलेवेंथ डायमेंशन? स्ट्रिंग थियरी? एटम, मैटर, मौलेक्‍यूल? फ़ि‍जिक्‍स के प्रकार? थियरी ऑफ रिलेटिविटी, क्‍वांटम? पैरेलल यूनिवर्स? नथिंग? टोटल इल्‍लै? ओह, आप कुछ नहीं जानते? मेरी ही तरह सप्‍लीमेंटरी और कंपार्टमेंटल वाले स्‍टूडेंट रहे हैं?..

व्‍हाट अ डिप्रैसिंग वे टू बिगन द बिगनिंग. ऑर मार्निंग. मगर कौन जानता है? किस विज्ञानी ज्ञानी को गुरु बनाया जाये?

2 comments:

  1. गुड़ का नाम लेने से मुँह मीठा हो जाता है क्या?

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  2. "टाईम का इलेवेंथ डायमेंशन? स्ट्रिंग थियरी? एटम, मैटर, मौलेक्‍यूल? फ़ि‍जिक्‍स के प्रकार? थियरी ऑफ रिलेटिविटी, क्‍वांटम? पैरेलल यूनिवर्स? नथिंग?"'………….… ये सब आखिर है क्या?………आज पूर्णरूपेण भयग्रस्त हुए हम

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