3/7/08

आज की पसंद में ऊपर कैसे चढ़ें?..

शब्‍दों का यह छोटा-सा छेड़छाड़ी गुलदस्‍ता उन स्‍नेहाकांक्षियों के लिए है जो ब्‍लागवाणी की बेल से लटकते हुए पाठकीय हेलमेल की दुनिया में पींग (हाथ, आंख, गोड़ या अपनी अन्‍य बेचैनियां) मारते, पटकते हैं आदि-इत्‍यादि.. ऐसे मृदुभाषी, सकुचाइल चेठाकार भी होंगे जिनका स्‍वर ब्‍लागवाणी में मुखरित-प्रज्‍जवलित नहीं हो पाता.. जिनकी निरीह उद्घोषणाओं के कातरघोष की कमज़ोर तीलियां, अगरबत्‍तीलियां चिट्ठाजगत और नारदीय दहलीज पर जलती है (या कहें वे ब्‍लागवाणी से जलते हैं.. मैथिलजी को देखके हुलसते हैं कि दिल्‍ली से मथुरा बहुत दूर नहीं है.. या अल्‍मदाबाद!).. या सीधे कहें वे दबे, दबाये हुए हैं, ब्‍लागवाणी की पसंदगियों की तिकड़मों को अभी ठीक-ठीक बूझ नहीं पाये हैं.. आज की पसंद के कदमों तले दबे हुए, मेरी तरह घबराये हुए हैं?..

धत्‍त् तेरे की.. हम भी कहां से निकलके कहां चल जाते हैं!.. एनिबेस, लब्‍बोलुआब यह कि हमारा यह छेड़छाड़ी गुलजस्‍ता ब्‍लागबानी के कैलेंडर से जुड़े बिलायगरों के वंचितों के लिए है.. हमारी ही तरह का कोई अन्‍य सहृदय टिप्‍पनकार होगा वह ऐसी ही ज्ञानवर्द्धक चिट्ठाजगत व नारदीय टिप्‍पनी से हमें ज्ञान पूरित करेगा.. फ़ि‍लहाल बात ब्‍लागबानी की हो रही है और बानी के रचे आज की पसंद की.. तो हम अपना उत्‍साह, अवलोकन व मन का बीहड़ अंधकार उसी तक सीमित करते हैं..

सबसे पहले पहली बात.. आज की पसंद में ऊपर कैसे जायें? सबसे पहले तो इसी तरह जायें कि ब्‍लागवाणी में हमारी प्रविष्टि देखते ही पसंद पर आगा-पीछा सोचे बिना आप किलिक कर दें! और तब तक करते रहें जब तक ब्‍लागबानी बरज के आपको रोक न दे कि आपका मत पहले ही दर्ज किया जा चुका है! दूसरी बात गूगल चैट पर जमे रहिये, बाहिर मत निकलिये, जैसे ही कोई पहचान का क्‍लायंटेल पकड़ में आया लपक के पूछिये, गुरु, हमारी प्रविष्टि देखे? अरे, हम्‍मों क्‍या चिरकुट सवाल कर रहे हैं, वो तो देखे ही होंगे! पसंद पे क्लिकियाये कि नहीं?.. अरे, अभी तलक नहीं क्लिकियाये? और अपने को हमारा साथी और समानविचारधारवाहक बोलते हैं?.. ऐसे में ज़ाहिर है क्‍लायंटेल लरबराके आपकी प्रविष्टि पे क्लिकियायेगा.. जब तक न क्लिकियाये, छोड़ि‍ये नहीं! चैट बॉक्‍स से काम न चले तो दू गो फोन मार दीजिए! कुछ कीजिए, क्‍योंकि खाली बैठे ऐसे ही हाथ डोलाये से आज की पसंद में आपका कोई चांस नहीं है! कल की पसंद में भी नहीं है..

मगर इस स्‍ट्रेटेजी में ये रिस्‍क भी है कि सहजोगी प्रार्थी गूगल चैट में ऊपर अइबे न करे? सैकड़ा परसेंट रिस्‍क है.. तो उसका काट भी है.. अपनी प्रविष्टि संबंधी एक लाईन का मेल और अटैचिंग में पसंद क्लिकियाने का रिक्‍वेस्‍ट ठेल दीजिए! मेल पानेवाले आदमी के अंदर थोड़ी भी शरम होगी तो ऐसी कोई चीज़ नहीं है जिसको खाके वो आपकी प्रविष्टि के पसंद पर क्लिक न करे! ज़्यादा संभावना है घबराके आपके विरोधी पोस्‍ट पर भी क्लिक कै आवे!.. ऐसा दो बार से ज़्यादा कर दे तो आप डांटके उसे ऐसा करने से रोक सकते हैं..

