Thursday, July 10, 2008

जुसेप्‍पे से जिरह: एक

जुसेप्‍पे से बहुत सारी बातें पूछनी थीं, पहले तो यही कि बारह वर्षों पुरानी प्रकाशन वाली उसकी नौकरी खटाई में पड़ी थी, वहां से सम्‍माननीय तरीके से निकलने को वह हाथ-पैर मार रहा था, उसका क्‍या हुआ. दूसरे एक पेरुवियन आर्किटेक्‍ट के पीछे उसकी बीवी पागल होती रही थी, वह कहानी कहां पहुंची. दोनों बच्चियां अभी भी अपनी नानी के यहां ही थीं, या तमारा अपने मां के यहां से उठालकर उन्‍हें घर लिवा लाई थी? जुसेप्‍पे से मैं हमेशा कहता रहा हूं कि प्‍यारे, महीने-आध में घरवाली को डांस न सही कहीं आऊटिंग पर ही ले जाया करो, शहर के छोर पर गाड़ी में पेट्रोल भरवाते वक़्त बाजू के ‘जेलातेरिया’ से उसके लिए जेलातो खरीदते समय उससे पूछ लिया करो क्‍या फ्लेवर चाहती है? लेकिन नहीं, मेरी नसीहतों को सुनकर जुसेप्‍पे हंसने लगता. या मेरी दुखती नस पर पिन चुभोने की हिंसा बालसुलभ सरलता में किये सवाल करता- “और? फ़ि‍ल्‍म बनाने के लिए तुम्‍हें कोई प्रोड्यूसर मिला या नहीं? एक बात बताना, तुम किसी को खोज भी रहे हो, या यूं ही बहके-बहके फ़ि‍ल्‍ममेकर होने का सपना देखते हो?” या फिर मूड में रहता तो मुझे लाओत्‍शे का दर्शन समझाने लगता..

“You know, sweetie what. Nothing lasts. So do not become attached to anything. All that exits will perish; therefore rise above it, maintain your distance, do not try to become somebody, do not try to pursue or possess something. Act through inaction: your strength is weakness and helplessness; your wisdom, naiveté and ignorance. If you want to survive, become useless, unnecessary to everyone. Live far from others, become a hermit, be satisfied with a bowl of rice, a sip of water. And most important—observe the Tao.”

मैं हतप्रभ होकर तमारा के बारे में सोचता, दोनों बच्चियां- अंकिना और उमा के बारे में सोचता. ऐसे ही नहीं है कि तमारा रात के तीन बजे उठकर किचन में कॉफ़ी बनाने लगती है, या सुबह सात बजे अपने बिस्‍तर में होने की जगह नब्‍बे किलोमीटर दूर अपने मां के घर पर पायी जाती है! या किसी पेरुवियन आर्किटेक्‍ट की मीठी बातों से वह मुस्‍कराने लगी है.. तो उसमें उस बेचारी का क्‍या कसूर?

Observe the Tao, my foot! If I ask what is Tao, would you answer me, Mr. Knowledgeable Giuseppe, would you? I know your answer! It’s impossible to say, because the essence of Tao is its vagueness and inexpressibleness, that’s what you would say. If Tao lets itself defined as Tao, then its not genuine Tao, isn’t it?

चीन की दीवार की ही तरह एक भयभीत सभ्‍यता का बेमतलब दर्शन नहीं ताओ? मैं खीझकर अपने मित्र से जिरह करना चाहता. दो हज़ार वर्षों तक जब कभी राजकीय खज़ाने में ज़रा माल-मत्‍ता इकट्ठा हुआ, लोग चींटियों की तरह हांक-हांक कर उस महान दीवार को खड़ा करने में जोत दिये जाते. न उस दीवार की कोई निरंतरता है, न बनावट की एकरूपता, न स्‍थापत्‍य है, न लोकोपकार का कोई अंश. किसी भी बाहरी तत्‍व से स्‍वयं को किसी भी सूरत में बचाये रखने की एक भयग्रस्‍त मानसिकता से अलग क्‍या है वह दीवार? और वही है तुम्‍हारा ताओ और तुम्‍हारे लाओत्‍शे! जिनके जीवन का ठीक पता नहीं, जो एक सशंकित, भयग्रस्‍त मानस को छिपे रहकर स्‍वयं को बचाये लेने की सीख देते हैं? क्‍या है ताओ, सरवाइवर की फिलॉसफ़ी?..

