Wednesday, February 13, 2008

अच्‍छा और ठीक..

फजलू भैया के नश्‍के दम पे सोचे ठीक है पल्‍टन जाइन कर लेंगे. हमारी हैट को लेके हुआं सब हल्‍ला-टल्‍ला किये तो रेलवे की डिरेबरी जिंदाबाद. मेहताब को बताये तो मुंड़ी हिलाके बोली अच्‍छा? हम रस्‍ता-बेरस्‍ता ठीक सोचके मुस्कियाके रहे. महीनों फारम आफिस के आगे चक्‍कर लगाये. किस-किसको चाय पिलायी, बी‍ड़ि‍यां सुलगायीं. रात को सपने में ऊपरवाला अच्‍छा है बोलके दुआ देता, हम ठीक है करके लेते उसके बाद बड़ी अच्‍छी नींद लग जाती. मच्‍छर फिर एकदम लगते ही नहीं. फिर जाने कौन बात हुई कि सल्‍लू की सास मरीं या कि पुराने मकान का छत गिर पड़ा था. हस्‍पताल के चक्‍कर-सक्‍कर के मामले पैदा हुई गए. मामू ने कहा बेटा तोहे दुकान संभाले का होगा, हमने कहा अच्‍छा? इस तरह पल्‍टन वाली बात रह गयी और हमारे कंधे पे आ गई जुनैब वाली सइकिल की दुकान. रेलवे की डिरेबरी का सपना अभी कंधे पे था ही, हमने सोचा चार-छह महीने निकल जायें, जनाना जो हैं घर संभाल लें तो हम ठाठ से लौटेंगे पुरानी जगह. पर भैया साइकिलों के पीछे वो चकरघिन्‍नी हुए कि हमने सोचा चलो, यह भी ठीक और उसी दरमियान जाने कैसे तो हमारा व्‍याह निपट गया.

मझली चाची ने सवाल किया था कि सैदू बाबू अब्‍ब तुम बड़े भये तो हम बोले अच्‍छा? नन्‍हकू की छोटी बहन से शादी हो गई तो हमने तय किया कि ठीक. दुकान पे जाने कौन किसकी बतकही पे मारपीट हो गई. फूफा के हाथ पे डंडा पड़ा था और हमारा तो कपार फूटा था. बंटो की आंख में किसी हरामी ने चेन खींचकर मारा था, तो हम सारे लोगों की थाने में बुलाहट भई. फूफा को अंदर बुलाके कहा गया दस हजार पे बात छुटेगी तो पहले तो वो बेचारे घबराये. अच्‍छा? बोले बाद में रोने लगे. उसी में कब तो जावेद की खाला ने आके खबर की कि तैं बाप बने वाले हो. हम बोले ठीक फिर तीन दिन की सज़ा काटके बाहर निकले. दुकान जाने कौन हरामी रात ही को फूंक जला दिया था. अच्‍छा? खबर सुनके तो हवालात में ही हम फूफा से बोले मगर दुकनिया के आगे काले भंगार के सामने खड़े होके मन ही मन बड़ी तकलीफ हुई. फिर सोचा ठीक है कुछ दिन होटल की नौकरी कर लेंगे. फिर नन्‍हकू ने कहा होटल में कमाई कहां है तो हमने कहा अच्‍छा? नन्‍हकू कहने लगा दीपक टाकी के आगे टिकट बेचने में कमाई है तो हमने कहा ठीक. खूब टिकटें निकालीं हमने. सनीमा भी देखा. यार-दोस्‍तों को भी दिखायी.

एक मोटर पाट वाले सरदारजी थे उनसे खूब पहचान हो गई. कहते तू फिकर न कर, मैं तौंको लुधियाने में सेट कर दूंगा. हम सोचे अच्‍छा? फिर जनाना के पैर में फोड़ी थी जाने क्‍या निकला था कि फिर हस्‍पताल और खरचेवाली नौबत आ गई तो हमने कहा ठीक. सुई का असर था या मिलावट वाली दवा थी बेचारी औरत खड़े-खड़े बेहोश हो गई तो नन्‍हकू और दूसरों के साथ हमारा भी पारा गरम हो गया. हस्‍पताल वाले समझाते रहे वैसी बात नहीं जैसी आपलोग समझ रहे हो हमने कहा अच्‍छा? उनने कहा ठीक. मगर नन्‍हकू का वैसे भी मेरठवाले धंधे में नुकसान हुआ था तो वो तो उखड़ा था ही और हमने भी जाने पी रखी थी या क्‍या था सो फैलके बोले अच्‍छा? फिर हस्‍पताल में वो तोड़फोड़ की. खूब पीटा सालों को. फिर जाने क्‍या-क्‍या हुआ ठुल्‍ले आ गए फौजदारी का मामला बन गया हमने कहा अच्‍छा? थानेदार शरीफ आदमी था समझाता रहा ऐसे वाकयात हो जाते हैं. नन्‍हकू ने कहा अच्‍छा? मतलब थानेदार के साथ भी अच्‍छी गाली-गलौच की. मुझे थाने ले गए जबकि नन्‍हकू उनके हाथ चढ़ा नहीं फिर हमने भी कहा ठीक. वहीं खबर हुई कि नन्‍हकू की बहन गुजर गई तो हैरत में हम परेशान हुए कि अच्‍छा? लेकिन थाने के अंदर रहके अब क्‍या किया जा सकता था तो हमने सोचा इतना सोचके काहे माथा फोड़ना. फूफा बोले ठीक..

7 comments:

  1. ये तो अच्छा और ठीक नहीं बहुत ठीक है । ठीक ?

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  2. फूफा बोले ठीक है तो ननकू ने बाईं ओर बैठे नाई को देखा और उसके मुँह से निकला "ठीक है".

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  3. का गजब है---पढ़ो इहां…आबाज सुनायी दै हूआं केरी…ठीके है

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  4. 'अच्छा ?'

    यह अच्छा डरा देता है . भीतर कुछ टूटने लगता है .बेचैन कर देता है . काहे का अच्छा . बहुत भांय-भांय करता है यह अच्छा .

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  5. अच्छा और ठीक?
    जाने क्या होती है ज़िन्दगी...?

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  6. अच्छा. नाम अच्छा है. आप कोसिस करें तो इस नाम का एक ठो सलीमा हमहु देख पाएंगे. सलीम लंगड़े के बाद नन्हकू का सलीमा. आपसे सीरियसली बोलते हैं.

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