Thursday, February 21, 2008

एक मर्डर मिस्‍ट्री..

आलोक के ‘वतन के डाकू’ से इंस्‍पायर्ड होकर इन दिनों मैं भी एक फ़ि‍ल्‍म की लिखाई में लगा हूं. फ़ि‍ल्‍म में ख़ून-खराबा काफी होगा, डाकुओं वाला धूम-धड़ाका नहीं. आइडिया है मर्डर-मिस्‍ट्री लिखूं. सोचता हूं लिख लूं फिर अब्‍बास-मुस्‍तान के पास जाऊंगा. अब्‍बू, मुस्‍तु, ले लो, माई-बाप, रख लो, गुरु! वो सब बाद में. आलोक सेंसरवाले स्‍टेज में रगड़ा खा रहे हैं, मैं पहले स्क्रिप्‍ट वाले रगड़ों से तो निकल लूं.. ओह, मर्डर मिस्‍ट्री सोचकर ही सुबह-सुबह कितना एक्‍साइटिंग फ़ील हो रहा है. मेरी कहानी होगी तो ऐसी-वैसी नहीं होगी. बेसिक डिज़ाईन ऐसा रखूंगा कि टप-टप लाशें टपकती रहें. छह मिनट गुजरे नहीं कि किसी को टपका दिया. मर्डर. मिस्‍ट्री तो रहेगी ही. लड़की शॉवर के नीचे नहाने की तैयारी कर रही है. आप असमंजस में हैं हिरोइन यही लड़की है या सात मिनट पहले जिसे बोरिवली के बार में मुस्‍कराते- अदा दिखाते देखा था. तब तक लड़की कपड़े उतारने लगती है और आप सारा सोचना भूलकर सिर्फ़ देखना याद रखते हैं. तब तक लड़की देखती है कि मालूम नहीं क्‍या प्रॉबलम है शॉवर में पानी नहीं आ रहा (मेरे यहां कभी नहीं आता तो मेरी स्क्रिप्‍ट में ऐसे क्षणों का आना ज़रूरी है). लड़की अभी शॉवर के साथ छेड़छाड़ कर ही रही है कि फ्रेम में उसके जीवन के साथ कोई छेड़छाड़ करने चला आता है (और कौन? द मेनासिंग मर्डरर, डैम यू!). और फिर छेड़छाड़ ही नहीं टोटल रेप मीनिंग राम नाम सत्‍य करके निकल लेता है (या निकल लेती है? वी डोंट नो..); ऑल विदिन सिक्‍स मिनट्स. देन वी जंप टू द नेक्‍स्‍ट सीन. मीनिंग नेक्‍स्‍ट मर्डर..

फ़ि‍ल्‍म में इतने मर्डर हों कि उसे लिम्‍का बुक ऑव रिकॉर्ड्स में जगह मिल जाये. आप भी भूल जायें कि कितने लोग मरे हैं कौन ज़िंदा है अभी. इन्‍वेस्टिगेटिंग ऑफिसर जिंदा है या वो भी गया का कन्‍फ़्यूज़न कहानी में बना रहे. और चूंकि कहानी मेरी होगी तो बीच-बीच में कोई कैरेक्‍टर भोजपुरी में भी बात करेगा. मसलन- का गोंसाई जी, ई मडरवा सब का कवनो इन्डिन होगा कि नय, महाराज? एगो बात बताइये लेकिन.. ई साला सब पर्गतसील मर्डर है कि पातनसील? और चूंकि स्क्रिप्‍ट मैं लिखने जा रहा हूं तो उसमें जीजिविषा, असमंजस, किताबें और दार्शनिक आयं-बायं की भी पर्याप्‍त गुंजाइश रहेगी. न भी रहे तो ठेलके मैं गुंजाइश निकालूंगा. मसलन मरने के एक मिनट पहले कोई कैरेक्‍टर सीढ़ि‍यों से उतरता झींकेगा कि प्रूस्‍त को न पढ़के उसके जीवन का कितना नुकसान हुआ. चिरकुट को इसकी खबर न होगी कि पढ़के भी फ़ायदा नहीं होता क्‍योंकि मिनट भर में उसका कपूतिस्‍की डेस्‍टाइंड है! धुआं व आग (वासना के) में नहायी लड़की सैक्‍सी सीन के ऐन बीच खुद से गुत्‍थमगुत्‍था हो रहे चिरकुट आशिक को ठेलकर उसका कान (और आपका दिमाग) काटते हुए बुदबुदायेगी- मुझे मालूम नहीं मेरे जीवन के ज़्यादा दुलारे नीच तुम हो.. या शॉपेनऑवर!

