Saturday, March 1, 2008

माओ की बतकुच्‍चन के बाद दुनिया..



माओ ज़ेदोंग ने कहा था साइकिल, रेडियो, हाथघड़ी और सिलाई मशीन से ज़्यादा आदमी चाहता है तो व्‍यर्थ चाहता है. मगर माओ के कहे के बाद यांग्‍त्‍सी में काफी पानी बह चुका है. चाहना के बीहड़ जंगल में उनींदे भाग रहे भटकौवे लोग भूल गए हैं क्‍या चाहना ऑथ़ेंटिक चाहना क्‍या अपने में बत्‍ती बालना है. जो नहीं भूले हैं हंसी व व्‍यर्थता के पात्र हैं. दे आर वेस्‍टेड, जैसाकि अंग्रेजी में कहावत है, उन्‍हें दुनिया भूल गई है.

1 comment:

  1. माओ ने तो और भी बहुत कुच कहा था। याद है कि नहीं, दीन-ईमान-से?

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