Tuesday, August 26, 2008

ल्‍युनिग का लात खाया लोकतंत्र..

चार-पांच वर्ष हुए जाने किस गुमनाम चैनल पर माइकल ल्‍युनिग पर एक छोटी, प्‍यारी डॉक्‍यूमेंट्री देखी थी. ऑस्‍ट्रेलिया के पुराने मिजाज़ के कार्टूनिस्‍ट हैं, कवितायें लिखी हैं और जाने क्‍या-क्‍या खुराफात किये हैं. खोज में तभी से था, हाथ अब जाकर चढ़े हैं. किसी कार्टून की किताब नहीं, डेढ़ेक मिनट का एनिमेशन है. आप भी आंख पर चढ़ायें, और फिर या तो लोकतंत्र को गरियायें, या ल्‍युनिग को.

7 comments:

  1. video ghar ja kar dekhenge, phir sochte hain kis ko gariyayen

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  2. हम्म यानि हमारा वोट मायने रखता है तो गरियाने को बचा क्या?

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  3. ल्युनिग से मिलवाने का शुक्रिया।

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  4. कल देखे। आज टिपिया रहे हैं। मजेदार! शुक्रिया!

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  5. मजेदार है. पोस्ट में जिस डॉक्‍यूमेंट्री की आपने चर्चा की है उसका अता-पता और देखने का जुगाड़?

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  6. मजेदार है. पोस्ट में जिस डॉक्‍यूमेंट्री की चर्चा आपने की है उसका अता-पता और देखने का जुगाड़ ?

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