Monday, August 4, 2008

दुनिया को कैसे देखें? देखना किस तरह सीखें?

यू रियली मीन दैट? से ईट अगेन..



तुम कहो.. मैं तुम्‍हें कहती हुई देखती रहूंगी..



हरे में चलें? कि भूरे में? गुजरे में.. संवरे में?



फोटोशॉप और पेंट पर खुरचन..

11 comments:

  1. kya aisi hi duniya hai.
    aur kitne din ka course hai.

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  2. जी हम समझ गये कि दुनिया कैसे देखे , आप तुरंत एक बडा कारटन सिगरेट का भिजवाईये जी, हम देखते ही आपको भि बताते रहेगे कि क्या क्या देखा :)

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  3. @पंगादाज़,

    दो बच्‍चे हैं, रोज़ बड़े हो रहे हैं, और रोज़ सिगरेट की बात करते हो, अब तो सीधे कारटन की कर रहे हो, अच्‍छा नहीं कर रहे.

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  4. Dont provke....
    Romantic...
    Step..one more step...one more...Dont ask...Go ahead..

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  5. सबके फलसफे जुदा है सर जी..शुक्रिया अपना बांटने के लिये

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  6. आप दुनिया को ऐसे कैसे देख लेते हैं? बिल्कुल सही देखते हैं...

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  7. स्‍केच सुंदर हैं। इनके इस्‍तेमाल से आपके लेखों की खूबसूरती बढ़ जाती है। पढ़ाई के दिनों में मैं भी थोड़ा-मोड़ा हाथ चला लिया करता था। इस हाथचलाई की बदौलत थोड़े समय के लिए कार्टूनिस्‍ट भी बन गया था। :)

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  8. पूर्व कला सम्पादक को अैसे देखेँ !

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  9. पॉडकास्टिंग के बाद स्केचिंग का नया शिगूफा-सही जा रहे हैं. हमें भी सीखना है, क्या करें??

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  10. पूर्व कला सम्पादक या अपूर्व कला सम्पादक ?

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  11. @प्रियंकर, इतना पीर हरने को थोड़ी कहा था?

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