Monday, November 17, 2008

चोर-चोर हेंहेंरे थेथर भाई..

स्‍पेक्‍ट्रम क्‍या है? स्‍पेक्‍ट्रम का एलोकेशन? आप कहियेगा हमें नहीं मालूम तो मैं कहूंगा शायद ठीक-ठीक मिनिस्‍ट्री ऑफ़ टेलीकॉम्‍यूनिकेशन को भी नहीं मालूम! अर्द्धशिक्षित समाजों, व अर्द्धशिक्षित सरकारों के साथ यही फ़ायदा है कि जनता हंसते-हंसते लात खाती रहती है कि हें-हें ईश्‍वर का यही विधान है, और लात लगानेवाले जगहों पर बैठे राजा बाबू मंत्री महोदय हें-हें करते कभी मन हुआ तो जवाब देने को उदित होते हैं बकिया पता नहीं कहां अंतर्ध्‍यान रहते हैं कि चिरकुटई किसी से कहां हुई है, ऐसा ही प्रावधान है? इस चिरकुट तमाचाख़ोर प्रहसन में होता यह है कि चंद घाघ कंपनियां पता नहीं अपने फ़ायदों में मंत्री महोदय का कितना तिलक करती-कराती हैं, लेकिन राष्‍ट्रीय खज़ाने का लगभग पचास हज़ार करोड़ घोलकर पी जाती हैं! नतीजे में क्‍या होता है? न किसी को तमाचा मिलता है, न कहीं किसी की वाजिब जवाबदारी बनती है. मिनिस्‍ट्री आफ़ टेलीकॉम्‍यूनिकेशन के इस बड़े घपले की विस्‍तृतकथा यहां पढ़ि‍ये.

2 comments:

  1. .ऐसा लग रहा है कि पहले से ही किसी को जानकारी ना हो तो इसको[LINK] पढने के बाद भी कुछ समझ में नही आयेगा

    ReplyDelete
  2. अनुपम भैया, इसीलिए शायद चोरों की चोरी भी कहां पकड़ायेगी?

    ReplyDelete