लड़की ने इतना कहा नहीं और गई! लड़का मीनिंग आशिक भौंचक.. अरे, अभी तो कान और पता नहीं और क्‍या-क्‍या काट रही थी और अभी.. ? तब तक ससुर वो भी गए! म.. र्ड.. र! इतने ख़ून हों कि आपका सांस लेना दूभर हो जाये. नाक पर इस तरह रुमाल थमा रहे कि आप गोद का पॉपकॉर्न खाना भूल जायें! जितने दार्शनिकों, लेखकों के नाम मुझे मालूम हैं सबकी किसी न किसी मर्डर के आगे-पीछे चर्चा हो जाये. राजनीति की भी. एक बूढ़ी औरत की गर्दन रेती गई है. आंखें फट गई हैं, झुर्रीदार होंठों से खून बह रहा है मगर वह हे राम या इन हरामियों की आत्‍मा को शांति देना, प्रभो कहने की जगह कहती है- बांग्‍लादेश से गरीबी कब उठेगी, राम? या रहमान. पूरी फ़ि‍ल्‍म में भारत से गरीबी उठाने की बात कोई कैरेक्‍टर नहीं करेगा. वह अंत तक मिस्‍ट्री बनी रहेगी.

नहीं, नहीं, अभी मिस्‍ट्री खत्‍म नहीं हुई. इसी मिस्‍ट्री को अब आप ससुर (या ससुरानी?) पॉडकास्‍ट पर सुनिये..

11 comments:

  1. इंतजार रहेगाजी मर्डर मिस्ट्री की। इसे महेश भट्ट से ना बनवाईयेगा, सारी फिल्में उनकी एक सी लगती हैं। इसे करण जौहर से बनवाईयेगा, कुछ स्विटजरलैंड की वादी के मर्डर होंगे। या फिर सूरज बड़जात्या से बनवा लीजियेगा, मर्डर से पहले ससुर पांच ब्याह गीत और मर्डर के बाद पांच ब्याह गीत। आगे पीछे इत्ती ब्याहबाजी देखकर दर्शक को मर्डर ही रिलीफ लगेगा, और फिल्म हिट हो लेगी।

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  2. साहित्य की विफलता के बाद मर्डर मिस्ट्री की सफलता की प्रतीक्षा है.

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  3. बढ़िया आइडिया है । जब फिल्म बनकर रिलीज हो जाए तो यहाँ पर बता भी दीजिएगा ।
    घुघूती बासूती

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  4. पॉडकास्ट सुनना बहुत अच्छा एक तो आवाज बहुत इतनी शानदार और उसपर सुंदर पार्श्वगीत/संगीत।
    साईडबार के अजदक के चोर दरवाजे में scrol amount "5" की बजाय 1 या 2 कर दें, लिंक बहुत तेजी से घूम रहे हैं उन्हें देखने या क्लिक करने के लिये थोड़ी गति धीमी हो तो सही रहेगा।

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  5. इसके बाद कान में आपकी तूती बोलेगी । एक्सेपेटेस स्पीच की तैयारी रहे । लेकिन ज़रा उस इंडोनेशियाई मलेशियाई गायक/ गायिका से कहें ये जगह माफिक नहीं । अपनी तूती कहीं और बजायें । वैसे भी संगीतकार संगतकारों के लिये ये इलाका डेंजर ज़ोन बन रहा है ।
    हाँ और हमने पढ़ते पढ़ते ही अपने सारे नाखून चबा डाले । बालों की नौबत अभी नहीं आई है ?

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  6. @काकेश, हिंदी साहित्‍य भी ससुरी मर्डर मिस्‍ट्री ही है अपने लिये. बहुत सारे मर्डर तो होते ही रहे हैं, और जितनी-जैसी मिस्‍ट्री है वह किसी से (तुमसे भी) कहां छिपा है?

    @सागर बाबू,
    अच्‍छी बात है दक्षिण एशियाई सांगितिक बाला की बल-बल में आपका मन रमा. जहां तक मेरे साईड बार के तेजी से घूमने की बात है, नयी छेड़छाड़ के बाद जब से बदला है, मेरे लिए यह भी मिस्‍ट्री है. 'scroll amount' पेज एलिमेंट या टेम्‍पलेट में खोजने की कोशिश की, कहीं पकड़ में नहीं आया..

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  7. ये सही है. पहले पढ़ो और फिर सुनो भी. एक तो करेला तीखा दूजे नीम चढ़ा. :)

    मजा तो आया सुन के.

    marquee .....

    के बदले marquee scrollamount="2" ....
    लिख दिजिये. सागर जी की शिकायत दूर हो जायेगी.

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  8. @बिकाश लाल,
    कै लिये दूर सिकायत. अब कवन माई के लाल है जेकरा कवनो सिकायत बचा है. आगे आये क् बोले?

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  9. पूरा पिक्चर बोल के बता दिये,हम पढ़े और सुनते गए...इतना ना मर्डर आप कर दिये हैं कि कभी कभी लगता है अब इस कहानी में कही अपना भी मर्डर ना हो जाय,पर आपकी स्पीच तो अच्छी है इसी तरह फ़िल्म बताते रहें,प्रयोग आपका सफ़ल है साथी...

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  10. इतनी मधुर आवाज़ में मिस्ट्री....अपने आप में मिक्स है...मिस्टीरियस है....

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