आपकी पसंद में ऊपर चढ़ने का एक अन्‍य महत्‍तम रास्‍ता है आपके सात बच्‍चे हों. पोस्‍ट चढ़ाते ही सब बच्‍चा लोग को काम पे लगा दीजिये कि पसंद को ऊपर चढ़ाने के काम में जुट जायें.. सात बच्‍चा नहीं हो ता सात बीविये हो.. या प्रेमाकांक्षी, प्रेमदुलारिन? या आप ग्रुप बिलाग चलाते हों.. कि ‘दतुअन से दांत धोने के दस फायदा’ जैसा निरीह पोस्‍ट भी चढ़ायें, आधा घंटा का भीतर उसको सात पसंद का ईनाम मिल चुकता है! बहुत बार ऐसा भी होता है कि तीन लोग पढ़े होते हैं और पांच लोगों को पसंदगी से नवाजा गया होता है! ग्रुप बिलागन की महिमा अपरंपार है.. कितने टूटे मन और कपार हैं सो तो आपने देखा ही, पसंदगी में भी वह सबको फेल किये आगे-आगे दौड़ती रहती है! तो एक तो हमारी आपको यह सलाह है कि भले आप ‘मैं और मेरी गाय’ नामका ब्‍लाग चलाते हों, इम्मिडियेटली उसको ग्रुप बिलाग बना लें, क्‍योंकि इससे ग्रुप के किसी अन्‍य मेंबर को लिखने का बहाना बनेगा कि आप कितने पहुंचे हुए पर-बंधक हैं, साथ ही पसंद क्लिकियाने के नये-नये हाथ पैदा होंगे सो एडिशनल फायदा..

खाली मत बैठिये, दिमाग लड़ाते रहिये.. देखिए, आज नहीं तो कल की पसंद में आप ऊपर चढ़ जायेंगे ही! नहीं चढ़ेंगे तो हमारे बिलाग पे चढ़ जाइएगा.. मगर पहिले हमारी पोस्टिंग पर अपनी पसंद को क्लिकियाना मत भूलियेगा!

24 कमेंट:

ajay kumar jha ने कहा...

pramod jee,
aitnaa mathapachhi kahe karein hum log to neeche he theek hain oise bhee neeche nahin rahenge ta aap log upar kiske rahiyegaa. han hum pasndwa par klik kar diye hain.

Pratyaksha ने कहा...

बिना खोले क्लिकियाये और बिना पढ़े टिपियाये। इतना तो पहले किया। अब फुरसत से एगो तकनीकी समस्या का निदान किया जाय गुरुजी। सात गो बचवा सब कहाँ से सकसेसफुल्ली पसंद क्लिकियायेगा? दूसरों के घर जाकर न ? फिर पड़ोसियों के मेरी नापसंद के लिस्ट में भी अव्वल चढ़े रहियेगा। और का ?

vimal verma ने कहा...

भईया टीप के आ रहा हूँ,आज की पसन्द में आप ऊपर रहे ई हमारी दिली इच्छा है...पर पिछली पोस्ट पर अभी भी हमारे मित्र लोगों का खींस निपुरा हुआ है....भाई एक गो कहानी हमरे पास भी है...

Anonymous ने कहा...

ब्लॉगवाणी के आधे पेज पर तो भड़ासिया बिष्ठा ही बिखरी पड़ी रहती और, औरों का जुगाड़ कहां हो पाता है?

Priyankar ने कहा...

हज़ूर! फ़कत एक ठो पिरेमदुलारिन है अउर दू गो बचवा तभइयैं तो पसंद-सूची में बहुतै डाउन हैं, अउर डाउनटाउन नहीं हैं . हम तो बस दुलारिन के दुलार में उलार रहते हैं . आदमी को अउर का चाहिए जिनगी में .

लिस्ट-उस्ट सब धरा रहने दीजिए . जिनको इतिहास रचना हो सो रचें . हम ब्लॉग-इतिहास के अंत्यज बाहिरै ठीक हैं . लिस्ट में नीचे ही सही, हैं तो .

Shiv Kumar Mishra ने कहा...

एक-एक सुझाव के कॉपी और पिल्सिन लेके लिख लिया हूँ... दुःख खाली एतना है कि ई सब हिसाब-किताब पहिले से पता नहीं था.....वोईसे, देर आए तभियौ दुरुस्त आए...

अभियई भारतबर्ष का अलग-अलग शहर में रिश्तेदार-नातेदार, दोस्त-यार का लिस्ट रेडी करता हूँ... काल से ई पूरा कार्यक्रम शुरू करता हूँ....:-)

Parul ने कहा...

जे भली कही आपने

Ojha ने कहा...

सात बच्चे क्यों एक दर्जन क्यों नहीं, पूरी टीम होनी चाहिए. :P

अरुण ने कहा...

