Sunday, October 26, 2008

मुंबई मेरी जान.. किसकी?

मुंबई किसके बाप की है.. या जिसके भी बाप की नहीं है पर एक अच्‍छी टिप्‍पणी तीन दिन पहले इंडियन एक्‍सप्रेस में विनय सीतापति ने लिखी है. मौज़ूदा माहौल की संक्षिप्‍त लेकिन असरकारी समीक्षा है, एक नज़र आप भी मार लें, यहां..

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