Tuesday, April 1, 2008

अंतत: मुझे मिलना ही था.. मिला.. नोबेल!

तो अंतत: मुझे नोबेल मिल गया. बहुप्रतिक्षित था (दूसरों के लिए नहीं, मेरे ही लिए था.. जैसे नायपॉल साहब के लिए था, मगर वह दो कदम आगे रहे थे- नोबेल पाने के पहले दूसरी बीवी व्‍याह लाये थे. इस लिहाज़ से मैं चूक गया हूं. अब पा गया हूं तो कोशिश करूंगा, जल्‍दी ही दूसरी के पीछे-पीछे तीसरी ले आऊं, इस तरह पिछड़ने की कुछ भरपायी हो सकेगी).. हालांकि सुन रहा हूं इस्‍तांबुल में हडंकंप है. मेरे नोबेल पाने से बाबू ओरहान पामुक बहुत प्रसन्‍न नहीं हैं. यहां (काहिरा) और वहां (कोपेनहागन) कहते फिर रहे हैं कि नोबेल को इसी छिछोरे स्‍तर पर गिरना था तो उन्‍हें अपने पा लिये पर ताज़्ज़ुब है? अपने यहां काम करनेवाली बाई के मुंह से जबसे मैंने पामुक के ये उद्गार सुने हैं, सन्‍न हूं. दुनिया, ससुर, कहीं से कहीं पहुंच जाये, दो कौड़ी की साहित्यिक टुच्‍चई अपनी जगह से टस से मस नहीं हुई! मैंने उस तुर्क का क्‍या बिगाड़ा था, लेकिन, देखिए, चोट्टा सार्वजनिक रूप से मेरे साहित्‍य पर उंगली और डण्‍डा चलाता फिर रहा है! अभी एक किताब लिखी नहीं जब ये हाल हैं, इंटरनेशनल बुकशेल्‍फ़ों में दस टाइटल ठिल जायेंगे तो पता नहीं कहां-कहां मुंह छिपाते फिरेंगे ये सारे के सारे साहित्‍यबाज! पामुक के बाद गुंटर ग्रास, दारियो फो, हेरल्‍ड पिंटर और मोहतरमा डोरिस लेसिंग की ख़बर लेनी है कि ये भले लोग(?) मेरे पाले में हैं कि पामुक के साथ सुर व स्‍वर मिलाके गंद रेंक रहे हैं?..

पता नहीं ऐसे गंदे व संकीर्ण विचार रखनेवाले चिरकुटों को साहित्‍य अबतक कैसे झेलती रही है? सोचकर मन खिन्‍न हो जाता है. जबकि आज खिन्‍नावदिवस मनाने की कोई ज़रूरत नहीं. जोशिम ने आलरेडी अग्रिम में बधाई दे रखी है, अनामदास चाहते थे मैं बीबीसी हिंदी के लिए उन्‍हें इंटरव्‍यू दे दूं तो मैंने उन्‍हें तमककर मना भी कर दिया कि नोबेल जैसी चीज़ मिलने के बाद अब मुझसे हिंदी-टिंदी बहुत मत टिलिआओ! और सबसे पहले तमीज़ से बात करो! बेजी भी बधाई दे रही हैं, लेकिन मुझे लगता है इस बधाई में राज व अर्थनीति है- क्‍योंकि वह औरत विदेश में कंगलों की एक क्लिनिक खड़ी करने के सिलसिले में डॉनर्स खोज रही है.. तो मेरे हाथ में दसेक लाख डॉलर्स आते ही वह अज़दक-अजांग की आरती बना-बनाके हर दूसरे घंटे कविता सजाने में लगी हुई है! ऐसे लोगों से, खास तौर पर महिलाओं से, आज बहुत संभलकर रहने की ज़रूरत है.. हालांकि अपनी पुरानी प्रवृत्ति के अनुरूप मैं संभले हुए भी थोड़ा बे-संभला रहना चाहता हूं. हालांकि उसके ख़तरे भी हैं. जैसे एक्‍साइटमेंट में आज प्रैस वालों के लिए तैयार होते हुए मूंछ की जगह मैंने भौं शेव कर लिया है.. और प्रैसवाले बाद में होंगे, मैं स्‍वयं बहुत खुश नहीं हूं!