अच्छा तो ये मामला है हम तो समझे थे की आजकल आप और मोह्ल्ला तथा मंडल जी बहुत धांसू लिखने लगे है..मतलब अविनाश बाबू की तरहआपने भी काकश बना कर उपर रहने का जुगाड अपना लिया है,ध्न्य हो गुरू कभी कभी हमारी पोस्ट पर किल्किया दिया करो बदले मे हम आपकी पर किलकियायेगे जी..:)ये सात सात को कैसे संभालते हो इस पर भी एक श्रखंला हो जाये..:)

Udan Tashtari ने कहा...

हमेशा की तरह पूर्ण भक्ति भाव से क्लिकिया दिये है.. :)

vimal verma ने कहा...

ई वाला गुन सबको जनता को बताए के बहुतै पुन्न वाला काम किये हैं आप तो ढ़ाई घंटे में ही उप्पर पहुँच गये, देखिये अब इससे ऊपर मत चले जाईयेगा कि देखाई ना दें। धन्यवाद

दिनेशराय द्विवेदी ने कहा...

प्रमोद जी। किस को फिक्र है ब्लागवाणी पर ऊपर चढ़ने की।

Pramod Singh ने कहा...

@दिनेशजी आप सही कह रहे हैं.. लेकिन सब यहां सही कहां कर रहे हैं?

जोशिम ने कहा...

पसंद में दस नम्बरी तो बनाय दिए गुरु महाराज - लेकिन ये बाली जी वाला फोटू काहे टिपियाए हैं?

Pramod Singh ने कहा...

@जोशिम भाई,
क्‍योंकि हमरे मन के भाव भी वैसे ही बाल-लाल वाले हैं.. हें हें हें..

अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi ने कहा...

भैया जी, कोशिश करे मां का हरज़ है. यहू अपनालिया जायगा.
मगर हम कहा कि ई सब का कौनो फायदा है क्या?

का भैया कौनो डाक्टर बताइस है का?

अरे जेह्का पसन्द करे का होई सो करिबे ही.
अपन तो भैया जी ,सोवे जात हैं लम्बी तान के हां...

( भारतीयम)

अनूप शुक्ल ने कहा...

हमको सच्ची खुशी मिल रही है आज कि हम नेट पर आपसे चैटियाते नहीं हैं। और हम एक बात और नोट किये कि आप हमारे एक पोस्ट का शीर्षकै उड़ा के अपने यहां लगा लिये। पता करते हैं कि इसे ब्लाग चोरी माना जायेगा कि शीर्षक चोरी या कि डकैती में आयेग मामला। ग्रुप ब्लाग वाला आइडिया अच्छा है। बनाते हैं ग्रुप ब्लाग लेकिन किससे साथ बनायें?

Pramod Singh ने कहा...

@पंडिजी,

बड़ दुख का बात है कि आप ससि कपूर वाला 'चोरी हमरा काम' फिलिम नहीं देखे.. देखे होते त अइसा नदान सबाल नहीं करते, हं!

अजित वडनेरकर ने कहा...

चौथे साहब की बात महत्वपूर्ण है। आप हमें हड़काते हैं और खुद ऐसी ऐसी पोस्ट लिखकर टीआरपी बढ़ाते हैं काहे ?
टीआरपी जाए भाड़ में, रेटिंग जाए तेल लेने। आप के दर्शन कभी कभी हो जाएं, वही बहुत है।
जीवन नर्क हुआ जाता है।

अनूप शुक्ल ने कहा...

चोरी हमारा कामैं नहीं है तो ऊ सनीमा काहे देखें?
जौन गांव जाना नहीं वहिके कोस काहे गिनें! बताइये जी।

Arun Aditya ने कहा...

waah guru, aap to aaj ki pasand men bahut upar chadh gaye.

Anonymous ने कहा...

चौथे साहब की बात पर कान धरा गया है.
अब ऊ पोस्ट्वा आधा पेज नाहीं घेरती

Pramod Singh ने कहा...

@पंडिजी,

कौन आपका काम नहीं है येहिये सोच में उलझे रहके आप बहत्‍तर घाट का पानी पिये और जाने कौन-कौन तो नॉन-मेंसनेबल काम करते रहे.. लेकिन अभी ले वहिये सोच में उझराये परे हैं!.. फलतू में बहस जिन कीजिए और जाके पहिले 'चोरी हमरा काम' देख आइए, हं!
@बडनेरकर बाबू,

आप सही फ़रमाय रहे हैं.. ई पोस्टिन हम पसंदी पायदन का ऊंची लटकन लटके बास्‍ते ही लिखे थे. आप लोगन ने जाने कौन-कौन जनम की हमारी सूतल साध को पूर दिया.. ओह, जनम सकारथ हुआ!

neelima sukhija arora ने कहा...

का गुरुदेव ई गुरुज्ञान इत्ते देरी से काहे दिए हम तो यूं ही ब्लागवाणी में आज की पसंद देख देखकर खुद को जला रहे थे।