Saturday, April 19, 2008

कहां-कहां से गुज़र गया..

इटली के वामपंथी बुद्धिजीवी और माइकल हार्ड्ट के साथ 'एंपायर' और 'मल्‍टीच्‍यूड' के प्रसिद्ध सह-लेखक अंतोनियो नेग्री पर कल रात एक डॉक्‍यूमेंट्री देख रहा था. उस पर बात करने का फ़ि‍लहाल मुझे धीरज नहीं है, न अभी ऐसे किसी गंभीर विमर्श की मन:स्थिति, या तैयारी. लेकिन नेट पर नेग्री संबंधी खोज-खंगाल में कुछ जो दिलचस्‍प लिंक हाथ लगे, उन्‍हें आपके साथ शेयर कर रहा हूं. एक तो खुद में समूची 'एंपायर' किताब ऑनलाइन यहां उपलब्‍ध है. ऑनलाइन नेग्री भी उपलब्‍ध हैं, मगर मेरे लिए सिर्फ़ मुस्‍करा रहे हैं, देखिए, आपके लिए उससे कहीं आगे जा रहे हैं या नहीं.. ग्‍लोबलाइज़ेशन और कम्‍यूनिकेशन पर यूरोज़ीन से हार्ड्ट और नेग्री का यह एक मज़ेदार लेख है. वहीं इधर-उधर भटकते हुए आज दार्शनिकों के लिए नीत्‍ज़े और बॉब डीलन की कविताई का मतलब क्‍या है से लेकर चीन के ब्‍लॉगिये तक पर कुछ दिलचस्‍प टुकड़े दिख रहे थे. आप भी नज़र मारकर आनंद लेना चाहते हों तो लें. वैसे मेरी सलाह है कम से कम नेग्री और हार्ड्ट की 'एंपायर' की एक कॉपी अपने कंप्‍यूटर में सेव करके ज़रूर रख लें, और ज़रा फ़ुरसत का माहौल बने तो लगे हाथ उसे पढ़ भी डालें.. और हां, चलते-चलते एक नज़र इसे भी देख लें..

4 comments:

  1. आभार इतने सारे उम्दा लिंक उपलब्ध कराने के लिये.

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  2. कल सुबह देखूंगा सर. लेकिन इतनी छोटी पोस्ट में इतना लिंक क्यों दे दिए.

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  3. bhai giovani Arrighi ki adam smith in beijing bhi dekh len. ye bhi italian hain. negri to thoda purane ho gaye hain, inki kitab vidvanon ki aaj ki charcha mein hai.
    vipin

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  4. @भाई विपिन, जोवान्नि अर्रिगी के एडम स्मिथ को हमारी तरफ़ कब भेज रहे हैं? भेजिये, भेजिये, मैं राह तक रहा हूं..

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