सब छेर रहे हों तो आदमी, मतलब मैं खड़ा कहां होऊं?..

पता नहीं ईश्वर सब अच्छा-अच्छा करते हैं या नहीं.. और करते हों भी तो शायद सबके लिए तो नहीं ही करते.. कम से कम किसी दुखियाये पुरनिया गवैया या चिलबिलाई लइकी या गुस्साइल नाक से धुआं छोड़ते-छेरते महाशय के लिए तो नहीं ही कर रहे दिख रहे.. पता नहीं ईश्वर ऐसे क्यों हैं जैसे हैं? मगर फिर बाकी लोग भी तो पता नहीं वैसे क्यों हैं जैसे हैं?..
ख़ैर, खुदी सुनिये..


5 कमेंट:
भाई मेरे, बकिया तो छोड़ा...हमका तो तनी बैकग्राऊन्ड वाला गीत अलग से ईमेल में भेज दा..भगवन तुहार भला करीं. :) बाकी तू जूझा!!
सही है। मार दिलीपवा को लप्पड़। ईडियट लड़के को भी। लड़की को छेरता है! आई लव यू बोलता है। :)
शानदार प्रस्तुति!
भाई आई लव यू बोलने का सबको थोड़े ही ना हक है,पर पिछवाँ वाला गाना जो गाया जा रहा है...एतना सब हो रहा है पर सुर बड़ा तबियत से साधे हैं भई,मजगर है भाई,भाई बहुत तरह का आवाज़ आप निकाल रहे हैं इसके लिये मेरी तरफ़ से आश्चर्य भेज रहा हूँ,
मन मोरा भइल उदास...
चकल्लस के बीच फूटते सुर भा गए सचमुच । समीरभाई की बात सही है।
कुछ गाने आड़ में ही भले । क्यों ?
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