Wednesday, March 12, 2008

ब्‍लॉगवाणी बुड़बकई टिड़बकई एटसेट्रा..

जिन्‍हें अपने लिखे, सोचे की चिंताओं से मोह है, ज़ाहिर है वो ब्‍लागवाणी के मुखपृष्‍ठ के क्रिया-कलापों से प्रसन्‍न नहीं होंगे.. ब्‍लागवाणी के मुखपृष्‍ठ की सार्थकता की व्‍यर्थता बतानेवाले भी होंगे.. मगर उसे पढ़कर भी कोई प्रसन्‍न न हो रहा होगा.. क्‍योंकि कुछ होंगे जो अपने विचारों की टिड़बकई और फुदर-फुदर की फुदकन में ब्‍लागवाणी के मुखपृष्‍ठ से सबको मुंह बिरा रहे होंगे.. भले उस बिलाव-बिराव की लगातार हास्‍यास्‍पदता बन रही हो.. मगर शायद अभी उनके पास पर्याप्‍त मात्रा में फुरसत बची हो.. खीर बची हो? अलबत्‍ता इस बीच दूसरी जगहें लोग दूसरे दुखों से दुखी हो रहे हों.. ‘आई! आई!’ और ‘यू!-यू?’ कर रहे हों!..

या इसे शालीन ज़बान में शायद ऐसे कहें?.. ‘अरे हट हट, हट न.. मेरी जगह, आप हटो .. हटो यार?.. ऊपर जाने दो.. अबे, दूं क्‍या एक कुहनी? मारूँगा स्‍साले!.. हटो म्‍यां.. बधु कर क्या रहे हैं आप, रुकिये हद है, शालीनता का ज़माना नहीं? चले आ रहे हैं मुँह उठाये, बदतमीज़! मेरे पैर.. उफ्फ, कचड दिया , उई माँ?.. पहले वाली जगह मेरी है मेरी है! मेरी है अरे क्या मेरी मेरी?.. दिखाते हैं, ससुर!.. तेरी मेरी सब पता चल जाएगा अभी! पहुँच गया चहुँप गया, हुर्रे हुर्रे मेरी पसंद पर टॉप टॉप! झक्कास.. ब्लॉगवाणी मेरी पसंद ज़िंदाबाद ज़िंदाबाद!.. अरे ये पीछे से मुर्दाबाद कौन बोला रे?.. .अरे मइय्या गे, अभी ले त् ऊपरी था एतने में नीचे ले कहंवा से आ गिया रे?. सब बकवास है जी.. हमें क्या ऊपर क्या नीचे क्या?.. अरे बंधु, सही कहा.. सब बकवास!.. महोदया, चलिये चलिये यहाँ से.. ऐसे भीड़भाड़ में आपका क्या काम?.. चलिये हटाईये.. भाई जी पॉडकास्ट करियेगा? पॉडकास्ट?..

ओह, पॉडकास्‍ट.. पता नहीं मैं अभी क्‍या-क्‍या करूंगा?..

13 comments:

  1. हाआआआआआआआआ....हीइइइइइइइ हुउउउउउउउ
    बाप रे एतनी जगर मगर अफ़रा तफ़री..सोचिये इतना बढ़िया जब ऑडियो है तो वीडियो कैसा होगा...चित्र तो आप काढ़ के रख दिये भाई जी..अब बचा क्या है।इसी को कहते हैं जब रात है ऐसी मतवाली तो सुबह का आलम क्या होगा ?

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  2. हैडर बदल गया...लिजलिजेपन से हट कर खुशनुमा कुछ खिलखिलाता सा हैडर...क्या बात है?

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  3. ओ खिलखिलावन संजय भैया बेंगाणी भैयाजी, आपकी.. व हमरीओ.. कल्‍ल्‍पनशीलता.. धन्‍न हो.. जै जै हो!

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  4. बहुत बढ़िया टिडबकई है...अद्भुत.

    सर, कैसे बनाते हैं ऐसा पॉडकास्ट?...बाप रे..बहुत मेहनत का काम..

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  5. कुहनी मार के , पैर पर चढ़कर , धक्का मुक्की कर के आप तो ऊपर चढ़ गये महाराज !

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  6. अपने कुल जमा इफेक्ट में अब तक का सबसे मारक पॉडकास्ट, करुण रस से सराबोर अगर इसे नाज़ी कन्सट्रेशन कैम्प से बचकर आए लोगों की दुख भरी कहानी बताकर किसी हंगेरियन बुल्गेरियन साइट को बेच देंगे तो मालामाल हो जाएँगे, इसमें इतना दुख है कि लोग अपने ही आंसुओं में डूब जाएँगे ऐसा लगता है. कमाल है भइया जी.

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  7. कमाल का पॉडकास्ट :)

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  8. धांसू च फ़ांसू। मौज आई चढ़ा-उतारी देखने में। लेकिन इज इट फ़ेयर? क जबाब कौन देगा?

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  9. अनामदासजी के कथन से सहमत हूं भैयाजी ...

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  10. का जी, ब्लॉगवाणी के चढ़ाव उतवार पर ही लगे रहियेगा कि कौनो और बात भी करियेगा..पॉडकास्टिंग मास्साब!!

    इसी पर कोई क्लास लगाई जाये कि फटाफट पॉडकास्टिंग कैसे की जाये बुझाये कि ब्लॉगवाणी की लाईव कमेन्ट्री.. :)

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  11. बाबा जी कमाल कर दिया आपने आज ! महिला की आवज़ और अन्दाज़ आपने ही दिया है न खुद?
    सही है । रोज़ की ब्लॉगवाणी पर दिन भर के लिखे को अगर कहे में तब्दील किया जाए और टाइम से थोडी छेडछाड करके 24 घण्टे को 5या 10 मिनट कर दिया जाए तो उसका साकार रूप शायद ऐसा ही होगा ।
    पसन्द आया ।

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  12. वाह गुरुजी! आप तो छा गये. :)

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  13. vakai maza aaya.mubarakbaad.

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