Friday, February 15, 2008

व्‍हॉट ए मॉर्निंग..

उठ गया. जम्‍हाई-टम्‍हाई. पैर-वैर पटक लिये. सिर नहीं पटका. बाद में पटकूंगा.. परदे खींच लिए. ब्‍लागवाणी देखा. चिट्ठाजगत. अच्‍छा? हूं. जानेवाले सिपाही से पूछो. क्‍या पूछें? एक खड़ा सिपाही दु:खी हो तो रहा है! फेल होने के फायदे लिख लिये. चरणों में बैठकर जीवन का कैसे उत्‍सव मना लें का महती ज्ञान लिया. झूमते मस्‍त महीने के मौसम से भी लबरेज हुए. उसके बाद? फिर किधर देखूं? उधर जिधर फरवरी की उतरती हवाओं की नहायी धूप है? भई, कोई चाय पिलायेगा? वो दूसरी वाली हवाई चप्‍पल किधर है? और पर्स में इतने ही पैसे थे? फिर कितने थे? पड़े-पड़े ससुर रात में खुदे पैदा हो जायेंगे?.. ठीक है, ठीक है, उखड़ने की बात नहीं है! बात तो बहुत सारी है लेकिन उखड़कर बाबू कुछ उखड़ने वाला नहीं है. चार बेल पत्‍ते और डेढ़ रुपये का बताशा दिन शुरू करो, बया की तरह घोंसले में कर्मलीन रहो. इज़ इट आस्किंग टू मच? नो, इट्स नॉट, सो जस्‍ट बी हैप्‍पी विद् इट, गेट गोइंग, इडियट..

ओके. ऑल राइट. दिन की सक्रिय सजावट का भूगोल क्‍या है? कहां, किधर, कैसे? फ़ोन करने हैं? फट से कहीं भागना है? सेटियाना- सेटियाना किसको है? पटाना? कहीं जी लगाना? कहीं गोड़ धंसाना है कि थॉट मशीन एक्टिवेट करनी है? आगे-पीछे कुछ दिख रहा है, कि अभय की बकलोल भूलकर फिर कविता का कैलेंडर बुनने लगें? कि नहीं, जानेवाले सिपाही से ही पूछें? क्‍या-क्‍या पूछेंगे? और क्‍या नहीं पूछेंगे?..

धत्, कुछ मतलब है इसका? फिर किसका मतलब है? विजिटर कितने हुए उसका होगा? चाय? हवाई चप्‍पल अभी भी नहीं मिली है! फरवरी की उतरती हवाओं में नहायी धूप का रंग उतरा जा रहा है. दिन गुजरा जा रहा है! झूमता मस्‍त महीना तो जा ही रहा है! ओह, फिर? व्‍हॉट ए मेलंकली मॉर्निंग..

4 comments:

  1. पैर-वैर पटक लिए, अब सिगरेट पीते हुए सिर भी पटक लीजिये और गुनगुना लीजिये...हर फिक्र को धुएं में उडाता चला गया.... एक अच्छी सुबह को इतनी दार्शनिक बातों से क्योंकर बोझिल बनते हैं आप? चलिए हमारी ओर से शुभ प्रभात, वडक्कम .

    ReplyDelete
  2. हम चाहें या न चाहें,

    हमराही बना लेतीं हैं,

    हम को जीवन की राहें

    ReplyDelete
  3. पर सोचने की बात है कि अगर सुबह उठकर एक ऐक्टिव दिमाग हाथ में पकड़ उसपर कौन सा डी वी डी चलायें सोचना पड़े....तो जरूर हमारे पास समय है...और मकसद....वो कहाँ है?!!

    ReplyDelete
  4. Indu, aap chokher baalee par aaye,
    is umeed par yahan comment chod rahee hoon ki aap yaha visit karengee

    ReplyDelete