बैठे-बिठाये वैसे बड़ी टेंशनवाली चीज़ हो गयी है. अब ये दसेक लाख डॉलर्स का आखिर मैं करूंगा क्‍या? ठीक है, बेजी-टेजी या किसी भी केजी में पढ़नेवाले को नहीं दूंगा वह बात समझ में आती है, फिर भी? हालांकि ये सोचकर अच्‍छा लग रहा है कि फ़ोन और बिजली-टिजली के बिल भरने के लिए इस और उस मेहमान के घर कोई कीमती सामान उड़ाकर झट से झोले में डाल लेने के झंझटी दिनों का अंतत: अंत हुआ! चाय के लिए भी अब दूसरे नहीं, मैं खुद पैसे दे सकूंगा. ये सब मेरे लिए ह्यूज अ‍चीवमेंट है! रियली..

सोचते हुए बड़ा हर्ष हो रहा है कि जिस ऊंचाई तक बाबा तॉल्‍सताय और जीनियस जॉयस नहीं पहुंच सके, मैं लेटे-लेटे वहां तक लंगी मार आया? और आप चिरकुट लोग हैं कि एक फकत बधाई तक नहीं दे पा रहे? आप पर धिक्‍कार है.. एक मिनट, अभी-अभी शारूख का एक बधाई वाला एसएमएस आया है. कहता है उसे मालूम नहीं था देश में इतना बड़ा मैथेमेटिशियन छुपा हुआ है?.. अबे?.

22 comments:

  1. बधाई
    आखिर आपने मेरी किताब "नोबल प्राइज कैसे प्राप्त करें" पढ़ ही डाली

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  2. पतनशीलता क्या नोबेल की नई कैटगरी है....जो भी है...बधाई बधाई!!

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  3. मैथेमेटिशियन अजदक को नोबल पुरस्कार के लिये बधाई. आपका कोई जुगाड़ वुगाड़ हि क्या नहीं तो अगले साल के अर्थशास्त्र पुरस्कार के लिये हमारा नाम दे देते.

    कल विमल भाई से बात हो रही थी. वो बोधि भाई और अभय जी विविध भारती के स्टूडियो में थे. युनुस भाई कुछ रिकॉर्डिंग वगैरह कर रहे थे. तो उन्होने हिंट तो दिया थी कि आपको यह पुरस्कार मिल सकता है.इसलिये आप चीन से सीधे स्वीडन जाने की सोच रहे हैं.तब भेजे में बत्ती नहीं जली थी अभी बात समझ आयी.अनामदास जी ने आपके बारे में एक फीचर बनाने को कहा है जिसे वो बीबीसी से प्रसारित करेंगे. क्या करूँ बना दूँ क्या? बतायें...कैसा रहेगा...


    वैसे जैसे लोगों को मैथ्स समझ नहीं आती वैसे ही आपकी पोस्ट भी समझ नहीं आती. हमारी बात और है क्योंकि हम तो बचपने से ही अर्थ का अनर्थ करने में जुटे हुए अर्थशास्त्री हैं.

    एक बार और बधाई लें. और हमारे लिये कुछ चॉकलेट लेते आयें. बांकी मिलने पर बातें होंगी.

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  4. वा वा, बधाई हो!
    आवारा बंजारा के लिए आपका एक इंटरव्यू चाहिए ;)

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  5. @संजीत मियां,
    और बकिया के भी लोग, कान खोलके सुन लें.. इंटरव्‍यू मैं किसी को नहीं देनेवाला ! हां, पैसा-टैसा कोई देना चाहे तो उसे स्‍वीकारने के बारे में विचार कर सकता हूं?

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  6. बधाई! बधाई! बधाई!

    वैसे कौन सी विधा के लिए मिला ये पुरस्कार? और आपने स्वीकार क्यों किया? विकसित देशों की कोई नीति तो नहीं है आपको 'कनवर्ट' करने की?

    खैर जो भी हो. आपके लिए एक चेतवानी है. जब भी पश्चिम बंगाल आयें, मेडल को साथ न लायें. इस राज्य में 'ग्लोबल' नोबल का मेडल चोरी हो जाता है.....:-)

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  7. गुरुदेव आपकी सबसे फास्ट लर्निंग पतनशील स्टूडेंट मैं ही हूँ , कृपा कर अगले साल का नोबेल लेने के लिए मेरी सिफारिश करें ।
    देखिये मैने अब तक आपसे कितने सारे प्यारे शब्द सीख लिये हैं -
    अलल-बलल , टिल्ली-बिल्ली , टिलियाना ,फुदुर-फुदुर.....अउर बहुत सारे हैं सर्र !

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  8. अच्छा किया मैने पहले ही नोबल के लिये साफ़ साफ़ मना कर दिया था,लेकिन निबल पुरुस्कार इतना पतनशील निकलेगा इसकी उम्मीद नही थी.चलिये कोइ बात नही पतनशील बधाई स्वीकारे जी.

