Friday, February 22, 2008

भोजपुरी जैज़ एन्‍साम्‍ब्‍ल..

भाईजी दरबारी..



ऊर्फ वेटिंग फॉर भाईजी (नॉट फॉर गोदो)..

खरे थे खरे थे एंड लॉट मोर.. दिल छोटा न करें, पियार से चरें.. आगे जनाना है..



(बाबू विकास लाल को समर्पित)

10 comments:

  1. बाल (बाल) बचे कहाँ ? और ये लॉट तो बहुत लम्बा था .. मोर तो सचमुच मोर था ही !

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  2. आप भी ना..... क्या क्या करते रहते हैं जिल्ला का जिल्ली सुने थे पर झंझट का झंझटी तो अबहियें सुनाई परा है ममगाईं जी,हमकों त लगा कि कौनों खरे साहम का वेटिंग सेटिंग होगा?पर यहां पर तो कुछ कुछ लोहा सिंग बुझाने लगा,केतना ना दुनियाँ में आप जीते है इ समझना बड़ा झंझटिया लगता है.पर जो भी बोले है,निम्मन बोले हैं,पर उ ससुर कहवाँ खरा है ई समझने मे हमहीं हेरा गये भाई

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  3. ऎ जी ए का था जी ..हम सोचे पटाखा ..फूटा ही नहीं जी...

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  4. बाकी तो सब ठीक लेकिन हमको खरा करके आप कहां चले गये......

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  5. हम त खरे होई गए फेर लंबलेटअउ होई गए [एसे पहिले के हमहूँ हेराय जांय ] - एखर कउनो जबाब नाहीं - manish

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  6. हमका तो कौनो झंझटी दिखाई नहीं परा इहां...

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  7. हमको काहे समर्पित करे हैं जी? कोई झंझटी हो गया तऽ? वइसे मिजाज त हरिया गया सुन के.

    आपका माइक ना...ससुर लइकन के हाथ में झुनझुन्ना जैसन बुझा रहा है. हाथ में आया न कि बजाना शुरु. बजाते रहिये. सवेरे सवेरे मुंह पर मुस्कान तऽ आ ही जाता नऽ है. :)

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  8. सुनके हम तो खरे के खरे रह गये।

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  9. भई क्या कहने! सुनते-सुनते पेट में दर्द हो गया, आंख में आंसू आ गए। जवाब नहीं। अब मुझे भी परमानेंट विजिटर जानिए।वाह!

    "ऎ जी ए का था जी ..हम सोचे पटाखा ..फूटा ही नहीं जी..."

    "बाकी तो सब ठीक लेकिन हमको खरा करके आप कहां चले गये......"

    " हम त खरे होई गए फेर लंबलेटअउ होई गए [एसे पहिले के हमहूँ हेराय जांय ] - एखर कउनो जबाब नाहीं "

    " हमका तो कौनो झंझटी दिखाई नहीं परा इहां..."

    "हमको काहे समर्पित करे हैं जी? कोई झंझटी हो गया तऽ? वइसे मिजाज त हरिया गया सुन के."

    "सुनके हम तो खरे के खरे रह गये।"

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