Tuesday, March 4, 2008

भइयाजी, एगो घुघनी तो निकलता है?..



बिसंभरा चोन्‍हा रहा है. माने एगो पिलेट घुघनी का मोह में अरबरा रहा है. निमन-निमन बइठ के बबीता का सोंदर्ज-पान कर रहा था, मन ही मन नहीं, सीधा-सीधी कुलजीत को मां-बहिन का गारी सब पहिना रहा था.. कि मालूम नहीं कवन दुर्घड़ी में रतलामी जी का हिंदी बिलाग का गड़ही में गोड़ डाल दिया.. और तब्‍बे ले गरबराये हुए है.. भइयो जी चार गो बीड़ी जेतना बिराये हुए हैं.. सुनिये, सुनिये, आप खुदै बूझ जाइयेगा..

मन पाकल कोंहड़ा जइसन बसाइन होने लगे तो इहंवा बबीता को देख के धन्‍न हो लीजिएगा..

10 comments:

  1. परमोद बाबू, जो लिस्ट रतलामी जी उपराया है..ऊ कौनों गड़ही से ही मिली है..और ओही में समा जायेगी..पर हमको त इ समझ में नै आ रहा है कि ई बुरा ना मानो होली है समझ क्यौ नही पाय रहा है..और आपकी घुघनी और नारियल महाराज रतलामी जी को चढ़ा आइये बहुतै पुन्न मिलेगा..और जो ऊ अदमियाँ जेके आप लौंगलता खिला रहे थे,खाजा खिला रहे थे उसके भगवान के वास्ते छोड़ दीजिये ऊ आपका कुछौ नही बिगाड़ा है.. हाँ इस रेटिंग के चक्कर में कुछ लोग अपना रेटिंग देखकर और दूसरे को ऊपर देखकर औंजाए हुए है..उनसे करबद्ध प्रार्थना है कि जो खुशी मनाना है ऊ सब होली में मनाइयेगा,और पोस्टकाड बहुतै निम्मन चढ़ाए हैं..लेकिन केहू का मज़ाक एतना ना बनाएं...ऊ त बेचारा अपने ही निरीह है

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  2. soni kudi ki photuwa ke siva kuch samajh nahi aaya....aur jo laat kahoge bola aapne lagta hai woh gaane wali (lata kya) ko thik se sunayi di isliye thora tej bhagne ki koshish ki

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  3. अलेक्सा-उलेक्सा का लिस्ट-उस्ट पर मत जाइए . आप तो नम्बर भन हइयें . रतलामी जी और हम जी(माइसेल्फ़) तो गंजे हो गए आपको पढते-पढते .आप तो बस ब्लॉग की तई पर शब्दों की जलेबी बनाते जाइए जनता दोना लिए खड़ी है . सुबह से भीड़ लग जाती है . चाशनी कितने तार की बनाते हैं ? रेसिपी भेजिएगा . कॉपीराइट करवाए कि नहीं . नहीं तो इरफ़ान झट्ट से चढा देंगे 'टूटी हुई बिखरी हुई' पर . हालांकि जलेबी तो साबुत ही अच्छी लगती है .

    रही बात गंगाराम की तो भाई ऊ भी समझेगा . कब तक नहीं समझेगा . तो भाई ओहका थोड़ा टैम दीजिए . थोड़ा धीरज धरिए .

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  4. kaa baat hai azdak jee , aap ta first aane ke baad se auur maruk ho gaye hain. ravivaar ko hanstee huee rail bhee padhe the . badhiya laga. aa ee youtubwa ka darshan bhee.

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  5. उइ ..गारी पहिरा रहा है -अइसे लिखेगे तबे तो अजदक नाव गड़ही में बुड़िया के ऊपराजेगा न ....

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  6. एक बात कहिये तो…ये बिसंभरा इतना खिसिया के काहे बोलता है ?

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  7. हें हें, भइया जी...एकदम कमाले है...चंदरकला, लवंगलता, खाजा, घुघनी..मेनू बहुत अच्छा था लेकिन झुट्टे पुरनका एकबार लाने के लिए धउगा दिए हैं, और इ सब नवरतन पकवान अकेले चाभिएगा, एक नंबरी होना खुसी में...ठीक है, सब बुझते हैं.

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  8. बिसंभर जी के सामने एतना ऑप्शन दिए. चंद्रकला, लवंगलतिका, घुघुनी ...और तो और लात तक का ऑप्शन दे डाले...वैसे ई बताईये सर जी, पाँच किलास में पहिलका नंबर नहीं पाये लेकिन आज तो पहिलका आया है...खिलाईये बिसंभर जी को....

    हम तो कहते हैं हिलेरी जी को घुघुनी खाने का जरूरत है...थोड़ा हिलिसा खाने का भी...बंगाल का मिठाई और हिलसा खा लेंगी तो पता चलेगा कि मार्क्सवाद से बढ़िया कुछुवौ नहीं है...डेमोक्रेसी भी नहीं.......:-)

    एतना ऑप्शन उन्हें दिखाए कि
    बिसंभर जी की समझ में ना आए
    घुघुनी औ हिलसा कौन खिलाये

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  9. लवंगलता और लात दोनों खाके किल-किल कर रहे हैं।शानदार प्रस्तुति!

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