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  9. अब मिल गया न, फिर टिर्राते काहे को हैं, बाजू हटिए, और भी हैं लाइन में...बड़े आए...कानी फिरैं भिन्नानी, कहां गई मेरी सुर्मेदानी...

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  10. सुना नोबेल देने वालों ने आपको नोबेल देने का नोबल कार्य करने के बाद दुकान बन्द कर दी.इसके बाद किसको दे सकते हैं भला? फूल एंड फाइनल बधाई !

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  11. धिक्कार है हम पर. बधाई नहीं देनी.


    बधाई देंगे भी तो डेविड बून जैसी मूछों के लिए देंगे.

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  12. बापरे एक पुरस्कार नहीं मिल गया, आप तो रंगै बदल दिये,देखियेगा पैर ज़मीन पर तो है?नोबल के बदले भारत रत्न एक्चेन्ज में मिल रहा है.. मनमोहना और सोनिया से बात करें?

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  13. @ काकेश , गणित और नोबेल ?

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  14. bhagavaan aapko aur unchayiyan dikhaaye...aameen

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  15. आप बेशक अप्रिल फ़ूल मना रहे पर हम ‘दर्द हिन्दुस्तानी’से केस जीत गये है

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  16. नोबेल मिलने पर हमारी भी बधाई.. दस लाख डॉलर खर्च करने में कोई परेशानी हो रही हो तो हमारी सलाह लेना न भूलिएगा. :)

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  17. मच के आलू के परांठे खाइए कहीं 'आलू का बोरा' सड़ न जाए .

    इधर सुनते हैं रुपयों में भी फफूंदी लग जाती है . सो नोबेलयाफ़्ता बाबू पिरमोद सिंघ जी आंख मींच कर और सांस रोक कर दाम को 'दोऊ हाथ उलीचिए' जितना जल्दी हो सके उतना . कहां आप जैसा संत आदमी -- माफ़ कीजिए परम संत -- और कहां यह हाथ का 'मैल' .

    उलीचने में ज्यादा दिक्कत हो तो एक नम्बर देता हूं वहीं मुम्बई से ही जमा हो जाएगा और आपका ड्राफ़्ट-पोस्टेज़ का खर्चा भी बच जाएगा. क्या करूं स्वभाव ही ऐसा है कि मित्रों का रत्ती भर दुख देखा नहीं जाता . मित्र का रजकण दुख सुमेरु-सा दिखता है (इस वाक्य को संदर्भ से काट कर देखने की/उद्धरित करने की अनुमति नहीं है, देखने/करने वाले को अर्थदंड हो सकता है).

    दुख के अपने हिस्से की प्रतीक्षा में,

    आपका परदुखकातर मित्र

    चौपटस्वामी

    (वर्तमान अखाड़ा

    काली का कलकत्ता

    निअर पवित्तर हुगली)

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  18. टैसा हाजिर है
    स्‍वीकारें मित्रवर.

    http://nukkadh.blogspot.com/
    http://jhhakajhhaktimes.blogspot.com/
    http://bageechee.blogspot.com/
    http://avinashvachaspati.blogspot.com/

    आपके लिए उपयोगी लिंक्‍स, महत्‍वपूर्ण सूचनाएं.

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  19. अरे वाह बधाई। आपको बता दें कि शाहरुख भौतिकी को मैथमैटिक्स बोलता है।

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  20. "...अब ये दसेक लाख डॉलर्स का आखिर मैं करूंगा क्‍या?..."

    निजी यॉच या प्राइवेट जेट जइसन सपना नहीं देखा? निजी आइलैंड के बारे में का खयाल है? एगो सस्ता बिक रहा है सुना है...:)

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  21. ऐ गुरूजी -अग्रिम की बधईये का काम झक्कास फुटक गया लगता है - [पूरब की, पच्छिम की, उत्तर की, दक्खिन की, सुलाकी लाल की सबकी बधाईयाँ फेर-फेर कर] - इहाँ समाचार ई है कि एही से आज कल हमारे गाँव में बैंक ऊंक वाले इन्भेष्टमेंट के बहुरि चक्कर लगा रहे हैं कि आपन से सिफारिस उपारिस कर दी जाय - चिट्ठी को तार समझें अउर समझायें ससुर करना क्या है -दस हज्जार साल वाले उ के फून आबा रहा - भूल चूक लेनी देनी [ आगरा ग्वालिअर के मेडल का हम रख लेई ?]

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