Thursday, September 18, 2008

कटोरीभर चीनी का सीधा है.

|| एक ||
तुम्‍हारा ठांव, नेह की छांह, क्‍या कहें
कहते मुंह लरबराता है, बहुत ऊंचा है
इस अकालबेला, दलिद्दर समय में
नीचायी में मुड़ी नवाये, आंख चुराये
गरीब के घर कटोरीभर चीनी का सीधा है.
|| दो ||
इलागिंग करेंगे, बिलागिंग करेंगे, का पायेंगे?
कभी आपकी, ज़ादा अपनी मुड़ी खुजायेंगे
दरवाज़े की फांक से, फटही की ढांप से फिर
दो-चार बिल चला आयेगा तो गाल पर हाथ धरे
चुप्‍पे-चुप्‍पे धुंआ पियेंगे, बुदबुदायेंगे एक-दो-तीन
अलमूनियम की थरिया में मांड़-भात खायेंगे?

1 comment:

  1. जै कविताई बहुत महत्वपूर्ण है।
    आपको कुछ दिलाएगी
    जब बिल आएंगे तो
    टेंशन मुक्ति
    से मिलवाएगी

    ReplyDelete