माफ़ करो, जुसेप्‍पे, मैं ताओ, या लाओत्‍शे पर कोई फ़ैसला नहीं सुना रहा. चीन के बारे में मैं क्‍या जानता हूं, या तुम क्‍या जानते हो. सभ्‍यताएं इतनी विहंगम, इतनी विकराल, गुंफित व गहरी होती हैं कि उनका एक ज़रा सा हिस्‍सा समझना एक समूचे जीवन की कसरत हो सकती है. संस्‍कृति एक ऐसा रहस्‍यभरा महल है जिसमें जाने कितने सारे कमरे, गलियारे, बालकनी, और कोने-अंतरे होते हैं, कहां-कहां, कैसी-कैसी तो परतें होती हैं, वह तुम्‍हारे-मेरे थाह में आने की चीज़ है? और उस पराये लोक के बारे में तुम ऐसे आत्‍मविश्‍वास से बातें करते हो? उचित करते हो?..

मगर कमरे में मैं नींबू की चाय लिये दाखिल हुआ तो जुसेप्‍पे के सामने मेज़ पर लाओत्‍शे या कन्‍फ़्यूशियस की किताब नहीं, एक पुराना मुड़ा-तुड़ा अट्ठारहवीं सदी के आखिर का भारतीय नक़्शा था. मैंने कहा अब किसकी जान के पीछे पड़े हो, तो जुसेप्‍पे मुस्‍कराने लगा, कहा- “तुम्‍हें मालूम है मौर्यों के वक़्त राष्‍ट्रीय आय का एक बहुत बड़ा हिस्‍सा अधिकारियों के वेतन और सार्वजनिक कार्यों में लगता था? राष्‍ट्रीय आय का एक काफी बड़ा हिस्‍सा अब भी निजी कंपनियों के मालिकों के घर जा रहा है, बस फर्क़ यही हुआ है कि ठीक आज़ादी के बाद सार्वजनिक कार्यों पर भी खर्च होता था, उस ज़ि‍म्‍मेदारी से सरकारें धीरे-धीरे अब पल्‍ला झाड़ रही हैं. देखो, प्रधानमंत्री, पुरोहित और सेनाध्‍यक्ष 48,000 पण पाते थे, कोषाध्‍यक्ष और मुख्‍य समाहर्ता 24,000 पण. लेखापाल और लिपिकों के हिस्‍से 500 पण आता था, मंत्री पाते थे 12,000 पण जबकि शिल्पियों को 120 पण दिये जाते थे. हिसाब लगाकर देखो तो एक एक लिपिक और उच्‍च्‍तम अधिकारी के वेतन में 1:96 का अनुपात बैठता है, और एक शिल्‍पी और मंत्री के वेतन में 1:100 का अनुपात. आज एक बड़ी कंपनी के सीईओ और तुम-से फटीचर की आमदनी का अनुपात क्‍या है?”

मैं दीवार पर पता नहीं क्‍या देखते हुए बुदबुदाया- अनुपात तब बनेगा जब कोई आमदनी होगी. मेरी कोई आमदनी नहीं है..

(जारी)

2 comments:

  1. Giuseppe का पूरा नाम?

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  2. जुसेप्‍पे रायमोंदो, ओक्‍कादिनी, बुलचिनी, वाई, कल्‍लेगारी, तोरनातोरे.. क्‍या सरनेम है क्‍या फ़रक पड़ता है, तुम्‍हें कौन जुसेप्‍पे के घर बेटी व्‍याहनी है..

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