Sunday, March 30, 2008

जनता के एक महामहिम से एक लघु बातचीत..

श्री श्री सर्वेश्‍वर विमल सुकेसर प्रोफ़ेसर पांड़े जी गुणी ज्ञानी आदमी हैं.. अद्भुत मेधा पुरुष हैं, महा-महापुरुष हैं और जाने तो क्‍या-क्‍या हैं.. मगर इस सबसे ज़्यादा और सबसे पहले जनता के आदमी हैं.. बाबू पिरमोद कुमार गंगोली को उनसे सत्‍संग का एक संक्षिप्‍त अवसर प्राप्‍त हुआ, उसके पुष्‍प आपके समक्ष अर्पित किया जा रहा है.. दोष जो भी होंगे, बाबू पिरमोद के ही होंगे, क्‍योंकि विमल सुकेसर प्रोफ़ेसर पांड़े जी जनता के आदमी हैं और किसी भी तरह के दोष से मुक्‍त हैं.. तो लीजिए, यह ज्ञानात्‍मक, संवेदनात्‍मक, विवेचनात्‍मक, जनतात्‍मक विमर्श.. और लाभान्वित हों..

12 comments:

  1. बढ़िया खुलासा किया है पांडे जी ने!

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  2. सुकेससर जी बहुत ही बढियाँ बिचार रखे. बस थोडा ट्रेन पकडने में हडबडी किये, यही गलत रहा. जनता तो यहाँ भी है और उनके मैनेज रकरना चाहिये कि अगला जनता सब से संबोधित करने के स्थान पर यहाँ की मूढमति जनता को थोडा और मार्गदर्सन करना चाहिये. प्रमोद कुमार गंगूली जी! आपको प्रश्न सब थोडा पूछने में समझदारी से काम लेना चाहिये.

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  3. जुगलबंदी उम्दा लेकिन ख़ास लगा पीछे के झींगुर गान ?

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  4. वाह वाह ! बहुत बढ़िया है सर.

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  5. is mazak se main khush nahin ho paya. is tarah ki koshishen humare sapnon ki seva to kya karengi, ulte ve hamen hi khokhla karti jayengi.
    vipin

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  6. लाभान्वित हुये। मजे लिये। ज्ञान तो मिल ही लिया। अच्छी प्रस्तुति!

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  7. विपिन भाई आप हमेशा राजनीतिक पुरूष ही बने रहेंगे क्या? दिशा ही देते रहेंगे...यांत्रिक लोग हर मंच पर आज भी मौजूद हैं चाहे वो रजनीतिक मंच हो या कल्चरल, आपके आस पास ऐसे बहुत से लोग हैं क्या आप उनसे खुश हैं? अफ़सोस ये है कि आज भी ऐसी भाषा बोलने वाले हैं और अग्रिम भूमिका में हैं, बीस साल बाद भी उनकी भाषा बदली नहीं है..उनसे खुश रहते हैं क्या?

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  8. हा हा हा हा , मज़ा आ गया , लेकिन ये बात तो सही है की शेख करता तो है मस्जिद मे खुदा को सजदे, उसके सजदों मे असर हो ये ज़रूरी तो नही ...लेकिन इससे ये मतलब तो नही की शेख मस्जिद मे सजदे करना छोड़ दे.

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  9. bilkul nahin vimal bhai. bas dikkat ye hai ki aap in yantrik logon ke aspas hi kyon mandra rahe hain. is tarah ki sakriyta mein to mujhe sachmuch srijan ka koyi ras nahin milta.

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  10. परम पूज्य सुकेसर जी को सलाम जो ज्ञान मिला उसका आदी हूँ (आभारी नहीं) आशा करता हूँ कि ज्ञान की इस दरिया में डुबकी लगाने का मौका फिर मिलेगा

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